पूर्व जज का आव्हान: सुप्रीम कोर्ट के एसआईआर फैसले को असंवैधानिक घोषित कर पुनः विचार की मांग
रिटायर्ड जस्टिस वी. गोपाल गौड़ा ने कहा कि मई 2026 का सुप्रीम कोर्ट फैसला, जिसमें चुनाव आयोग के एसआईआर को वैध माना गया था, को तथ्य‑भ्रंश के कारण वापस लेना चाहिए और सभी रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए। उन्होंने सीईसी ज्ञानेश कुमार को लोकतंत्र की हत्या करने वाला आरोप लगाया और बताया कि 1951‑2004 में कुल आठ बार राष्ट्रीय स्तर पर एसआईआर कराए गए थे, जबकि वर्तमान प्रक्रिया 2025 से जारी है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
एसआईआर पर फैसला वापस ले सुप्रीम कोर्ट-पूर्व जज
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस वी गोपाल गौड़ा का कहना है कि सर्वोच्च अदालत ने मई, 2026 में चुनाव आयोग के एसआईआर कराने के फैसले को सही ठहराया था, उसे निश्चित रूप से वापस लिया जाए। उनकी दलील है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इस वजह से आया, क्योंकि चुनाव आयोग ने कोर्ट के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया।' एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला असंवैधानिक'
लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के मुताबिक रिटायर्ड जस्टिस गौड़ा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट को स्वत: संज्ञान लेकर फैसले को वापस लेना चाहिए और चुनाव आयोग से सारे रिकॉर्ड मंगवा कर देखना चाहिए कि क्या इसे बहुमत से मंजूरी दी गई या सर्वसम्मति का रास्ता चुना गया। इससे पहले बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में गुरुवार को सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित सीजेपी के विरोध प्रदर्शन में तो सुप्रीम कोर्ट फैसले को सीधा असंवैधानिक तक बता डाला।'सीईसी ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र की हत्या कर रहे'
विपक्ष की तरह जस्टिस गौड़ा ने भी अपने दावों के लिए इंडियन एक्सप्रेस की उन खबरों का हवाला दिया, जिसके आधार पर इंडिया ब्लॉक कई दिनों से सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में यहां-वहां विरोध-प्रदर्शन कर रहा है। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर 'फर्जीवाड़ा' किया है।जस्टिस उज्ज्वल भुइयां का बचाव किया
पूर्व जज ने सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज जस्टिस उज्ज्वल भुइंया की चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर के माध्यम से वोटरों के नाम काटने की हालिया आलोचना का भी बचाव किया है। जबकि,भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई ने जस्टिस भुइयां के रवैये पर सवाल उठाया है, क्योंकि मामला अभी सर्वोच्च अदालत में लंबित है।पूर्व सीजेआई बीआर गवई को दे दी चुनौती
- हैरानी की बात है कि उन्होंने जस्टिस भुइयां पर सवाल उठाने के पूर्व सीजेआई के अधिकार को ही चुनौती दे दी। उन्होंने तर्क दिया कि जब पूर्व-सीजेआई गवई बॉम्बे हाई कोर्ट में जज थे, जब उन्होंने जज लोया केस पर टिप्पणी की थी, जबकि मामला सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन था।
- उन्होंने जस्टिस गवई पर निशाना साधते हुए पूछा कि उन्होंने इस बारे में कुछ भी क्यों नहीं कहा कि चुनाव आयोग के अहम फैसले कथित रूप से बिना दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के लिए गए थे।
एसआईआर का इतिहास और संवैधानिक स्थिति
- तथ्य यह है कि 1951 से लेकर 2004 तक चुनाव आयोग के द्वारा देश में कुल 8 बार एसआईआर करवाए गए।
- अभी जो देशव्यापी एसआईआर चल रहा है, उसकी शुरुआत 2025 में बिहार से विधानसभा चुनावों के पहले शुरू की गई थी।
- इससे पिछला देशव्यापी एसआईआर 2002 से 2004 के बीच कराया गया था।
- जस्टिस गौड़ा ने सुप्रीम कोर्ट के जिस फैसले को असंवैधानिक बताया है, उसपर 27 मई, 2026 को देश की सर्वोच्च अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
- सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने संविधान के आर्टिकल 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और 1960 के नियमों के तहत एसआईआर की प्रक्रिया के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला दिया और इसे पूरी तरह से वैधानिक बताया है।
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