अजब-गजब: AI चैटबॉट ने इंसानी वकील को अदालत में दी मात, 8 लाख रुपये से ज्यादा का मुकदमा जीता!
अजब-गजब: AI चैटबॉट ने इंसानी वकील को अदालत में दी मात, 8 लाख रुपये से ज्यादा का मुकदमा जीता! AI Lawyer Wins Case Against Human Lawyer In Court: एआई अब अदालत में भी इंसानों को मात दे रहा है। ब्रिटेन में Garfield AI नाम के…

सौजन्य से:- Amar Ujala
अजब-गजब: AI चैटबॉट ने इंसानी वकील को अदालत में दी मात, 8 लाख रुपये से ज्यादा का मुकदमा जीता!
AI Lawyer Wins Case Against Human Lawyer In Court: एआई अब अदालत में भी इंसानों को मात दे रहा है। ब्रिटेन में Garfield AI नाम के एक लीगल चैटबॉट ने ना सिर्फ एक असली वकील को हराकर 8 लाख रुपये से ज्यादा का मुकदमा जीता, बल्कि लाखों की कानूनी फीस का काम महज 50 हजार रुपये में निपटा दिया। यह घटना कानूनी क्षेत्र में एआई की बढ़ती भूमिका को दिखाती है।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब सिर्फ अजीबोगरीब तस्वीरें बनाने या डीपफेक वीडियो तक सीमित नहीं रह गया है। एआई ने आखिरकार वो काम कर दिखाया है जिसके लिए उसे असल में बनाया गया था, इंसानों की मदद करना।
हाल ही में ब्रिटेन में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक एआई चैटबॉट ने अदालत में एक इंसानी वकील को हराकर मुकदमा जीत लिया है। आइए जानते हैं कि कैसे इस एआई ने लाखों का खर्च सिर्फ कुछ हजारों में निपटा दिया।
क्या है पूरा मामला?
ब्रिटेन में तामीरेस कमाल ताकीदिर (Tamires Camal Taquidir) नाम की एक फ्रीलांस HR ने अपनी बकाया फीस न मिलने पर एक हॉस्पिटैलिटी कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। ब्रिटेन में कोई भी कानूनी लड़ाई लड़ने का मतलब है- वकीलों की भारी-भरकम फीस और लंबा खर्चा।
लेकिन, तामीरेस ने किसी महंगे वकील के बजाय गारफील्ड एआई (Garfield AI) नाम के लीगल चैटबॉट का सहारा लिया। इस चैटबॉट ने ना सिर्फ केस के सभी कागजात तैयार किए, बल्कि अदालत में अपनी रणनीति से विपक्षी वकील को मात भी दे दी।
लाखों का काम सिर्फ 50 हजार में
इस केस में सबसे हैरान करने वाली बात वकीलों की फीस रही:
- जीत की रकम: एआई की मदद से तामीरेस ने यह केस जीत लिया और उन्हें अदालत से 7,000 पाउंड (लगभग 8.79 लाख रुपये) का मुआवजा मिला।
- एआई की फीस: जिस काम के लिए इंसानी वकील लाखों रुपये वसूलते, वो काम गारफील्ड एआई ने महज 400 पाउंड (लगभग 50 हजार रुपये) में कर दिया।
एआई ने कैसे लड़ा ये केस?
गारफील्ड एआई को पिछले साल अप्रैल में ब्रिटेन की सॉलिसिटर्स रेगुलेशन अथॉरिटी (SRA) से मंजूरी मिल गई थी। इस केस में एआई ने ये शानदार काम किए:
- डॉक्यूमेंटेशन: ट्रायल से पहले का सारा कानूनी काम, चार गवाहों के बयान और जरूरी दस्तावेजों की फाइलिंग एआई ने खुद की।
- वकील को किया हायर: ट्रायल शुरू होने से ठीक पहले, गारफील्ड ने अपनी तरफ से बहस करने के लिए वन एसेक्स कोर्ट के एक जूनियर बैरिस्टर, डोमिनिक ली को काम पर रखा।
- शानदार नतीजे: मई में वैंड्सवर्थ काउंटी कोर्ट में तीन घंटे तक बहस चली। अंत में फैसला एआई और उनकी क्लाइंट के पक्ष में आया।
केस खत्म होने के बाद जूनियर बैरिस्टर डोमिनिक ली ने भी एआई की तारीफ करते हुए कहा, "इस ट्रायल के लिए गारफील्ड एआई के जरिए तैयार किए गए दस्तावेज मेरी जरूरत से कहीं ज्यादा पक्के और सटीक थे।"
आखिर क्या है Garfield AI?
इसके फाउंडर का नाम फिलिप यंग है। यह दुनिया की पहली ऐसी लॉ फर्म है जिसे सिर्फ एआई के जरिए कानूनी सेवाएं देने के लिए अधिकृत किया गया है। यह फर्म इंग्लैंड और वेल्स के स्मॉल क्लेम्स कोर्ट में कंपनियों और आम लोगों को 10,000 पाउंड (लगभग 12.5 लाख रुपये) तक के छोटे कर्ज और दावों को वसूलने में मदद करती है। कुल मिलाकर, गारफील्ड एआई ने यह साबित कर दिया है कि टेक्नोलॉजी अगर सही दिशा में इस्तेमाल की जाए, तो यह आम इंसान के पैसे और समय दोनों बचा सकती है।
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