न्याय की प्रक्रिया में पीड़ितों को तेजी से मुआवजा देने के लिए अदालत सख्त
देशभर की अदालतें विक्टिम कंपेंसेशन फंड के उपयोग को लेकर सख्त हो गई हैं, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट्स ने ट्रायल कोर्ट को सजा सुनाते समय ही पीड़ित मुआवजे पर विचार करने और उचित मामलों में तुरंत मुआवजा देने के आदेश देने को कहा है। यह आपराधिक न्याय प्रणाली में पीड़ित केंद्रित दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

देशभर की अदालतों ने विक्टिम कंपेंसेशन फंड के उपयोग और वितरण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट्स ने कहा है कि ट्रायल कोर्ट को सजा सुनाते समय ही पीड़ित मुआवजे पर विचार करना चाहिए और उचित मामलों में तुरंत मुआवजा देने के आदेश पारित करने चाहिए।
न्यायिक व्यवस्था के तहत विक्टिम कंपेंसेशन स्कीम (धारा 357ए सीआरपीसी / अब बीएनएसएस प्रावधानों के अनुरूप) के अंतर्गत राज्य सरकारों द्वारा बनाए गए फंड से पीड़ितों को आर्थिक सहायता दी जाती है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, सभी ट्रायल कोर्ट्स को निर्णय के समय ही पीड़ित मुआवजे पर आदेश पारित करना चाहिए, ताकि राहत समय पर मिल सके और प्रक्रिया लंबित न रहे।
विशेषज्ञों के अनुसार, अदालतों का यह रुख आपराधिक न्याय प्रणाली में पीड़ित केंद्रित दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सूत्र: आाज तक
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