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जस्टिस शील नागू ने पंजाब मुख्यमंत्री कार्यालय भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया, केस नई पीठ को सौंपा जाएगा

सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार के सीबीआई जांच आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर जस्टिस शील नागू ने अपना पक्ष नहीं लिया, जिससे मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर मामला दूसरी पीठ को भेजा जाएगा। जस्टिस दीपांकर दत्ता ने बताया कि नई बेंच को यह केस सौंपा जाएगा और वर्तमान में सुनवाई की कठिन परिस्थितियों को दर्शाया। यह मामला मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार आरोपों पर आधारित है।

9 अक्टूबर 2026 को 09:05 am बजे
जस्टिस शील नागू ने पंजाब मुख्यमंत्री कार्यालय भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया, केस नई पीठ को सौंपा जाएगा

सौजन्य से:- Jagran

पंजाब CM ऑफिस से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में नया मोड़, सुनवाई से अलग हुए जस्टिस शील नागू; नई बेंच के पास जाएगा केस

पंजाब सरकार को मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में सुप्रीम कोर्ट में झटका लगा, जहां जस्टिस शील नागू ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।

HighLights

- जस्टिस शील नागू ने सुनवाई से खुद को अलग किया

- मुख्य न्यायाधीश अब नई पीठ को यह मामला सौंपेंगे

- पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के सीबीआई जांच आदेश को चुनौती दी

दयानंद शर्मा ,चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में पंजाब सरकार को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक और कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ा।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस शील नागू ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया।

अब यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर दूसरी पीठ के समक्ष रखा जाएगा। जस्टिस नागू पहले पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं और जून 2026 में सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत हुए थे।

जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा- दूसरी पीठ को सौंपा जाएगा मामला

शुक्रवार को याचिका पर जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। मामला शुरू होने पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि इस मामले की सुनवाई जस्टिस नागू नहीं कर सकते और इसे मुख्य न्यायाधीश दूसरी पीठ को सौंपेंगे।

पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने बताया कि जस्टिस नागू ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहते हुए जनहित याचिकाकर्ता की कुछ याचिकाओं को खारिज करने के आदेश पारित किए थे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अपनी मौजूदा याचिका में उन आदेशों पर भरोसा नहीं कर रही है।

इसके बावजूद जस्टिस दत्ता ने कहा कि जस्टिस नागू सुनवाई से अलग हो रहे हैं। उन्होंने टिप्पणी की कि मौजूदा समय काफी कठिन है और यह पता नहीं होता कि हमला कहां से हो सकता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में 17 अन्य पीठ भी हैं।

यह भी पढ़ें- 'सिर्फ पोस्ट डालने वाला जिम्मेदार क्यों, प्लेटफॉर्म्स पर भी हो एक्शन'; अफवाहों से भड़की LPU में हिंसा पर HC सख्त

मुख्यमंत्री के ओएसडी से जुड़े आरोपों की सीबीआई करेगी जांच

यह मामला मुख्यमंत्री भगवंत मान के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों का है।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की पीठ ने सोमवार को सीबीआई को आपराधिक मामला दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया था।

यह आदेश अधिवक्ता निखिल सराफ की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से जानकारी और पत्राचार भेजे जाने के बावजूद पंजाब पुलिस ने मामले में उचित कार्रवाई नहीं की।

हाई कोर्ट के समक्ष रखी गई जानकारी के अनुसार, ईडी ने नितिन गोहल नामक व्यक्ति से जुड़े आरोपों की ओर ध्यान दिलाया था।

आरोप है कि वह पंजाब सरकार से विभिन्न लाभ हासिल करने के इच्छुक लोगों और संबंधित पक्षों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता था। मामले में तबादले करवाने, गोपनीय सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच दिलाने, हथियार लाइसेंस हासिल कराने और अन्य सुविधाएं दिलाने जैसे आरोप शामिल हैं। इन आरोपों की जांच अभी होनी है और इन्हें सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता

पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को दी चुनौती

पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की है। राज्य सरकार का तर्क है कि धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 66(2) के तहत ईडी से मिली जानकारी पर पुलिस को तभी कार्रवाई करनी चाहिए, जब उससे संज्ञेय अपराध का खुलासा होता हो।

सरकार ने यह भी दलील दी है कि हाई कोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट के विजय मदनलाल चौधरी फैसले के अनुरूप नहीं है। राज्य सरकार ने मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की थी। अब जस्टिस नागू के अलग होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में नई पीठ के समक्ष इस याचिका पर सुनवाई होगी।

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