अब 7 करोड़ चालान के बोझ तले दबी वर्चुअल अदालत
अब 7 करोड़ चालान के बोझ तले दबी वर्चुअल अदालत देशभर में वर्चुअल अदालतों में यातायात नियमों के उल्लंघन पर 7 करोड़ से अधिक चालान लंबित हैं। दिल्ली और उत्तर प्रदेश में ही करीब 5 करोड़ चालान हैं। 2019 में हरियाणा में आरंभ हु…

सौजन्य से:- Live Hindustan
अब 7 करोड़ चालान के बोझ तले दबी वर्चुअल अदालत
देशभर में वर्चुअल अदालतों में यातायात नियमों के उल्लंघन पर 7 करोड़ से अधिक चालान लंबित हैं। दिल्ली और उत्तर प्रदेश में ही करीब 5 करोड़ चालान हैं। 2019 में हरियाणा में आरंभ हुई वर्चुअल कोर्ट का मकसद लोगों को घर बैठे चालान का निपटारा करना है।
अदालतों में मुकदमे के बोझ को कम करने के लिए यातायात नियमों के उल्लंघन पर होने वाले चालान के निपटारे के लिए देशभर में वर्चुअल अदालत बनाए गए। लेकिन अब वर्चुअल अदालत खुद चालान के बोझ तले दब गई है। देशभर में बनी वर्चुअल अदालतों में 7 करोड़ से अधिक चालान लंबित है। इनमें अकेले दिल्ली और उत्तर प्रदेश में लगभग 5 करोड़ चालान लंबित हैं। इसका खुलासा, सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी द्वारा एकत्र सभी वर्चुअल अदालतों के आंकड़ों से हुआ। शीर्ष अदालत की ई-कमेटी के आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च 2026 तक 31 वर्चुअल अदालतों में 7 करोड़ 9 लाख 68 हजार से अधिक चालान लंबित हैं। अकेले मार्च महीने में 32 लाख 32 हजार नए चालान वर्चुअल अदालत में भेजे गए और महज 7 लाख 83 हजार का निपटारा किया गया। दिल्ली की दो वर्चुअल अदालत (यातायात और नोटिस विभाग) में मार्च माह में करीब 7 लाख 20 हजार नए चालान दाखिल किए गए, जबकि उत्तर प्रदेश में 9 लाख नए चालान दाखिल हुए। बिहार, झारखंड जैसे कई राज्यों में यातायात नियमों की अनदेखी पर होने वाले चालान के निपटारे के लिए अभी तक वर्चुअल अदालत नहीं बनाए गए हैं और इन राज्यों में पहले की तरह चालान का निपटारा हो रहा है。
यातयात के लिए वर्चुअल कोर्ट कब बनी
देश में यातायात नियमों के उल्लंघन पर होने वाले चालान के निपटारे के लिए अगस्त, 2019 में हरियाणा के फरीदाबाद में वर्चुअल कोर्ट की शुरुआत हुई थी। इसके महज कुछ ही माह बाद, मई, 2020 में दिल्ली में दो वर्चुअल कोर्ट स्थापित की गई थी। इसका मकसद वाहन मालिक/ चालक को अदालतों की भीड़ में जाने के बजाए घर बैठे अपने चालान का भुगतान करना था। इसके बाद धीरे-धीरे देश के अन्य राज्यों में वर्चुअल कोर्ट बनाए गए।
कहां कितने चालान लंबित
दिल्ली- 3 करोड़
उत्तर प्रदेश -1 करोड़ 93 लाख
उत्तराखंड- 3 लाख 51 हजार
राजस्थान- 2 लाख 30 हजार
मध्य प्रदेश-23 लाख 12 हजार
छत्तीसगढ़- 26 हजार
गुजरात- 86 लाख 60 हजार
चंडीगढ़- 15 लाख 29 हजार
हरियाणा- 39 लाख
जम्मू कश्मीर - 19 लाख
हिमाचल प्रदेश-3 लाख 20 हजार
कर्नाटक-506
केरल- 6 लाख
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