सुप्रीम कोर्ट जज ने राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पर गंभीर आरोप, CJI ने प्रक्रिया पर बल दिया
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के विरुद्ध कुप्रशासन, भाई‑भतीजावाद और पक्षपात जैसे आरोपों से भरे तीन पत्र CJI जस्टिस सूर्यकांत को लिखे। CJI ने कहा कि इन शिकायतों का निपटारा स्थापित ‘इन‑हाउस प्रोसीजर’ के तहत किया जाएगा, जिसमें आरोपित न्यायाधीश को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा, और सार्वजनिक रूप से फैसला नहीं किया जा सकता।

सौजन्य से:- Livemint
Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड27 Aug 2026, 12:41 PM IST
नई दिल्ली: भारतीय न्याय व्यवस्था में एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के क्रियाकलापों पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए देश के प्रधान न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत को चिट्ठी लिखी।
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने सीजेआई को चिट्ठी लिखकर राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिश संजीव प्रकाश शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस संबंध में जस्टिस मेहता की तीन चिट्ठियों के जवाब में सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि तय नियमों के अधीन कदम उठाए जाएंगे।
सीजेआई ने कहा कि जस्टिस शर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता के आरोपों पर सार्वजनिक रूप से फैसला नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित न्यायाधीश को 'अपना पक्ष रखने का उचित अवसर' दिया जाना चाहिए।
जस्टिस मेहता ने सीजेआई को लिखे अपने तीन पत्रों में राजस्थान उच्च न्यायालय में राज्य के बाहर से किसी स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करने का आग्रह किया है। न्यायमूर्ति मेहता ने 2 अगस्त, 10 अगस्त और 17 अगस्त को लिखे अपने तीन पत्रों में राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पर 'कुप्रशासन', 'कदाचार', 'भाई-भतीजावाद' और 'पक्षपात' के आरोप लगाए हैं।
सीजेआई सूर्यकांत ने इन पत्रों पर कड़ी प्रतिक्रिया में कहा कि जस्टिस मेहता की चिंताओं का पहले ही संज्ञान ले लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा, 'किसी मौजूदा न्यायाधीश के खिलाफ आरोपों से केवल स्थापित संस्थागत तंत्र के माध्यम से ही निपटा जाना चाहिए।' ध्यान रहे कि वर्ष 1999 में सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ आने वाली शिकायतों से निपटने के लिए एक 'इन-हाउस प्रोसीजर' की व्यवस्था बनाई थी। इसके तहत यदि किसी न्यायाधीश या मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ आरोप लगते हैं, तो सीजेआई एक जांच समिति गठित करते हैं।
आरोपी न्यायाधीश को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाता है ताकि सार्वजनिक रूप से संस्था की साख को नुकसान पहुंचाए बिना आंतरिक रूप से निष्पक्ष जांच हो सके। वर्तमान संदर्भ में प्रधान न्यायाधीश की ओर से 'स्थापना और संस्थागत तंत्र' का हवाला देना इसी 1999 की 'इन-हाउस प्रोसीजर' और नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत से प्रेरित है, ताकि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित न्यायाधीश को सफाई देने का पूरा मौका मिले।
बुधवार देर शाम जारी एक बयान में कहा गया, 'प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि पत्रों में कही गई बातों पर सार्वजनिक रूप से फैसला नहीं किया जा सकता और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित न्यायाधीश को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए।' प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'केवल आरोप लगाए जाने को संबंधित न्यायाधीश के खिलाफ अपने आप में निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।'
उन्होंने कहा कि मामले की उचित स्तर पर जांच की जा रही है और इस प्रक्रिया में न्यायमूर्ति मेहता द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री के साथ-साथ न्यायमूर्ति शर्मा के जवाब पर भी विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पद पर न्यायमूर्ति शर्मा के बने रहने, उनके तबादले या उनसे संबंधित किसी अन्य प्रशासनिक कार्रवाई पर फैसला सक्षम संस्थागत प्राधिकारी सभी सामग्री पर उचित विचार करने के बाद करेगा।
बयान में कहा गया, 'प्रधान न्यायाधीश ने इस बात पर भी जोर दिया कि उच्चतम न्यायालय न्यायाधीशों से जुड़ी व्यक्तिगत शिकायतों का फैसला मीडिया में किए जाने वाले परस्पर विरोधी दावों के आधार पर नहीं होने दे सकता।' प्रधान न्यायाधीश ने यह भी कहा कि वह और कॉलेजियम के अन्य सदस्य शेष उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति पर पहले से काम कर रहे हैं।
Naveen Kumar Pandey
टेलीवीजन की दुनिया से अखबार का संसार और अब डिजिटल वर्ल्ड। नवीन कुमार पाण्डेय पत्रकारिता की बहुआयामी विधाओं में 17 वर्ष से अधिक का अनुभव रखते हैं। प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में द्विवर्षीय पीजी डिप्लोमा की डिग्री लेकर वर्ष 2008 से पत्रकारिता की शुरू हुई यात्रा अनवरत जारी है। करियर के एक छोर पर नोएडा तो दूसरे पर दिल्ली है जबकि बीच में पटना और रांची का पड़ाव प्राप्त हुआ है। नवीन नोएडा, पटना, रांची, फिर नोएडा के विभिन्न मीडिया संस्थानों का हिस्सा रहने के बाद मिंट हिंदी से जुड़कर दिल्ली पहुंचे हैं। पूरे पत्रकारीय जीवन में डिजिटल मीडिया का अनुभव सबसे ज्यादा रहा है। पिछला संस्थान नवभारत टाइम्स ऑनलाइन रहा जिसका एक दशक से भी ज्यादा लंबा और बहुत सुहावना साथ रहा। एनबीटी में मेन डेस्क का हिस्सा रहते हुए राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर लंबे समय तक काम किया। बीच में तीन वर्ष बिजनेस सेक्शन को लीड करने में बीते। फिर एआई का दौर आया तो इकनॉमिक टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया और नवभारत टाइम्स की ओर से 5-5 सदस्यों की टीम बनाई गई। नवीन ने एनबीटी की टीम की अगुवाई करते हुए तीन वर्षों तक न्यूज रूम में एआई की उपयोगिता पर लंबा रिसर्च किया और कई प्रॉजेक्ट्स जमीन पर उतारे। इस दौरान उन्हें संस्था से इनोवेटिव माइंड का अवॉर्ड भी हासिल हुआ। हमेशा नयेपन की खोज में जुटे रहकर नवीन अपने नाम को सार्थक करने को आज भी प्रयासरत हैं। मिंट हिंदी का संपादकीय नेतृत्व करते हुए बिजनेस के विभिन्न आयामों को छूते हुए राजनीति, कानून, कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंध, अर्थव्यवस्था समेत विभिन्न विषयों पर लेख और विचार यहां प्रकाशित करते रहेंगे।
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