सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को कानूनी दायरे में कड़ी कार्रवाई का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को सार्वजनिक स्थानों में महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न को रोकने हेतु सख्त कार्रवाई करने की हिदायत दी, पर यह कार्य कानून के भीतर और जवाबदेही के साथ होना चाहिए। कोर्ट ने ‘शिष्टाचार स्क्वाड’ की गतिविधियों का ऑडिट, बीट पेट्रोलिंग बढ़ाने और प्रकाश व सीसीटीवी जैसी सुरक्षा सुविधाओं को सुधारने का निर्देश भी दिया।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को सख्त हिदायत देते हुए कहा है कि वे अपराधियों पर सख्ती करें, लेकिन ये सब काम कानून के दायरे में रहकर होना चाहिए।
अमित आनंद चौधरी, नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ की घटनाओं को रोकने के लिए बदमाशों के मन में डर पैदा किया जाए। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि पुलिस की कार्रवाई कानून के दायरे में और उचित होनी चाहिए। इस चरण पर हम इस बात पर जोर देना भी जरूरी समझते हैं कि 'प्रिवेंटिव पुलिसिंग' (अपराध रोकने के लिए पुलिस की कार्रवाई) को पुलिस की शक्तियों के मनमाने, जरूरत से ज्यादा या असंतुलित इस्तेमाल का बहाना नहीं बनाया जा सकता।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने दिल्ली पुलिस और प्रशासन को राजधानी को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने के लिए कई आदेश देते हुए कहा कि जहां कानून के तहत दखल देना जरूरी हो, वहां पुलिस को सख्ती से काम करना चाहिए, लेकिन ऐसा दखल कानूनी दायरे, जरूरत के हिसाब से कार्रवाई और जवाबदेही की सीमाओं के भीतर ही होना चाहिए।
जवाबदेही बहुत जरूरी
NCT में महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न की हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए बेंच ने आगे कहा कि असरदार पुलिसिंग और गवर्नेंस के लिए जवाबदेही बहुत जरूरी है। साथ ही, असरदार तरीके से कानून लागू करके सिस्टम में नागरिकों का भरोसा जीतना भी जरूरी है, खासकर तब जब सिस्टम के सामने चुनौतियां हों, जैसा कि हाल की घटनाओं में देखा गया है।
सुरक्षा मिलनी चाहिए
जो सिस्टम नागरिकों में भरोसा जगाना चाहता है, उसमें नागरिकों को न सिर्फ अपराध से, बल्कि राज्य की शक्ति के गैर-कानूनी या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल से भी सुरक्षा मिलनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट
रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखें
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली पुलिस ने पिछले साल 'शिष्टाचार स्क्वाड' (anti-harassment squads) बनाने के बावजूद शहर में ऐसी घटनाएं हो रही हैं। इसलिए, बेंच ने इन स्क्वाड के कामकाज का ऑडिट करने और पिछले तीन महीनों में उनके द्वारा किए गए कामों की जानकारी मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को निर्देश देते हैं कि वे पिछले तीन महीनों में सौंपी गई साप्ताहिक रिपोर्ट की कॉपी और उन रिपोर्ट के आधार पर उठाए गए कदमों का विश्लेषण करने वाली एक समेकित रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखें।
'शिष्टाचार स्क्वाड' है या नहीं
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि रिपोर्ट इस तरह तैयार की जानी चाहिए कि यह कोर्ट न सिर्फ यह पता लगा सके कि 'शिष्टाचार स्क्वाड' प्रशासनिक तौर पर मौजूद हैं या नहीं, बल्कि यह भी जान सके कि वे किस हद तक काम कर रहे हैं, किन इलाकों में उन्होंने असल में अभियान चलाए हैं, ऐसे अभियानों की बारंबारता और समय क्या रहा है, किस तरह की कार्रवाई की गई है और उस पर आगे क्या कदम उठाए गए हैं।
कमियों को दूर करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खराब या अपर्याप्त स्ट्रीटलाइट, काम न करने वाला CCTV कैमरा, बिना निगरानी वाला अंधेरा इलाका या जनता की अनसुनी शिकायतें असामाजिक तत्वों और बुरी सोच वाले लोगों के लिए सुरक्षित जगह बन सकती हैं, जिनका शिकार कोई भी अनजान नागरिक बन सकता है; इसलिए कोर्ट ने इन कमियों को दूर करने का निर्देश दिया। इसमें कहा गया है कि तुरंत प्रभाव से बीट पेट्रोलिंग बढ़ाई जानी चाहिए और साथ ही, सरकारी बसों, कैब, टैक्सी आदि जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाहनों और ओला, उबर, रैपिडो जैसी ऐप-बेस्ड सर्विस से जुड़े वाहनों के ड्राइवरों और सहायकों की सख़्ती से जांच होनी चाहिए।
लेखक के बारे मेंअक्षय श्रीवास्तवअक्षय श्रीवास्तव, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। मार्च 2025 में उन्होंने टाइम्स समूह का डिजिटल विंग नवभारत टाइम्स (NBT Digital) ज्वाइन किया। यहां अक्षय न्यूज टीम का हिस्सा हैं और राष्ट्रीय खबरों के साथ-साथ दिल्ली और अपराध से जुड़े समाचारों का संपादन और क्यूरेशन करते हैं। समय-समय पर वह फील्ड रिपोर्टिंग में भी उतरते हैं। अक्षय ग्राउंड पर जाकर खबरों के पीछे छिपी कहानी को निकालने में रुचि रखते हैं। अपने 13 साल के पत्रकारिता के अनुभव में अक्षय ने रिपोर्टिंग के साथ-साथ डेस्क पर भी कई जिम्मेदारियां संभाली हैं। अक्षय ने साल 2019 और 2024 की राजनीति के निर्णायक लोकसभा चुनाव भी कवर किए हैं।
करियर के दौरान अक्षय ने प्रिंट मीडिया में एक लंबी पारी खत्म कर साल 2018 में डिजिटल मीडिया में कदम रखा। यहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता का शुरुआती काम सीखा। इसके बाद वह दैनिक भास्कर के डिजिटल सेक्शन में काम करने लगे। यहां उन्होंने जीके सेक्शन की जिम्मेदारी संभाली। आज तक में कार्य के दौरान अक्षय ने कनमैलियों पर एक एक्सक्लूसिव स्टोरी की, जो चर्चा का विषय रही। नवभारत टाइम्स में वह कफ सिरप पीकर अपने बच्चे गंवाने वाले परिवारों तक पहुंचे और उनका दर्द जाना।
पत्रकारिता का अनुभव
अक्षय का पत्रकारिता करियर हिंदी अखबार दैनिक नव भारत भोपाल के साथ साल 2013 में बतौर ट्रेनी शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश से प्रकाशित राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर में 2014 से 2016 तक उप-संपादक के रूप में कार्य किया। 2016 से 2018 तक अक्षय ने दैनिक हरिभूमि समाचार पत्र में बतौर उप-संपादक काम किया। साल 2018 में दैनिक भास्कर के साथ उन्होंने डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद जनवरी 2022 में AajTak डिजिटल के साथ जुड़े और मार्च 2015 तक होम पेज पर अपनी सेवाएं दीं।
अक्षय ने एशिया के पहले पत्रकारिता विश्वविद्यालय माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से बीएससी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) और एमएससी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) की पढ़ाई की है। विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान वह कई प्रतियोगताओं में भाग लेकर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुके हैं।... और पढ़ें
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