होमकानूनवकीलों की हड़ताल पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, बार के पदाधिकारियों समेत तीन अधिवक्ताओं को नोटिस - allahabad high court lucknow bench strict on lawyers strike issues notices to three advocates including bar officebearers
कानून

वकीलों की हड़ताल पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, बार के पदाधिकारियों समेत तीन अधिवक्ताओं को नोटिस - allahabad high court lucknow bench strict on lawyers strike issues notices to three advocates including bar officebearers

वकीलों की हड़ताल पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, बार के पदाधिकारियों समेत तीन अधिवक्ताओं को नोटिस Allahabad High Court Lucknow Bench: पुलिस प्रशासन और नगर निगम की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का अधिवक्ताओं ने विरोध किया…

Jagran के अनुसार8 जून 2026 को 06:17 pm बजे
वकीलों की हड़ताल पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, बार के पदाधिकारियों समेत तीन अधिवक्ताओं को नोटिस - allahabad high court lucknow bench strict on lawyers strike issues notices to three advocates including bar officebearers

सौजन्य से:- Jagran

वकीलों की हड़ताल पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, बार के पदाधिकारियों समेत तीन अधिवक्ताओं को नोटिस

Allahabad High Court Lucknow Bench: पुलिस प्रशासन और नगर निगम की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का अधिवक्ताओं ने विरोध किया था । ...और पढ़ें

HighLights

न्यायिक कार्य के बहिष्कार और वकीलों की हड़ताल को लेकर रुख कड़ा

आपराधिक अवमानना की कार्यवाही और शिकायत करने की धमकी

सेंट्रल बार एसोसिएशन व लखनऊ बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों पर लगाना होगा अंकुश

विधि संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अक्सर ही न्यायिक कार्य के बहिष्कार और वकीलों की हड़ताल को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सेंट्रल बार एसोसिएशन व लखनऊ बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों समेत तीन अधिवक्ताओं को नोटिस जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगाी।

न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की अवकाशकालीन पीठ ने कोर्ट ने पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए। न्यायिक कार्य के बहिष्कार और वकीलों की हड़ताल पर कोर्ट ने कहा कि उनके आचरण की शिकायत बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को क्यों न भेजी जाए।

न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की अवकाशकालीन पीठ ने यह आदेश अनुराधा सिंह व अन्य की ओर से दाखिल एक केस की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया है। दरअसल इस केस की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पूर्व में कैसरबाग में पुराने हाई कोर्ट परिसर के आस पास से वकीलों व अन्य के अतिक्रमण को हटाने का आदेश दिया था। पुलिस प्रशासन और नगर निगम की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का अधिवक्ताओं ने विरोध किया था और तीन दिन तक न्यायिक कार्य का बहिष्कार भी किया था। इस पर कोर्ट बहुत नाराज हुई थी और जिला जज से रिपोर्ट मांगी थी।

कोर्ट ने सोमवार को पारित आदेश में कहा कि 18 मई से 26 मई 2026 तक दोनों बार एसोसिएशनों के आह्वान पर लखनऊ में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से विरत रहकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन किया। न्यायालय ने इसे प्रथम दृष्टया अवैध और अनुचित बताया।

खबरें और भी

कोर्ट ने कहा कि हड़ताल के कारण बड़ी संख्या में वादकारी प्रभावित हुए। दूर-दराज से आने वाले गरीब मुकदमेबाजों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और गवाहों सहित अन्य लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। आदेश में कहा गया कि किसी भी अधिवक्ता या बार एसोसिएशन को न्यायालयों के बहिष्कार अथवा हड़ताल का अधिकार नहीं है।

पीठ ने अधिवक्ता उत्तम त्रिपाठी, हिमांशु मिश्रा और बृजेश कुमार यादव को भी नोटिस जारी कर दो सप्ताह में शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि सेंट्रल बार एसोसिएशन ने दो अधिवक्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें पांच वर्ष के लिए सदस्यता से निष्कासित किया है।

सुनवाई के दौरान जिला जज लखनऊ की रिपोर्ट और वीडियो फुटेज भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई। इसमें एक अधिवक्ता के बैठक के दौरान वकीलों में प्लास्टिक की लाठियां बांटने तथा प्रशासन व पुलिस के खिलाफ उत्तेजक टिप्पणियां करने का भी उल्लेख किया गया है। कोर्ट ने इस घटना को गंभीरता से लिया। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें