हिरासत में मौत: सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में मौत के मामलों में मुआवजा नियमों पर सख्त टिप्पणी की और जवाबदेही तय करने पर जोर दिया

हिरासत में मौत के मामलों में पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने की मांग के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि राज्य की हिरासत में किसी व्यक्ति की अस्वाभाविक मृत्यु होने पर राज्य की जवाबदेही स्वतः उत्पन्न होती है। अली हम्माद, लीगल डेस्क के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा का अधिकार हिरासत में मौजूद प्रत्येक व्यक्ति को समान रूप से प्राप्त है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में विभिन्न न्यायालयों ने हिरासत में मौत के मामलों में मुआवजा प्रदान करने को सार्वजनिक कानून उपचार के रूप में स्वीकार किया है। सूत्र: अली हम्माद, लीगल डेस्क
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