होम›अपराध›पूर्व SC जज ने ECI के SIR फैसले को धोखाधड़ी कहा, सुप्रीम कोर्ट को पुनः विचार करना चाहिए
अपराध

पूर्व SC जज ने ECI के SIR फैसले को धोखाधड़ी कहा, सुप्रीम कोर्ट को पुनः विचार करना चाहिए

जस्टिस वी. गोपाला गौड़ा ने कहा कि चुनाव आयोग ने SIR संबंधी तथ्य गलत पेश करके सुप्रीम कोर्ट को गुमराह किया, इसलिए मई 2026 का निर्णय अमान्य है और कोर्ट को स्वयं पहल कर पुनः समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने आयोग के रिकॉर्ड की जांच की माँग की ताकि यह तय किया जा सके कि फ़ैसला पूर्ण आयोग की मंज़ूरी से लिया गया था या नहीं, और साथ ही न्यायाधीश उज्ज्वल भुयन के बयान के समर्थन में अपने विचार रखे।

9 अक्टूबर 2026 को 06:04 am बजे
पूर्व SC जज ने ECI के SIR फैसले को धोखाधड़ी कहा, सुप्रीम कोर्ट को पुनः विचार करना चाहिए

सौजन्य से:- Live Law Hindi

SIR मामले में ECI ने ग़लत तथ्य पेश करके सुप्रीम कोर्ट के साथ की धोखाधड़ी, फैसला वापस लिया जाना चाहिए: पूर्व एससी जज गोपाला गौड़ा

LiveLaw Network

9 Oct 2026 10:33 AM IST

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस वी. गोपाला गौड़ा ने कहा कि वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) को कराने के चुनाव आयोग (ECI) के फ़ैसले को सही ठहराने वाले सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के फ़ैसले को वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला चुनाव आयोग द्वारा कोर्ट को गुमराह करने और तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने का नतीजा है।

'लाइव लॉ' (LiveLaw) से बातचीत में जस्टिस गौड़ा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को खुद से (suo motu) इस फ़ैसले को वापस लेना चाहिए और चुनाव आयोग से सभी रिकॉर्ड मंगाने चाहिए। इससे यह पता चल सके कि SIR शुरू करने का फ़ैसला 'फुल कमीशन' (पूरे आयोग) ने लिया था या नहीं, और क्या इसमें ज़्यादातर चुनाव आयुक्तों की सहमति और मंज़ूरी शामिल थी।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने कार्यवाही के दौरान तथ्यों को गलत तरीके से पेश करके कोर्ट के साथ "धोखाधड़ी" की है।

जस्टिस गौड़ा के अनुसार, कोर्ट को चुनाव आयोग के भीतर फ़ैसला लेने की प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए ताकि यह तय किया जा सके कि SIR के फ़ैसले को 'फुल कमीशन' की मंज़ूरी मिली थी या नहीं।

जस्टिस गौड़ा ने कहा,

"[SIR] फ़ैसले में गैर-कानूनीपन और असंवैधानिकता साफ़ तौर पर दिखती है।"

उन्होंने कहा कि 'द इंडियन एक्सप्रेस' की हालिया रिपोर्ट से पता चलता है कि SIR से जुड़े कई फ़ैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई और मुख्य चुनाव आयुक्त ने ECI के नाम पर एकतरफ़ा तौर पर ये फ़ैसले लिए थे। हालांकि, यह बात सुप्रीम कोर्ट के ध्यान में नहीं लाई गई। उन्होंने कहा कि जानबूझकर तथ्यों को छिपाना कोर्ट के साथ धोखाधड़ी करने जैसा है, और धोखाधड़ी फ़ैसले के आधार को ही खत्म कर देती है।

जस्टिस गौड़ा ने कहा कि 26 सितंबर को चुनाव आयोग द्वारा जारी प्रेस रिलीज़ में असल में 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट को मान लिया गया। साथ ही, उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि बदले हुए 'फॉर्म 6' को सुप्रीम कोर्ट ने मंज़ूरी दे दी है। हालाँकि, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने हाल ही में इस बात से इनकार किया कि सुप्रीम कोर्ट ने 'फॉर्म 6' में किसी भी बदलाव को मंज़ूरी दी थी।

