सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस वर्मा के खिलाफ FIR की याचिका पर अर्जेंट लिस्टिंग की मांग
एक नई याचिका में पूर्व इलाहाबाद हाई कोर्ट जज यशवंत वर्मा के दिल्ली आवास में आग के दौरान मिली नकदी को लेकर FIR दर्ज करने की मांग की गई है और इसे तुरंत सूचीबद्ध करने की अपील की गई है। याचिकाकर्ता तर्क देते हैं कि रजिस्ट्री मामले को सूचीबद्ध करने से इंकार कर रही है, जबकि अन्य पक्ष लोकसभा जांच समिति की पुष्टि को उजागर कर समान न्याय की मांग कर रहे हैं।

सौजन्य से:- Jagran
जस्टिस वर्मा के खिलाफ FIR के लिए सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका, अर्जेंट लिस्टिंग की मांग
इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित आवास से नकदी मिलने के मामले में एफआईआर दर्ज ...और पढ़ें
HighLights
- पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ एफआईआर की नई याचिका
- दिल्ली आवास पर आग में नकदी मिलने का मामला
- सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख किया गया
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित आवास से कथित तौर पर नकदी मिलने के मामले में एफआइआर दर्ज करने की मांग को लेकर दायर एक नई याचिका का बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अर्जेंट लिस्टिंग के लिए उल्लेख किया गया।
वकील मैथ्यूज जे. नेदुमपारा ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ से याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आग्रह किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री इस मामले को सूचीबद्ध करने से इन्कार कर रही है।
एक अन्य याचिकाकर्ता ने खुद उपस्थित होकर कहा कि लोकसभा की जांच समिति ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ आरोपों को सही पाया है। एफआइआर दर्ज करने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। सबके साथ समानता का व्यवहार होना चाहिए। हालांकि, सीजेआइ ने याचिका को सूचीबद्ध करने के बारे में कुछ नहीं कहा।
21 सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने और मामले की सीबीआइ से जांच कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इन्कार कर दिया था। 14 मार्च 2025 को होली की रात जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित आवास पर आग लग गई थी।
आग बुझाने के दौरान दमकल कर्मचारियों को भारी मात्रा में नकदी मिली थी। महाभियोग की कार्यवाही का सामना कर रहे जस्टिस वर्मा ने इसी साल नौ अप्रैल को इस्तीफा दे दिया था।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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