CAA-NRC विवाद: रामपुर हिंसा के आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत, जानें क्या है पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने सीएए-एनआरसी बवाल के आरोपियों को लोक संपत्ति नुकसान का जुर्माना जमा करने का मौका दिया है। रामपुर में 21-23 अगस्त को विशेष लोक अदालत में उन्हें ₹5,687 जुर्माना देकर मुकदमे खत्म करने का अवसर मिलेगा।

सौजन्य से:- Jagran
CAA-NRC बवाल: रामपुर हिंसा के आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट का मौका, ₹5,687 जुर्माना देकर खत्म होंगे मुकदमे
सुप्रीम कोर्ट ने सीएए-एनआरसी बवाल के आरोपियों को लोक संपत्ति नुकसान का जुर्माना जमा करने का मौका दिया है। रामपुर में 21-23 अगस्त को विशेष लोक अदालत मे ...और पढ़ें
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- सुप्रीम कोर्ट में 21, 22 और 23 अगस्त को लगेगी विशेष लोक अदालत, मुकदमों का होगा निस्तारण
जागरण संवाददाता, रामपुर। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में बवाल के मुकदमों में आरोपितों को सुप्रीम कोर्ट ने एक मौका दिया है। सात साल पहले हुए इस बवाल में लोक संपत्ति को हुए नुकसान का हर्जाना आरोपितों से वसूला जाना है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट विशेष लोक अदालत में पैसा जमा कर मुकदमे का निस्तारण करना चाहता है।
आरोपितों को भेज रहे नोटिस
इसके लिए जिला प्रशासन को आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पुलिस आरोपितों को नोटिस भेज रही है। अपर पुलिस अधीक्षक अनुराग सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में 21, 22 और 23 अगस्त को विशेष लोक अदालत (समाधान समारोह) का आयोजन किया जा रहा है। वहां आपसी सहमति से वादों का निस्तारण होगा।
वसूली वादों को भी किया शामिल
इसमें एनआरसी बवाल से संबंधित वसूली वादों को भी शामिल किया जा रहा है। इसी संबंध में यहां बवाल के 16 आरोपितों की जानकारी दी गई है। इन्हें नोटिस भेजकर बुलाया जा रहा है। इन्हें मध्यस्थता केंद्र में बुलाकर अपने वसूली वाद का निस्तारण विशेष लोक अदालत में कराने के लिए कहा जाएगा।
भीड़ ने किया था हिंसक प्रदर्शन
रामपुर शहर में 21 दिसंबर 2019 को बवाल हुआ हुआ था। सीएए और एनआरसी के विरोध में शाहबाद गेट पर जलसे का आयोजन किया गया था। इसके लिए भीड़ सड़कों पर आ गई थी। भीड़ ने कई जगह हिंसक प्रदर्शन किया था। हाथीखाना चौराहे पर पुलिस से मारपीट और पथराव किया था। छह बाइकें और पुलिस की एक जीप भी फूंक दी थी।
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एक युवक की हुई थी मौत
इस दौरान गोली चलने से एक युवक की मौत हो गई थी। पुलिस पर भीड़ ने पेट्रोल बम तक फेंके थे। पुलिस ने इस मामले में गंज और शहर कोतवाली में हजारों लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए थे। मुकदमे बलवा, जानलेवा हमला, लूट, हत्या, मारपीट, लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, सात क्रिमिनल ला अमेंडमेंट एक्ट आदि धाराओं में दर्ज किए गए थे।
पुलिस ने की थी गिरफ्तारियां
पथराव करते हुए भीड़ के फोटो के जरिए पुलिस ने आरोपितों की पहचान कर गिरफ्तारियां की थीं। हमलावरों की पहचान होने के बाद इनसे सरकारी संपत्ति की वसूली के आदेश हुए थे। चूंकि हिंसा की घटनाएं अन्य जिलों में भी हुई थीं, जिसके लिए प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से वसूली के लिए उत्तर प्रदेश लोक तथा निजी संपत्ति क्षति वसूली दावा अधिकरण का गठन किया गया था।
195 लोगों को मना था दोषी
पश्चिमी क्षेत्र के जिलों के लिए यह अभिकरण मेरठ में बनाया गया। उत्तर प्रदेश लोक और निजी संपत्ति क्षति वसूली दावा न्यायाधिकरण मेरठ ने रामपुर के 195 लोगों को दोषी मानते हुए इनसे 11,08,901 रुपये वसूली का आदेश दिया था। इस तरह प्रत्येक दोषी को 5,687 रुपये बतौर अर्थदंड जमा करने हैं।
आदेश को दी थी चुनौती
हालांकि इस आदेश के खिलाफ आरोपितों ने हाई कोर्ट में अपील की थी। हाई कोर्ट ने आरोपितों को 50 फीसद धनराशि चार सप्ताह के अंदर जमा करने और बाकी धनराशि जमा करने या न करने का निर्णय मुकदमे के फैसले के आधार पर किए जाने के आदेश दिए थे। हाई कोर्ट के आदेश को आरोपितों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने तब चार सप्ताह के लिए वसूली पर रोक लगा दी थी। वहीं आरोपितों के अधिवक्ता सैयद आमिर मियां ने बताया कि बवाल के मुकदमे स्थानीय अदालत में विचाराधीन है। यदि सुप्रीम कोर्ट की विशेष लोक अदालत में पैसा जमा करते हैं तो आरोपितों को यहां चल रहे मुकदमे पर असर पड़ेगा।
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