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अगर सुप्रीम कोर्ट ने नहीं माननी तो 5 लाख लोगों का रोजगार होगा असुरक्षित

भोपाल में 60 से 80 हजार कमर्शियल प्रतिष्ठान राज्य सरकार के लिए समस्या बन गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए हैं कि नियम अनुसार नहीं चल रही कमर्शियल गतिविधियों को बंद किया जाए।

8 अगस्त 2026 को 01:16 am बजे
अगर सुप्रीम कोर्ट ने नहीं माननी तो 5 लाख लोगों का रोजगार होगा असुरक्षित

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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सुप्रीम आदेश के दायरे में 80 हजार प्रतिष्ठान:5 लाख रोजगार संकट में, कार्रवाई नहीं की तो सुप्रीम कोर्ट की अवमानना; अब मास्टर प्लान ही विकल्प

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रहवासी क्षेत्रों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से राज्य सरकार दुविधा में है। सुप्रीम कोर्ट ने नियम विरुद्ध चल रही सभी कमर्शियल गतिविधियों को बंद करने के आदेश दिए हैं। भोपाल में इस आदेश की जद में करीब 60 से 80 हजार कमर्शियल प्रतिष्ठान हैं।

यदि इन पर कार्रवाई नहीं होती तो अदालत की अवमानना होगी, जबकि इन्हें बंद करने पर करीब 5 लाख लोगों का रोजगार प्रभावित हो सकता है। ऐसे में नए मास्टर प्लान में ही इसका व्यावहारिक समाधान तलाशने पर मंथन चल रहा है।

दरअसल, भोपाल में एक लाख से अधिक कमर्शियल प्रॉपर्टियां हैं। इनमें से 60 से 80 हजार में भू-उपयोग, भवन अनुमति या अन्य नियमों के उल्लंघन का अनुमान है। नगर निगम के रिकॉर्ड में ही नर्मदापुरम रोड पर करीब 2,500 व कोलार रोड पर लगभग 2,000 कमर्शियल प्रॉपर्टियां दर्ज हैं।

अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत सर्वे होने पर वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, भोपाल के नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार है और शासन स्तर पर इसकी समीक्षा चल रही है। चर्चा इस बात पर है कि वर्षों में बाजार का रूप ले चुकी प्रमुख सड़कों के लिए व्यावहारिक प्रावधान किए जाएं, जबकि अरेरा कॉलोनी जैसी लो-डेंसिटी रहवासी कॉलोनियों का मूल स्वरूप सुरक्षित रखा जाए।

दूसरे राज्यों के मॉडल भी देख रहे अफसर : टाउन प्लानिंग विभाग सड़क की चौड़ाई, पार्किंग, ट्रैफिक और क्षेत्र के स्वरूप के आधार पर नियंत्रित कमर्शियल उपयोग के प्रावधानों पर विचार कर रहा है। अस्पताल, स्कूल, बस टर्मिनस और मेट्रो स्टेशन जैसे बड़े संस्थानों के आसपास विकसित होने वाली सहायक व्यावसायिक गतिविधियों को भी प्लानिंग में शामिल करने की तैयारी है। इसके लिए दूसरे राज्यों के नियमों का भी अध्ययन किया जा रहा है।

देर की तो बाकी के शांत रहवासी इलाके भी ऐसे ही दिखेंगे

यह रहवासी क्षेत्र है... गाड़ियों से पटी सड़क और बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों की यह तस्वीर कोलार रोड की है। यहां रहवासी क्षेत्र में कमर्शियल गतिविधियां संचालित हैं। निगम का दावा है कि यहां ऐसी 2,000 प्रॉपर्टी हैं।

समस्या : शहर बढ़ रहा, 31 साल से प्लानिंग नहीं भोपाल का लागू मास्टर प्लान 1995 में बना था और इसकी अवधि 2005 में समाप्त हो गई। इसके बाद शहर की आबादी, सीमाएं और कारोबारी जरूरतें तेजी से बढ़ीं, पर भूमि उपयोग में बदलाव नहीं हुआ। नतीजतन-नर्मदापुरम रोड, कोलार रोड जैसी प्रमुख सड़कें बाजार बन गईं, जबकि रिकॉर्ड में उनका मूल भू-उपयोग नहीं बदला।

विकल्प: 18 मीटर से चौड़ी सड़कों पर छूट दे सकते हैं नए मास्टर प्लान में प्रमुख सड़कों के लिए अलग प्रावधान होंगे। 18 मीटर से अधिक चौड़ी सड़कों पर पर्याप्त पार्किंग, ट्रैफिक प्रबंधन व नागरिक सुविधाओं की शर्तों के साथ नियंत्रित कमर्शियल गतिविधियों की मंजूरी दी जा सकती है। इससे नर्मदापुरम रोड व कोलार रोड जैसे पहले से विकसित बाजारों को व्यावहारिक समाधान मिल सकता है।

सतर्कता : समाधान की आड़ में पूरा शहर ही बाजार न बने सूत्रों के अनुसार, सरकार सभी रहवासी क्षेत्रों को कमर्शियल घोषित करने के पक्ष में नहीं है। अरेरा कॉलोनी जैसी नियोजित लो-डेंसिटी कॉलोनियों में बड़े अस्पताल, होटल व शोरूम नियमित करने से ट्रैफिक व नागरिक सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा। प्रमुख सड़कों पर विकसित बाजार व शांत रहवासी इलाकों के लिए अलग प्रावधान होंगे।

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