सुप्रीम कोर्ट में CBSE की भाषा नीति पर बड़ा दाव: क्लास 9 के बच्चों पर न थोपें 3 भाषाएं...
सुप्रीम कोर्ट में CBSE की कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषा नीति को अनिवार्य किए जाने के खिलाफ याचिकाएं दायर की गईं। मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण ने कोर्ट से आग्रह किया कि इस मामले में तुरंत ध्यान दिया जाए।

सौजन्य से:- Aaj Tak News
Sign In
Advertisement
X
CBSE की कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषा नीति को अनिवार्य किए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण ने मामले को जल्द सुनने की मांग रखी. वकील ने कोर्ट को बताया कि इस मामले को बुधवार को सुनाई के लिए सूचीबद्ध किया था लेकिन बाद में इस केस को सूची से हटा दिया गया. उन्होंने कहा कि इस मामले में तुरंत सुनवाई की जरूरत है क्योंकि कई छात्र ऐसी भाषा पढ़ने को मजबूर हैं, जिसके लिए उनके स्कूलों में पर्याप्त व्यवस्था नहीं है.
परेशान हैं छात्र
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण ने कोर्ट को बताया कि बहुत से बच्चों को वह भाषा नहीं पढ़ाई जा रही है जो उन्होंने चुनी थी. बच्चों के लिए किताबें और टीचर भी उपलब्ध नहीं हैं. यह क्लास 5-8 और क्लास 8-10 के लिए है. छात्र बिना किसी टीचर या किताबों के क्लासरूम में बैठे हैं.
बंगाल में भी नहीं हैं टीचर
उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कोलकाता में हिंदी, बंगाली और संस्कृत के विकल्प हैं, लेकिन उनके पास संस्कृत या हिंदी के टीचर नहीं हैं. उन्होंने आगे बताया कि यह फार्मूला 2030 में लागू होना था इसके तहत भाषा चुनाव के लिए 22 भाषाओं का विकल्प देना जरूरी है लेकिन ज़्यादातर स्कूलों में ये विकल्प नहीं हैं.इस पर जस्टिस बागची ने कहा भाषा चुनने का विकल्प क्लास 6 में होना चाहिए और वह विकल्प भी ऐसे होने चाहिए जो असल में संभव हो.
Advertisement
कोर्ट में की ये अपील
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण ने कहा कि कोर्ट से हमारा आग्रह है कि जो थ्री लैंग्वेज पॉलिसी का कंपल्शन क्लास नाइंथ के लिए है उसको हटा दिया जाए क्योंकि क्लास नाइंथ में आने वाले बच्चों के ऊपर बोर्ड का एक्स्ट्रा प्रेशर होता है. फिलहाल CJI ने आश्वासन दिया है कि कल इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है किया जा सकता है.
---- समाप्त ----
Latest News in Hindi »
Advertisement
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
पुरुषों के क्लब से निकलेंगे बार काउंसिल: सुप्रीम कोर्ट ने दी सख्त सौगात, हर राज्य में दो महिला सदस्य होंगी

सुप्रीम कोर्ट ने जियोस्टार को ट्राई टैरिफ फ्रेमवर्क विवाद में दिल्ली हाई कोर्ट जाने को कहा

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: दिवालिया होने पर प्रमोटरों को नहीं मिलेगी राहत

दिल्ली हाई कोर्ट ने निंटेंडो को बिहार कंपनी से राहत दी, कहा सुनिश्चित नहीं है ट्रेडमार्क उल्लंघन

केंद्र व बीसीआई से जवाब मांगने के बाद भी उत्तराखंड बार काउंसिल की याचिका पर हाईकोर्ट ने कार्यवाही बंद कर दी

निंटेंडो को दिल्ली उच्च न्यायालय से राहत, 'निंटेंडो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' को नाम का उपयोग करने से रोका

सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल में 'पुरुष क्लब' संस्कृति की आलोचना की, महिलाओं के लिए नए आदेश दिए

कानून के प्रसार और शिक्षा संबंधी मसौदा कानून में सुधार की आवश्यकता: राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट से CBSE की नई 3-लैंग्वेज नीति पर तुरंत सुनवाई की अपील
- सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ने कहा, न्याय को 'लाइक्स' का बाजार बना दिया और न्यायिक स्वतंत्रता को खतरा
- सुप्रीम कोर्ट से केंद्र को बड़ी चेतावनी, ट्रांसजेंडरों के अधिकार बरकरार रहें
- तब्बू ने अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया
- सुप्रीम कोर्ट की बढ़ती मामलों की संख्या का सामना करने के लिए संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता
- सुप्रीम कोर्ट ने पैलेट गन चलाने के नियमों पर कार्रवाई करने का फैसला किया
- 'स्थानीय निवासियों की समस्या गंभीर: दिल्ली का जंतर मंतर धरना-प्रदर्शन के लिए सही स्थान नहीं है'
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लिव-इन पार्टनर में शादीशुदा महिलाओं का फर्क नहीं रहेगा

