सुप्रीम कोर्ट ने 7-2 से ट्रम्प के डाक‑वोटिंग कड़े नियमों पर रोक बरकरार रखी
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 7-2 मत से ट्रम्प की डाक‑से‑वोटिंग को कड़ा करने की योजना को नकारा और निचली अदालत के आदेश को बनाए रखा। उन्होंने बताया कि नवंबर के मिडटर्म चुनाव से पहले नए नियम लागू करने का समय नहीं है, जबकि ट्रम्प ने मतदाता सूचियों को USPS को देने की मांग की थी। इस फैसले ने डेमोक्रेटिक‑समर्थक राज्यों और मताधिकार संगठनों की आपत्तियों को मान्यता दी।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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ट्रम्प की डाक वोटिंग सख्त करने की कोशिश पर रोक:सुप्रीम कोर्ट के 9 में से 7 जज खिलाफ; वोटरों की जानकारी USPS को देने का था आदेश
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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डाक से वोटिंग के नियम सख्त करने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कोशिश पर लगी रोक हटाने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने सोमवार को निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला 7-2 रहा। दो जज ने इसका विरोध किया।
मामला नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से जुड़ा है। ट्रम्प ने मार्च में आदेश जारी किया था। ट्रम्प का कहना था कि डाक से वोटिंग में गड़बड़ी रोकने के लिए नए नियम जरूरी है। वे चाहते थे कि डाक से वोट भेजने वाले लोगों की लिस्ट राज्यों को अमेरिकी डाक सेवा (USPS) को दी जाए।
ट्रम्प के नियम के तहत USPS रोक सकता था बैलेट
अगर कोई बैलेट नए नियमों के मुताबिक नहीं होता या वोट देने वाले का नाम तय लिस्ट में नहीं मिलता, तो USPS उस बैलेट को रोक सकता था।
डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकार वाले राज्यों और वोटिंग अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने इन नियमों का विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे चुनाव के दौरान लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।
कोर्ट ने समय पर उठाया सवाल
डाक से वोटिंग के मामले पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के सामने सबसे बड़ा सवाल समय का था। नवंबर के चुनाव में अब कुछ समय बचा है और कई राज्यों में बैलेट भेजने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
जस्टिस ब्रेट कावानॉ ने कहा कि ट्रंप की योजना भविष्य में लागू की जा सकती है, लेकिन नवंबर के चुनाव से ठीक पहले इसे लागू करना मुश्किल है। चुनाव अधिकारियों के पास नई व्यवस्था तैयार करने और उसे लागू करने के लिए जरूरी समय नहीं है।
डाक से वोटिंग पर ट्रम्प ने पहले भी उठाए सवाल
2020 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद ट्रम्प ने डाक से वोटिंग पर सवाल उठाए थे। वह बिना सबूत यह दावा करते रहे कि चुनाव में गड़बड़ी हुई थी और उनसे जीत छीन ली गई।
हालांकि, ट्रंप खुद भी डाक से वोट डाल चुके हैं। इस साल फ्लोरिडा के रिपब्लिकन प्राइमरी में उन्होंने मेल से वोट किया था।
USPS ने भी ट्रंप के फैसले पर जताई थी चिंता
ट्रंप की नई व्यवस्था को लेकर USPS के एक व्हिसलब्लोअर ने भी चिंता जताई थी। उसने कहा था कि नई तकनीकी व्यवस्था जल्दबाजी में तैयार की गई है। अगर इसमें कोई गड़बड़ी हुई तो लाखों लोगों के बैलेट समय पर नहीं पहुंच पाएंगे।
नई व्यवस्था में बैलेट के लिफाफे पर मौजूद बारकोड और मतदाता की जानकारी को एक ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ना था। चुनाव से कुछ हफ्ते पहले इतना बड़ा बदलाव अधिकारियों के लिए भी चुनौती था।
अमेरिका में नवंबर में मिडटर्म चुनाव होंगे
अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मिडटर्म चुनाव होंगे। इसमें कांग्रेस के दोनों सदनों हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट के लिए चुनाव होंगे।
अभी अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी के पास डेमोक्रेटिक पार्टी से ज्यादा सीटें हैं, लेकिन दोनों के बीच सीटों का अंतर बहुत कम है।
अगर डेमोक्रेटिक पार्टी ज्यादा सीटें जीतकर बहुमत में आती है, तो वह ट्रम्प के फैसलों को रोकने की कोशिश कर सकती है। साथ ही ट्रम्प सरकार के कामकाज की जांच भी कर सकती है।
ट्रम्प के 5 और फैसलों पर SC की रोक
टैरिफ - फरवरी 2026
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के टैरिफ को अवैध ठहराया और कहा कि राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है।
इलिनॉय में नेशनल गार्ड - दिसंबर 2025
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प सरकार को इलिनॉय में नेशनल गार्ड तैनात करने की तत्काल अनुमति नहीं दी।
बर्थराइट सिटीजनशिप - जून 2026
ट्रम्प ने अमेरिका में जन्म लेने वाले कुछ बच्चों की जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा कानून राष्ट्रपति को ऐसा बदलाव करने की इजाजत नहीं देता।
बर्थ टूरिज्म - सितंबर 2026
सुप्रीम कोर्ट से बर्थराइट सिटीजनशिप पर झटका लगने के बाद ट्रम्प ने बर्थ टूरिज्म रोकने और कुछ मामलों में बच्चों की नागरिकता सीमित करने के लिए नया आदेश जारी किया, लेकिरन कोर्ट ने इस पर भी रोक लगा दी।
फेड गवर्नर को हटाने का मामला - जून 2026
ट्रम्प ने फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक को पद से हटाने की कोशिश की थी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि फेड गवर्नर को राष्ट्रपति बिना उचित कानूनी कारण और तय प्रक्रिया के नहीं हटा सकते।
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