आवारा कुत्तों के खतरे को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सरकार को आगाह किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने आवारा कुत्तों से संबंधित मामलों में सरकार को Animal Birth Control पर तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया। कोर्ट के अनुसार, केवल कुत्तों को पकड़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रजनन नियंत्रण ही समस्या का मूल समाधान हो सकता है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
दरअसल, सड़क पर आवारा कुत्तों की मौजूदगी को लेकर महाराष्ट्र में लंबे समय से सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच बहस चल रही है। इसी पृष्ठभूमि में बॉम्बे हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि केवल कुत्तों को पकड़ना या मौजूदा संख्या को संभालना पर्याप्त नहीं है। अदालत के मुताबिक, अगर प्रजनन के जरिए आबादी की बढ़ोतरी पर प्रभावी नियंत्रण हो जाए तो रेबीज, डॉग-बाइट और फीडिंग जैसे जुड़े हुए विवादों से निपटना प्रशासन के लिए आसान हो सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश और बॉम्बे हाई कोर्ट का एक्शन
- सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों में यह साफ किया है कि सार्वजनिक सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 2026 के फैसले में अदालत ने Article 21 के तहत नागरिकों के जीवन, शारीरिक सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों तक सुरक्षित पहुंच को महत्वपूर्ण संवैधानिक हित माना। साथ ही, पशु कल्याण और लागू वैधानिक नियमों को भी ध्यान में रखने की आवश्यकता बताई।
- 14 अगस्त की सुनवाई में बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से Animal Birth Control (A.B.C.) को आक्रामकता से लागू करने पर जोर दिया। अदालत की सोच यह रही कि स्ट्रे डॉग्स की संख्या लगातार बढ़ती रहेगी तो उनसे जुड़े दूसरे प्रशासनिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे भी बने रहेंगे। इसलिए नसबंदी के माध्यम से आबादी की वृद्धि रोकना समस्या के मूल कारण पर कार्रवाई करने जैसा है।
- सरकार का A.B.C. प्रोग्राम महज नसबंदी तक सीमित नहीं है। नियमों में कुत्ते का काटना और रेबीज़से जुड़े मामलों के लिए अलग प्रक्रिया है। इसके Rule 11 में नसबंदी और टीकाकरण की व्यवस्था है, जबकि Rule 16 कुत्ते के काटना और रेबीज़ वाले कुत्ते से संबंधित शिकायतों और कार्रवाई का ढांचा देता है।
अदालत ने वयस्क कुत्तों की नसबंदी को क्यों माना अहम?
याचिका की सुनवाई में हाईकोर्ट ने वयस्क कुत्तों की नसबंदी पर विशेष जोर दिया, क्योंकि अदालत यह मानती है कि यही एक व्यवस्था है जिससे आवारा कुत्तों के प्रजनन पर लगाम लगा कर आगे उनकी संख्या वृद्धि को रोका जा सकता है। अदालत ने संकेत दिया कि आबादी की वृद्धि रुकने के बाद प्रशासन बचे हुए कुत्तों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकता है।कांवड़ यात्रा पथ की चिकन-मटन दुकानें खोलो, योगी सरकार के बंद करने के नोटिस के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका, फिर क्या हुआ जानिए
Animal Birth Control Rules, 2023 में क्या कानूनी व्यवस्था है?
Animal Birth Control Rules, 2023 को केंद्र सरकार ने 10 मार्च 2023 को Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 के तहत अधिसूचित किया था। इसके नियमों के तहत स्थानीय निकायों, नगरपालिकाओं, नगर निगमों और संबंधित स्थानीय संस्थाओं की भूमिका आवारा कुत्तों के A.B.C. कार्यक्रम में महत्वपूर्ण है। इसके Rule 11 में कुत्तों को पकड़ने, नसबंदी, इम्यूनाइजेशन और रिलीज से संबंधित प्रक्रिया दी गई है। सामान्य व्यवस्था के तहत नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्ते को उसी स्थान या इलाके में वापस छोड़ने का प्रावधान है, जहां से उसे पकड़ा गया था।Gen Z के बाद Gen Alfa की चिंता, 13 साल तक के बच्चों के सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध, दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका
आवारा कुत्तों को खिलाने का कानून क्या कहता है?
- A.B.C. 2023 का Rule 20 सामुदायिक पशुओं की फीडिंग व्यवस्था से संबंधित है। इसके तहत रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) या स्थानीय निकाय के प्रतिनिधि को फीडिंग की व्यवस्था में भूमिका निभानी होती है।
- नियमों में फीडिंग स्थान विशेष और फीडिंग समय निर्धारित करने की व्यवस्था है। स्थान बच्चों के खेलने के क्षेत्रों, प्रवेश-निकास, सीढ़ियों और ऐसी जगहों से दूर होना चाहिए जहां बच्चे या वरिष्ठ नागरिक अधिक आते-जाते हों।
- इसका अर्थ यह है कि कानून फीडिंग को पूरी तरह अनियंत्रित गतिविधि के रूप में नहीं देखता; बल्कि फीडिंग को व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से करने का नियामक तंत्र उपलब्ध कराता है। विवाद की स्थिति में Rule 20 के तहत Animal Welfare Committee की व्यवस्था भी है।
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