जिसे कानून की रक्षा करनी थी, उसी पर नाबालिग से काम कराने का आरोप; चतरा में दारोगा दंपती निलंबित - chatra police couple suspended for child labor assault
जिसे कानून की रक्षा करनी थी, उसी पर नाबालिग से काम कराने का आरोप; चतरा में दारोगा दंपती निलंबित चतरा में नाबालिग से बाल मजदूरी और मारपीट के आरोप में महिला थाना प्रभारी फिरदौस नाज और उनके पति टीपू अंसारी को निलंबित कर दिय…

सौजन्य से:- Jagran
जिसे कानून की रक्षा करनी थी, उसी पर नाबालिग से काम कराने का आरोप; चतरा में दारोगा दंपती निलंबित
चतरा में नाबालिग से बाल मजदूरी और मारपीट के आरोप में महिला थाना प्रभारी फिरदौस नाज और उनके पति टीपू अंसारी को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई बाल कल्याण समिति की शिकायत और एसडीपीओ की जांच रिपोर्ट के आधार पर एसपी ने की है।
HighLights
- नाबालिग से बाल मजदूरी, मारपीट के आरोप में दंपति निलंबित।
- सीडब्ल्यूसी की शिकायत पर एसपी ने जांच के बाद लिया फैसला।
जागरण संवाददाता, चतरा। नाबालिग से कथित रूप से बाल मजदूरी कराने, मारपीट और प्रताड़ित करने के आरोप में चतरा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस अधीक्षक अनिमेष नैथानी ने महिला थाना प्रभारी पुलिस अवर निरीक्षक फिरदौस नाज और सदर थाना में पदस्थापित उनके पति पुलिस अवर निरीक्षक टीपू अंसारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
कार्रवाई सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सन्नी वर्धन की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। निलंबन अवधि में दोनों को पुलिस लाइन में योगदान देने का निर्देश दिया गया है। साथ ही विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। मामले की शुरुआत बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को मिली शिकायत से हुई।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सदर थाना परिसर स्थित दारोगा दंपति सरकारी आवास में नाबालिग से घरेलू काम कराया जाता था और उसके साथ मारपीट व प्रताड़ना की जाती थी। शिकायत के बाद सीडब्ल्यूसी की विशेष टीम ने कार्रवाई करते हुए सरकारी आवास से नाबालिग को रेस्क्यू किया था।
रेस्क्यू के बाद सीडब्ल्यूसी ने नाबालिग का मेडिकल परीक्षण कराया और उसे बाल संरक्षण गृह (सीसीआई) भेज दिया। समिति ने बेंच आफ मजिस्ट्रेट के समक्ष नाबालिग का बयान भी दर्ज कराया है। सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष नर्मदेश्वर सिंह के अनुसार, पूरे मामले की जानकारी जिले से लेकर राज्य स्तर के वरीय अधिकारियों को दी गई है।
सीडब्ल्यूसी की शिकायत के बाद एसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीपीओ सन्नी वर्धन को जांच का जिम्मा सौंपा था। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद दोनों पुलिस अवर निरीक्षकों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई। एसडीपीओ ने बताया कि दोनों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के लिए सीडब्ल्यूसी का पत्र प्राप्त हुआ है।
सदर थाना प्रभारी को मामला दर्ज कर विधि-सम्मत कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। इधर, नाबालिग की मां ने भी एसपी को आवेदन देकर सीडब्ल्यूसी सदस्यों पर बेटी को जबरन ले जाने का आरोप लगाया था।
सीडब्ल्यूसी ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि नाबालिग को शिकायत के आधार पर नियमानुसार रेस्क्यू किया गया। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई होगी और किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। अब प्राथमिकी, विभागीय जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं।
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