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सही नहीं है सर्विस चार्ज लेना! जानिए रेस्टोरेंट्स के दावे और क्या कहता है कानून

रेस्टोरेंट्स सर्विस चार्ज वसूलने के लिए दबाव बनाते हैं लेकिन कानून इसका विरोध करता है। सरकार के उपभोक्ता संरक्षण दिशा-निर्देश कहते हैं कि रेस्टोरेंट्स अपने आप खाने के बिल में सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकते और ग्राहक इसे देने से मना सकते हैं।

20 जुलाई 2026 को 02:13 pm बजे
सही नहीं है सर्विस चार्ज लेना! जानिए रेस्टोरेंट्स के दावे और क्या कहता है कानून

सौजन्य से:- Hindustan

रेस्टोरेंट का सर्विस चार्ज मांगना कितना सही? क्या कहता है कानून, जानिए सबकुछ

आप भी रेस्टोरेंट में खाना खाने जाते हैं तो बिल में सर्विस चार्ज जुड़कर आता है। इस 10 परसेंट एक्स्ट्रा सर्विस चार्ज को हटाने की बात भी मानी नहीं जाती है। लेकिन अब रेस्टोरेंट में 10 परसेंट एक्स्ट्रा सर्विस चार्ज का मुद्दा फिर से गर्म है। जानिए इसके बारे में…

आप भी रेस्टोरेंट में खाना खाने जाते हैं तो बिल में सर्विस चार्ज जुड़कर आता है। इस 10 परसेंट एक्स्ट्रा सर्विस चार्ज को हटाने की बात भी मानी नहीं जाती है। लेकिन अब रेस्टोरेंट में 10 परसेंट एक्स्ट्रा सर्विस चार्ज का मुद्दा फिर से गर्म है। इसके पीछे है यूनियन कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्टर प्रहलाद जोशी की चेतावनी। केंद्रीय मंत्री ने रेस्टोरेंट्स को अनिवार्य सर्विस चार्ज हटाने के लिए कहा था। साथ ही यह भी कहा था कि इस नियम का उल्लंघन करने वालों को जुर्माना चुकाना होगा। केंद्रीय मंत्री के इस बयान के बाद सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी ने 41 रेस्टोरेंट्स के खिलाफ कार्रवाई की। इसमें चायोज और बार्बेक्यू नेशन जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ अतिरिक्त सर्विस टैक्स लगाने की शिकायतें थीं। अब सवाल उठता है कि क्या रेस्टोरेंट्स कानूनी तौर पर ग्राहकों को इस अतिरिक्त सर्विस चार्ज के लिए फोर्स कर सकते हैं? आइए जानते हैं...

क्या है सर्विस चार्ज

सर्विस चार्ज कोई सरकारी टैक्स नहीं होता है। यह रेस्टोरेंट द्वारा जुटाया गया पैसा होता है जो बिल का पांच से 10 परसेंट होता है। रेस्टोरेंट्स का कहना है कि इस मद में लिया गया पैसा सर्विस देने के बदले स्टाफ को बांट दिया जाता है। जहां जीएसटी सरकार के पास जमा होती है, वहीं सर्विस चार्ज रेस्टोरेंट खुद अपने पास रखते हैं। इसको लेकर अलग-अलग संस्थानों की पॉलिसी अलग होती हैं, कि इसे कर्मचारियों में वह किस तरह से वितरित करते हैं।

क्या सर्विस चार्ज चुकाने के लिए बाध्य कर सकते हैं?

केंद्र सरकार के उपभोक्ता संरक्षण दिशा-निर्देशों के अनुसार इसका सीधा जवाब है, नहीं। इसके 2022 में जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक रेस्टोरेंट्स अपने आप खाने के बिल में सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकते, इसे अनिवार्य या आवश्यक नहीं बता सकते। अगर ग्राहक इसे देने से मना कर दे तो वह सर्विस देने से ग्राहकों को अंदर आने से मना नहीं कर सकते। दिशा-निर्देशों से बचने के लिए इसे किसी और नाम से नहीं जोड़ सकते। दूसरे शब्दों में, उपभोक्ताओं के पास यह तय करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए कि वे सर्विस चार्ज देना चाहते हैं या नहीं।

