गृहिणियों, शिक्षित बुजुर्गों को साइबर अपराध के मामले में मदद करने के लिए एक विशेष कोष की शुरुआत करने का आह्वान
साइबर अपराध के मामले में अब गृहिणियों, शिक्षित बुजुर्गों को भी मदद करने के लिए एक विशेष कोष की स्थापना की जाएगी। पुलिस के अनुसार, देश के बड़े शहरों में जहां बुजुर्ग लोग रहते हैं वहां उनकी मदद करने के लिए विशेष समूह बनाये जाएंगे। ये समूह साइबर अपराध के प्रति निराकरण में उनकी मदद करेंगे। गृहिणियों के लिए भी साइबर अपराध के मामले में विशेष कोष की स्थापना की जाएगी।

सौजन्य से:- Jagran
AI पर नया कानून बना सकती है सरकार, IT सचिव ने दिए नियमों में बड़े बदलाव के संकेत
भारत सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को नियंत्रित करने के लिए एक नया और समर्पित कानूनी ढांचा तैयार करने पर विचार कर रही है, जो उसके पुराने रुख में ...और पढ़ें
समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तेजी से विकसित हो रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार जल्द ही एक नया और समर्पित कानूनी ढांचा तैयार कर सकती है। यह सरकार के उस पुराने रुख में एक बड़े बदलाव का संकेत है, जिसमें अब तक इस तकनीक को नियंत्रित करने के लिए केवल मौजूदा कानूनों पर ही निर्भर रहने की बात कही जाती रही है।
गुरुवार को भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक कार्यक्रम में बोलते हुए, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने स्पष्ट किया कि सरकार का मानना है कि विशेष रूप से एआई के लिए कानून का मसौदा तैयार करने का समय अब आ गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार सही समय आने पर एआई नियमन पर विचार करेगी और ऐसा लगता है कि अब वह समय आ गया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मंत्रालय के स्तर पर सरकार जल्द ही एआई के लिए एक मसौदा नियम तैयार करने की शुरुआत कर सकती है।
पुराने दृष्टिकोण में बदलाव
सचिव की ये टिप्पणियां इस बात का सबसे स्पष्ट संकेत हैं कि केंद्र सरकार अब एआई को लेकर अपने हल्के-फुल्के दृष्टिकोण पर पुनर्विचार कर रही है। अब तक सरकार का यह रुख रहा है कि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम और मध्यवर्ती नियम जैसे मौजूदा कानून ही डीपफेक, भ्रामक जानकारी और ऑनलाइन खतरों जैसे एआई से जुड़े मुद्दों से निपटने के लिए पर्याप्त हैं।
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सरकारी अधिकारियों ने इससे पहले लगातार यह तर्क भी दिया था कि समय से पहले सख्त नियमन करने से नवाचार में बाधा आ सकती है, खासकर ऐसे समय में जब भारत इंडिया एआई मिशन के माध्यम से अपनी घरेलू तकनीकी क्षमताओं को बढ़ा रहा है।
वैश्विक स्तर पर एआई नियमन के अलग-अलग तरीके
दुनिया भर की सरकारें एआई के नियमन के लिए अलग-अलग रास्ते अपना रही हैं। यूरोपीय संघ ने एआई एक्ट लागू किया है, जो जोखिम श्रेणियों पर आधारित दुनिया का पहला और सबसे व्यापक एआई कानून है।
दूसरी ओर, ब्रिटेन ने सिद्धांतों पर आधारित एक ढांचा चुना है, जिसे मौजूदा नियामकों के माध्यम से ही लागू किया जाता है। अमेरिका की बात करें तो वह अभी भी मुख्य रूप से कार्यकारी आदेशों, एआई कंपनियों की स्वैच्छिक प्रतिबद्धताओं और अलग-अलग क्षेत्रों की निगरानी पर निर्भर है।
वहीं, चीन ने जनरेटिव एआई, रिकमेंडेशन एल्गोरिदम और डीप सिंथेसिस जैसी तकनीकों को नियंत्रित करने के लिए बेहद लक्षित नियम पेश किए हैं।
उन्नत एआई मॉडल तक पहुंच की कोशिशें
कृष्णन ने बताया कि भारत अमेरिकी सरकार और प्रमुख एआई कंपनी एंथ्रोपिक के साथ बातचीत कर रहा है। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य कंपनी के सबसे उन्नत एआई मॉडल तक भारत की पहुंच सुनिश्चित करना है।
भारत उन देशों के एक विश्वसनीय समूह में शामिल होने का प्रयास कर रहा है, जिन्हें इन बेहद उन्नत एआई प्रणालियों का उपयोग करने की विशेष अनुमति दी गई है।
यह भी पढ़ें- 'संकट के समय भारत ने सही फैसले लिए', देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी का उद्घाटन कर बोले पीएम मोदी
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