जस्टिस गौड़ा ने कहा कि इन पहलुओं को देखते हुए SIR फ़ैसले पर फिर से विचार करने की ज़रूरत है। जस्टिस भुयन ने कुछ भी गलत नहीं किया

जस्टिस गौड़ा ने सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुयन का बचाव किया।

जस्टिस भुयन की आलोचना इसलिए हो रही है, क्योंकि उन्होंने बड़ी संख्या में वोटरों के वोट देने का अधिकार छिनने के मुद्दे पर टिप्पणी की।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज के तौर पर जस्टिस भुयन का बड़ी संख्या में वोटरों के वोट देने का अधिकार छिनने के मुद्दे पर टिप्पणी करना किसी भी तरह से गलत नहीं है, क्योंकि एक जज को संवैधानिक मुद्दे पर बोलने का अधिकार है।

जस्टिस गौड़ा ने पूछा,

"लॉ स्टूडेंट्स से संवैधानिक अधिकारों के बारे में बात करने में क्या गलत है?"

जस्टिस गौड़ा की यह टिप्पणी भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बी.आर. गवई द्वारा जस्टिस भुयन की आलोचना के संदर्भ में आई है। गवई ने SIR मुद्दे पर भुयन की टिप्पणियों की आलोचना की थी।

आलोचना का जवाब देते हुए जस्टिस गौड़ा ने सवाल किया कि पूर्व CJI गवई को जस्टिस भुयन की आलोचना करने का क्या अधिकार है। उन्होंने एक उदाहरण का ज़िक्र किया जब पूर्व CJI गवई बॉम्बे हाई कोर्ट के जज के तौर पर 'जज लोया केस' पर टिप्पणी कर चुके थे, जबकि उस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है।

जस्टिस गौड़ा ने यह भी सवाल किया कि गवई ने उन रिपोर्टों पर लोगों की चिंताओं का जवाब क्यों नहीं दिया, जिनमें कहा गया कि चुनाव आयोग के अहम फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए।

जस्टिस गौड़ा ने बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में CJP द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। वहां उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के SIR फैसले से असहमति जताई और इसे "असंवैधानिक, गैर-कानूनी और अलोकतांत्रिक" करार दिया।

फ्रीडम पार्क में जमा लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा,

"भारत सरकार के शीर्ष पर बैठे लोगों के समर्थन से CEC लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं। लोग उन्हें सबक सिखाएंगे।"

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
पूर्व जज का आव्हान: सुप्रीम कोर्ट के एसआईआर फैसले को असंवैधानिक घोषित कर पुनः विचार की मांग
अपराध

पूर्व जज का आव्हान: सुप्रीम कोर्ट के एसआईआर फैसले को असंवैधानिक घोषित कर पुनः विचार की मांग

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को कानूनी दायरे में कड़ी कार्रवाई का निर्देश
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को कानूनी दायरे में कड़ी कार्रवाई का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस, ECI के SIR रिवीजन पर मतदाता हटाने के विवाद की जांच
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस, ECI के SIR रिवीजन पर मतदाता हटाने के विवाद की जांच

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: अलगाव के बाद आत्महत्या में पूर्व जीवनसाथी को हमेशा अतिक्रमण का आरोप नहीं लगाया जा सकता
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: अलगाव के बाद आत्महत्या में पूर्व जीवनसाथी को हमेशा अतिक्रमण का आरोप नहीं लगाया जा सकता

42 पूर्व न्यायाधीशों ने चुनाव आयोग व संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा की, कहा आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार है, अपमान नहीं
अपराध

42 पूर्व न्यायाधीशों ने चुनाव आयोग व संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा की, कहा आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार है, अपमान नहीं

हाई कोर्ट में सीधे अग्रिम ज़मानत की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
अपराध

हाई कोर्ट में सीधे अग्रिम ज़मानत की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट ने जताई कठोर चेतावनी: नरमी से बढ़ता अपराध
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने जताई कठोर चेतावनी: नरमी से बढ़ता अपराध

केरल हाई कोर्ट ने स्कूलगर्ल पर यौन अत्याचार के आरोपी के जीवनकाल की सज़ा बरकरार रखी
अपराध

केरल हाई कोर्ट ने स्कूलगर्ल पर यौन अत्याचार के आरोपी के जीवनकाल की सज़ा बरकरार रखी

ताज़ा ख़बरें