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शिवानंद तिवारी ने जमुई कांड को लेकर शराबबंदी को पुनर्विचार करने की मांग की

जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ हुए अत्याचार को लेकर शिवानंद तिवारी ने कहा कि पूरी शराबबंदी ने अपेक्षित लाभ नहीं दिया, बल्कि शराब माफिया को सशक्त किया और ग्रामीण इलाकों में अवैध नशे का चलन बढ़ा है। उन्होंने बिहार सरकार से इस नीति को वापस लेने और इस मुद्दे पर सर्वदलीय चर्चा करने का आग्रह किया।

24 सितंबर 2026 को 06:05 am बजे
शिवानंद तिवारी ने जमुई कांड को लेकर शराबबंदी को पुनर्विचार करने की मांग की

सौजन्य से:- Hindustan

जमुई कांड के बहाने शिवानंद तिवारी ने शराबबंदी पर उठाया सवाल, कानून वापस लेने की वकालत कर दी

शिवानंद तिवारी ने जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ हैवानियत का जिक्र करते हुए शराबबंदी कानून वापस लेने की सलाह बिहार सरकार को दी है।

जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ हवसी दरिंदों की करतूत पर पूरे देश में उबाल है। आरोपितों के खिलाफ जारी कार्रवाई के बीच लालू यादव और नीतीश कुमार के साथ राजनीति की लंबी पारी खेल चुके शिवानंद तिवारी ने जमुई कांड के बहाने शराबबंदी कानून पर सवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा है कि शराबबंदी का प्रयोग सफल नहीं हुआ बल्कि, नुकसान पहुंचा रहा है। ऐसे में पैर पीछे खींच लेना ही बुद्धिमानी होगी क्योंकि, पूर्ण शराबबंदी के बाद शराब माफिया इतने मजबूत हो गए हैं कि पुलिस भी उनसे डरती है और सूखे नशे का प्रचलन बढ़ रहा है

सोशल मीडिया पोस्ट में जानेमाने समाजवादी शिवानंद तिवारी नेता ने कहा है कि जमुई की घटना के अपराधी शराब के तस्कर निकले। महिलाओं की मांग पर नीतीश कुमार ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू किया। राबड़ी देवी के बाद नीतीश कुमार जब सत्ता में आए तो उन्होंने बिहार की आबकारी नीति में बड़ा बदलाव किया। उस नीति के प्रभाव को समझने के लिए आबकारी विभाग के राजस्व के आँकड़ों के आधार पर भी आकलन किया जा सकता है। शिवानंद तिवारी राबड़ी देवी के मंत्रिमंडल में आबकारी विभाग का मंत्री थे। उन्होंने कहा है कि राबड़ी सरकार के समय आबकारी विभाग से सरकार के ख़ज़ाने में 319 करोड़ प्राप्त होता था। जब नीतीश कुमार की सरकार आई तो उसने आबकारी की पुरानी नीति में बड़ा बदलाव किया, इससे बिहार में शराब से मिलने वाला राजस्व बढ़कर लगभग साढ़े तीन हजार करोड़ रुपया हो गया। यह आँकड़ा अपने आप में बताता है कि किस तरह शराब की उपलब्धता का विस्तार हुआ और शराब घर-घर तक पहुँचने लगी। यहाँ तक कि परचून की दुकानों पर भी शराब मिलने लगा।

इसका सामाजिक प्रभाव पड़ा। घरों से महिलाओं का निकलना मुश्किल होने लगा। महिलाओं की ओर से इसका विरोध हुआ। मुजफ्फरपुर में नीतीश कुमार की सभा में महिलाओं ने विरोध किया। विरोध करते हुए यह सवाल भी उठाया कि जब शराब की वजह से परिवारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है। महिलाओं का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। नीतीश कुमार ने जवाब में कहा कि ये जो लड़कियों को साइकिल दी जा रही है, पोशाक दिया जा रहा है इसका पैसा कहाँ से आएगा ?

शिवानंद तिवारी आगे लिखते हैं कि नीतीश कुमार ने महसूस किया कि महिलाएं उनके खिलाफ होती जा रही हैं। चुनाव में इसका नुक़सान होगा। इसलिए उन्होंने बग़ैर सोचे विचारे देशी शराब की बिक्री पर प्रतिबंध की घोषणा कर दी। सुशील मोदी ने व्यंग्य किया कि केवल देसी शराब पर ही रोक क्यों, अंग्रेजी शराब पर क्यों नहीं? इसके बाद नीतीश जी का दूसरा आदेश निकला और बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू हो गई। नीतीश जी के इस आदेश से एक शून्य बन गया जिसको भरने के लिए शराब माफिया मैदान में आ गए। आज ये इतने ताकतवर हो गए हैं कि पुलिस भी इनसे डरती है। ग्रामीण इलाक़े में सूखे नशे का प्रचलन बढ़ गया है जिससे लड़के बरबाद हो रहे हैं।

शिवानंद तिवारी ने बिहार सरकार से अनुरोध है कि वह सर्वदलीय बैठक बुलाए और इस मसले पर आम राय बनाने की कोशिश करे। नीतीश कुमार ने शराबबंदी का प्रयोग किया लेकिन वह प्रयोग सफल नहीं हुआ, बल्कि उससे नुक़सान हो रहा है। कोई भी सरकार या व्यक्ति भले के लिए कोई प्रयोग करता है ,अगर सफल नहीं होता है तो पैर पीछे खींच लेना ही बुद्धिमानी है।

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