पटना हाईकोर्ट ने निचली अदालत की समानांतर अवमानना कार्यवाही पर कड़ी टिप्पणी की
हाईकोर्ट ने कहा कि जब मुख्य मामला उसके समक्ष चल रहा हो तो निचली अदालत को प्रक्रियात्मक मर्यादा और न्यायिक अनुशासन का पालन करना चाहिए। ट्रायल कोर्ट द्वारा पीड़िता के खिलाफ धारा 193 आईपीसी के तहत सीधे एफआईआर दर्ज करने का आदेश देना अवैध बताया गया और आगे की कार्यवाही पर रोक लगाकर विस्तृत रिपोर्ट तथा फाइलें मांगी गईं।

सौजन्य से:- ETV Bharat
पटना हाईकोर्ट की निचली अदालत पर सख्त टिप्पणी, कहा- 'न्यायिक अनुशासन का पालन बेहद जरूरी'
पटना हाईकोर्ट ने रोहतास की निचली अदालत द्वारा समानांतर अवमानना कार्रवाई चलाने पर सख्त रुख अपनाते हुए कड़े निर्देश दिए हैं.
Published : October 9, 2026 at 1:16 PM IST
पटना: ट्रायल कोर्ट द्वारा अवमानना कार्रवाई और आदेश पर सख्त रुख अपनाते हुए पटना हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायिक अनुशासन का पालन आवश्यक है. जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद एवं जस्टिस सुनील दत्ता मिश्रा की खंडपीठ ने रोहतास (सासाराम) के एक आपराधिक मामले में निचली अदालत द्वारा की गई कार्रवाई और आदेशों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है.
मामले की मुख्य पृष्ठभूमि
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब मामला हाईकोर्ट के विचाराधीन हो, तो निचली अदालत को प्रक्रियात्मक मर्यादा और न्यायिक अनुशासन का पालन करना चाहिए था. रोहतास जिले के सासाराम नगर थाना कांड संख्या 183/2022 से जुड़े एक आपराधिक मामले में निचली अदालत ने निर्णय सुनाते हुए पीड़िता के खिलाफ धारा 193 आईपीसी (झूठी गवाही देना) के तहत प्राथमिकी एफआईआर दर्ज करने का आदेश एसपी को दिया था.
कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी
इसके साथ ही तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (एसपी), रोहतास के खिलाफ टिप्पणी की गई थी. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट का ध्यान आकर्षित करते हुए बताया गया कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 195 (अब BNSS की धारा 215) के तहत धारा 193 आईपीसी के तहत मामला केवल संबंधित अदालत द्वारा लिखित शिकायत के माध्यम से दर्ज किया जा सकता है, न कि सीधे एफआईआर का निर्देश देकर.
समानांतर सुनवाई का विवाद
राज्य सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि अपील हाईकोर्ट में लंबित होने और रिकॉर्ड मंगाए जाने के बावजूद निचली अदालत ने आदेश के पालन में देरी का हवाला देते हुए समानांतर सुनवाई शुरू कर दी. इस दौरान रोहतास के तत्कालीन एसपी के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई करते हुए उन्हें दोषी करार दिया गया और जुर्माना भी लगा दिया गया.
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने इस स्थिति को अभूतपूर्व और असाधारण बताते हुए कहा कि जब मुख्य मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है, तब ट्रायल कोर्ट का इस तरह की कार्रवाई करना न्यायिक अनुशासनहीनता को दर्शाता है. हाईकोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश निचली अदालत द्वारा की जा रही आगे की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए कहा गया कि मामले को अभी और आगे न बढ़ाया जाए.
अदालत का अंतिम निर्देश
हाईकोर्ट ने सासाराम (रोहतास) के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तथा ट्रायल कोर्ट द्वारा शुरू की गई क्रिमिनल मिस. केस की पूरी फाइल व आदेश की कॉपियां मांगी गई हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने इस अपील (क्रिमिनल अपील संख्या 1385/2025) और इससे जुड़ी अन्य अपीलों को 25 नवंबर, 2026 को शीर्ष 5 मामलों में रखकर अंतिम सुनवाई करने का आदेश दिया है.
ये भी पढ़ें
नीट ओएमआर शीट विवाद: पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, हेरफेर के आरोप वाली सभी याचिकाएं खारिज
कोरोना से अगर मौत हुई है तो 4 लाख मुआवजा देना होगा, बिहार सरकार को हाईकोर्ट का सख्त निर्देश
पार्कों की बदहाली पर पटना हाई कोर्ट सख्त, पटना नगर निगम अफसर को लगाई फटकार
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
जस्टिस शील नागू ने पंजाब मुख्यमंत्री कार्यालय भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया, केस नई पीठ को सौंपा जाएगा

सुप्रीम कोर्ट ने जंतर‑मंत्र प्रदर्शनकारियों को राहत, FIR रद्द करने की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर फ्री हैंड की याचिका खारिज, छात्र-युवाओं के भविष्य को महत्व दिया

सचिन पायलट ने CEC और पंजाब की व्यवस्था पर तीखा बयान दिया

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई की आज़ादी नहीं दी, छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता दी

सचिन पायलट ने CEC पर विरोध प्रदर्शन और पंजाब की व्यवस्था को लेकर तीखा प्रहार

पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश ने SC के SIR फैसले को निरस्त करने का आग्रह किया

आगरा में 17‑साल पुरानी बिजली चोरी केस में शीतगृह और निदेशक संजय शर्मा के खिलाफ संपत्ति जब्ती का आदेश
ताज़ा ख़बरें
- विधायी परामर्श में कमी और लोकतंत्र का न्यायालयीकरण: भारत का केस स्टडी
- पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश गोपाल गौड़ा ने SIR फैसले को अवैध, असंवैधानिक और अ‑लोकतांत्रिक कहा, इसे पुनः विचार करने की मांग
- कर्नाटक उच्च न्यायालय ने पिनरायी विजयन और परिवार पर CMRL‑Exalogic मामले में FIR पंजीकृत करने का निर्देश दिया
- पूर्व SC जज ने ECI के SIR फैसले को धोखाधड़ी कहा, सुप्रीम कोर्ट को पुनः विचार करना चाहिए
- पूर्व जज का आव्हान: सुप्रीम कोर्ट के एसआईआर फैसले को असंवैधानिक घोषित कर पुनः विचार की मांग
- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को कानूनी दायरे में कड़ी कार्रवाई का निर्देश
- सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस, ECI के SIR रिवीजन पर मतदाता हटाने के विवाद की जांच
- सुप्रीम कोर्ट 16 अक्टूबर को करेगा बंगाल SIR मामलों की सुनवाई, 1.70 लाख अपीलों पर फैसला निकट

