बंगाल सरकार को चुकाने का लचीला प्रस्ताव, सुप्रीम कोर्ट से सौम्य भुगतान का अनुरोध
पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि वह कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ते का 85% का भुगतान कर सकती है, लेकिन शेष 15% हिस्से के लिए राहत मांगी गई है। सरकार ने भारी वित्तीय दबाव का हवाला देते हुए चार किस्तों में भुगतान की प्रक्रिया शुरू कराने का आश्वासन दिया है।

सौजन्य से:- Jagran
बकाया महंगाई भत्ते का 85 प्रतिशत चुकाना चाहती है बंगाल सरकार, सुप्रीम कोर्ट से मांगी राहत
पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ते (डीए) का 100% नहीं, बल्कि 85% ही चुका पाएगी। ...और पढ़ें
HighLights
- बंगाल सरकार 85% बकाया डीए चुकाने को तैयार।
- सुप्रीम कोर्ट से 15% राशि में राहत की मांग।
- वित्तीय बोझ के कारण 2028 तक किस्तों में भुगतान।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी स्टेटस रिपोर्ट में कहा है कि वह सरकारी कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ते (डीए) का 100 प्रतिशत नहीं, बल्कि 85 प्रतिशत ही चुका पाएगी।
सरकार ने शेष 15 प्रतिशत राशि में राहत देने का अनुरोध करते हुए कहा है कि भारी वित्तीय बोझ के कारण पूरी राशि का भुगतान संभव नहीं है। सरकार ने 2028 तक चार किस्तों में बकाया राशि चुकाने की अपनी योजना से भी अदालत को अवगत कराया है।
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कर्मचारियों का 100 प्रतिशत बकाया डीए चुकाने का निर्देश दिया था और इस संबंध में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था।
राज्य सरकार को देने होंगे कितने रुपये?
राज्य सरकार के अनुसार, 2008 से 2019 तक की अवधि का बकाया डीए चुकाने के लिए कुल 11,983 करोड़ रुपये देने होंगे। पहली किस्त इसी महीने जारी की जा चुकी है। पहली किस्त में 7,771 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है। दूसरी किस्त जनवरी 2027, तीसरी जुलाई 2027 और चौथी जनवरी 2028 में जारी की जाएगी।
2008 से 2015 तथा 2016 से 2019 की अवधि को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। प्रत्येक कर्मचारी के 141 महीनों के बकाये की अलग से गणना करनी पड़ रही है।
राज्य सरकार के अधीन लाखों कर्मचारी और पेंशनभोगी हैं तथा 90 कोषागारों से आंकड़े जुटाने पड़ रहे हैं। विभिन्न विभागों के वेतन ढांचे अलग होने के कारण अलग-अलग गणना की जा रही है।
सरकार ने तर्क दिया कि डीए मूल्य वृद्धि की भरपाई के लिए दिया जाता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि मूल्य वृद्धि का 100 प्रतिशत भुगतान अनिवार्य हो।
साथ ही, वस्तु एवं सेवा कर से राज्य की आय कम होने और 2026 के विधानसभा चुनाव पर हुए भारी खर्च का हवाला देते हुए वित्तीय दबाव की बात कही गई है।
इसी आधार पर 15 प्रतिशत राहत देने का अनुरोध किया गया है। वहीं, इस मामले में सरकारी कर्मचारियों के एक वर्ग की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता फिरदौस शमीम ने कहा कि राज्य सरकार ऐसा अनुरोध कर सकती है, लेकिन कर्मचारी 100 प्रतिशत बकाया राशि का शीघ्र भुगतान चाहते हैं और न्यायालय में इसी पक्ष को मजबूती से रखा जाएगा।
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