फिर रेस्टोरेंट क्यों ले रहे हैं इसका पैसा

इसके पीछे की वजह है रेस्टोरेंट एसोसिएशन द्वारा कोर्ट में दी गई चुनौती। एसोसिएशन का तर्क सर्विस चार्ज रेस्टोरेंट की प्राइसिंग पॉलिसी का हिस्सा है। डिसप्ले बोर्ड और मेन्यू के जरिए ग्राहकों को इस बारे में पहले ही जानकारी दी जा चुकी होती है। अगर यह सब जानते हुए भी ग्राहक वहां पर खाना खाने आ रहे हैं, इसका अर्थ यह है कि उन्होंने रेस्टोरेंट की शर्तों को मान लिया है। हालांकि सरकार का तर्क है कि ग्राहकों को सिर्फ इसलिए सर्विस चार्ज नहीं चुकाना पड़ेगा कि यह मेन्यू पर या बोर्ड पर लिखा हुआ है। अब चूंकि यह मामला अभी तक कोर्ट में पेंडिंग है, इसलिए रेस्टोरेंट सर्विस चार्ज वसूलने में लगे हुए हैं। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान, कहाकि सर्विस चार्ज को अनिवार्य बनाना एक अनुचित व्यापार प्रथा माना जा सकता है।

मेन्यू कार्ड से क्या मतलब

कई रेस्टोरेंट ऐसे नोटिस लगाते हैं, जिसमें कहा जाता है कि सर्विस चार्ज लागू होगा। रेस्टोरेंट संगठन का कहना है कि यह पहले से जानकारी देने के बराबर है। हालांकि, उपभोक्ता फोरम का कहना है कि सिर्फ जानकारी देना इस बात का मतलब नहीं है कि ग्राहक को भुगतान से इनकार करने का अधिकार खत्म हो गया है।

सर्विस चार्ज न देने पर क्या

इस तरह का कोई दिशा-निर्देश नहीं है। अगर कोई ग्राहक सर्विस चार्ज नहीं देना चाहते तो तो उन्हें प्रवेश देने से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्राहकों पर चार्ज देने के लिए दबाव नहीं डालना चाहिए। जब तक चार्ज का भुगतान न हो जाए, ग्राहकों को जाने से रोक भी नहीं सकते। इसके अलाव इस बात का भी दावा नहीं करना चाहिए कि सर्विस चार्ज की राशि अनिवार्य है।

अगर रेस्टोरेंट मना कर दे तो?

अगर आपको लगता है कि सर्विस चार्ज गलत ढंग से लगाया गया है तो आप आराम से सर्विस चार्ज हटाने के लिए कह सकते हैं। आप नया बिल मांग सकते हैं और अगर रेस्टोरेंट मना कर दे तो बिल की एक कॉपी रख सकते हैं। आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं या किसी उपयुक्त उपभोक्ता फोरम से संपर्क कर सकते हैं। हाल ही में सीसीपीए की कार्रवाई खुद उपभोक्ताओं की शिकायतों की वजह से हुई थी।

क्या सर्विस चार्ज टिप देने की तरह है?

नहीं। टिप देना पूरी तरह से स्वैच्छिक होता है। यह आमतौर पर अच्छी सर्विस के लिए सीधे दी जाती है। सर्विस चार्ज रेस्टोरेंट द्वारा बिल के हिस्से के रूप में जोड़ा जाता है। आप चाहे तो सर्विस चार्ज हटा दिए जाने के बावजूद भी टिप छोड़ सकते हैं।

सरकार की सख्ती क्यों

उपभोक्ता प्राधिकरण कहते हैं कि कई ग्राहक मानते हैं कि सर्विस चार्ज, जीएसटी की तरह है। हालांकि यह गलत है। इसको लेकर शिकायतें बढ़ने पर, सीसीपीए ने गाइडलाइन जारी की कि ऑटोमैटिकली मेंडेटरी सर्विस चार्ज जोड़ना एक अनुचित व्यापार प्रथा है। रेस्टोरेंट्स को हाल ही में दी गई नोटिस और उपभोक्ता मामलों के मंत्री की चेतावनी से लगता है कि सरकार इन गाइडलाइंस को और सख्ती से लागू करने का इरादा रखती है।

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लेखक के बारे में

Deepak Mishraमूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

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