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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पूर्व मुवक्किल के मामले में जज को खुद को अलग कर लेना चाहिए था

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया है और कहा है कि यदि किसी जज ने वकालत के दौरान किसी पक्षकार का प्रतिनिधित्व किया हो, तो बाद में उसी पक्ष से जुड़े मामले की सुनवाई करने से पहले जज को खुद को अलग कर लेना चाहिए।

30 जुलाई 2026 को 03:33 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पूर्व मुवक्किल के मामले में जज को खुद को अलग कर लेना चाहिए था

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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पूर्व मुवक्किल के केस की सुनवाई पड़ी भारी:सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया उत्तराखंड हाईकोर्ट का आदेश; कहा- जज को खुद को अलग कर लेना चाहिए था

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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश द्वारा अपने पूर्व मुवक्किल से जुड़े मामले की सुनवाई करने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी जज ने वकालत के दौरान किसी पक्षकार का प्रतिनिधित्व किया हो, तो बाद में उसी पक्ष से जुड़े मामले

क्या है पूरा मामला? मामला प्रतीक रिसॉर्ट्स एंड बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम पुनीत अग्रवाल एवं अन्य से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सामने यह तथ्य आया कि संबंधित हाईकोर्ट जज, न्यायाधीश बनने से पहले अधिवक्ता के रूप में इसी कंपनी की ओर से पेश हो चुके थे। बाद में जज बनने के बाद उन्होंने उसी पक्ष से जुड़े विवाद की सुनवाई की और फैसला भी सुना दिया। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति हितों के संभावित टकराव पैदा करती है और इससे न्यायिक निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि "न्याय केवल निष्पक्ष होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वह निष्पक्ष दिखाई भी देना चाहिए।" पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि किसी न्यायाधीश का किसी पक्षकार से पहले पेशेवर संबंध रहा हो तो न्यायिक शुचिता की मांग है कि वह उस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लें। ऐसा नहीं होने पर न्यायपालिका में जनता के विश्वास पर असर पड़ सकता है।

अब क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया है। साथ ही निर्देश दिया है कि मामले को किसी अन्य पीठ के समक्ष नए सिरे से सूचीबद्ध कर सुनवाई की जाए। हितों के टकराव की आशंका बनने पर जज खुद को सुनवाई से अलग कर लेते हैं। इसका उद्देश्य न्यायिक निष्पक्षता और अदालत की विश्वसनीयता बनाए रखना होता है। मामले की सुनवाई अब हाईकोर्ट की दूसरी बेंच करेगी।

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