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एक ही गर्भ में जन्मे जुड़वा, पर माता-पिता अलग: ऑस्ट्रेलिया में कानूनी उलझन

ऑस्ट्रेलिया में एक महिला ने एक साथ जुड़वा बच्चों को जन्म दिया, लेकिन डीएनए परीक्षण से पता चला कि एक बच्चा उसके और उसके पति का प्राकृतिक गर्भधारण का फल है जबकि दूसरा सरोगेसी से आया भ्रूण है। दोनों के अलग-अलग जैविक माता-पिता के बावजूद, परिवारों ने सहमति से पालन‑पोषण तय किया, पर क्वींसलैंड चिल्ड्रंस कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या उन्हें ‘जुड़वां भाई‑बहन’ माना जाए। अंततः न्यायाधीश ने निर्णय दिया कि कानून के दृष्टिकोण से ये बच्चे जन्म से भाई‑बहन नहीं हैं।

30 अगस्त 2026 को 07:32 pm बजे
एक ही गर्भ में जन्मे जुड़वा, पर माता-पिता अलग: ऑस्ट्रेलिया में कानूनी उलझन

सौजन्य से:- Jagran

एक ही कोख से जन्मे जुड़वा बच्चे, लेकिन दोनों के माता-पिता अलग-अलग; कानूनी पेच के बीच अदालत भी हैरान

ऑस्ट्रेलिया में एक महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया, लेकिन डीएनए टेस्ट में खुलासा हुआ कि वे जैविक रूप से भाई-बहन नहीं हैं।

HighLights

- ऑस्ट्रेलिया में महिला ने जुड़वा बच्चों को दिया जन्म।

- डीएनए टेस्ट में बच्चे निकले अलग-अलग माता-पिता के।

- सरोगेसी और प्राकृतिक गर्भधारण का दुर्लभ संयोग।

डिजिटल डेस्क, कैनबरा। मेडिकल साइंस की दुनिया में एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने सबको असमंजस में डाल दिया है। घटना ऑस्ट्रेलिया की है। यहां एक महिला ने एक साथ जुड़वा बच्चो को जन्म दिया, एक लड़का और एक लड़की।

अब आप सोच रहे होंगे कि जुड़वा बच्चों का जन्म हैरान करने वाली बात कैसे हो सकती है? ठहरिए... आपको बता दें कि हैरान करने वाली बात यह नहीं कि महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया, हैरान करने वाली बात यह है कि जब इन दोनों बच्चों का डीएनए टेस्ट कराया गया, तो पता चला कि वे दोनों बच्चे आपस में बायलॉजिकल रूप से भाई-बहन नहीं हैं।

इस घटना के सामने आने के बाद से लोग इसे कोई आम घटना के तौर पर नहीं, बल्कि यह अपने आप में एक दुर्लभ मेडिकल मिरेकल के रूप में देख रहे हैं।

पहले समझिए क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 27 साल की यह महिला पहले से ही पांच बच्चों की मां है। वह एक परोपकारी सरोगेसी व्यवस्था के तहत एक दूसरे दंपत्ति के भ्रूण को अपने गर्भ में धारण करने के लिए फर्टिलिटी ट्रीटमेंट ले रही थी।

इसी इलाज के दौरान एक दुर्लभ घटना घटी, जब उस महिला ने अनजाने में अपने पति के साथ नेचुरली रूप से भी गर्भधारण कर लिया। इसके बाद जब महिला के अल्ट्रासाउंड स्कैन हुए, तो पता चला कि उसके गर्भ में दो बच्चे पल रहे हैं।

डीएनए टेस्ट में हुआ बड़ा खुलासा

इसके बाद बच्चों के जन्म के बाद जब उनका डीएनए टेस्ट कराया गया, तो जो रिपोर्ट सामने आई उसने डॉक्टरों और माता-पिता दोनों को हैरान कर दिया। डीएनए टेस्ट से पता चला कि जुड़वा बच्चों में लड़का बायलॉजिकल रूप से उस महिला और उसके पति का ही बच्चा था, जो प्राकृतिक रूप से गर्भ धारण करने से हुआ था।

वहीं, दूसरी तरफ पैदा हुई बच्ची आनुवंशिक रूप से उस दंपत्ति की थी, जिनका भ्रूण सरोगेसी के लिए उस महिला के गर्भ में डाला गया था। यानी एक ही कोख से एक ही समय पर जन्मे दोनों बच्चे अलग-अलग माता-पिता की संतान थे।

कानून का पेंच और अदालत का फैसला

गौरतलब है कि बच्चे के जन्म के बाद दोनों परिवारों ने आपसी सहमति से अपने-अपने जैविक बच्चों को अलग-अलग पालने का फैसला किया और वे इसके लिए सहमत भी थे। लेकिन यह अजीबोगरीब मामला ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड चिल्ड्रंस कोर्ट तक पहुंच गया।

वहां की सरोगेसी कानूनों के अनुसार, जुड़वां या एक साथ जन्मे बच्चों को एक-दूसरे से अलग करने पर प्रतिबंध है। कोर्ट के सामने यह कानूनी पेचीदगी आ गई कि क्या इन दोनों बच्चों को 'जुड़वां भाई-बहन' माना जाए। हालांकि, न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता को समझते हुए यह फैसला सुनाया कि कानून की नजर में ये दोनों बच्चे 'जन्म से भाई-बहन' नहीं हैं।

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