मध्य प्रदेश सरकार ने 7 पुराने कानूनों को हटाया, समय के साथ उपयोगिता समाप्त!
मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने समय के साथ उपयोगिता समाप्त होने के कारण 7 पुराने कानूनों को हटाने का कदम उठाया है, जो अंग्रेजों के जमाने से जुड़े थे. इनमें से कई कानूनों की उपयोगिता पहले ही खत्म हो गई थी, लेकिन अभी तक कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी.

सौजन्य से:- ETV Bharat
मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने 7 कानूनों को किया खत्म, अंग्रेज चले गए, रह गए थे कानून
विधानसभा में मध्य प्रदेश निरसन विधेयक 2026 पारित हो गया है, इसके साथ ही अंग्रेजों के जमाने के7 कानून भी खत्म हो गये हैं.
By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : July 23, 2026 at 6:02 PM IST
|Updated : July 23, 2026 at 6:12 PM IST
भोपाल: समय के साथ कई कानून की जरूरत भी खत्म हो जाती है. समाज की नई चुनौतियों को देखते हुए नए कानून बनते और खत्म किए जाते हैं. मध्य प्रदेश में भी पिछले 90 सालों से ऐसे कई कानून चले आ रहे थे, जिनकी उपयोगिता ही खत्म हो गई थी. मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने अब ऐसे 7 कानूनों को खत्म करने का कदम उठाया है. यह 7 कानून अंग्रेजों के द्वारा बनाए गए थे और पिछले 90 सालों से मध्य प्रदेश की कानून की किताबों में दर्ज थे, यह अलग बात है कि पिछले कई दशकों से इन कानून का उपयोग करने की जरूरत ही नहीं पड़ी.
यह 7 कानून प्रदेश सरकार ने किए खत्म
- मौजूदा दौर में जरूरत होने पर कर्ज के लिए बैंकों की मजबूत व्यवस्था तैयार हो चुकी है. मध्य प्रदेश में किसानों को राज्य सरकार द्वारा सहकारी बैंकों के माध्यम से जीरो फीसदी ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराया जाता है.
- अंग्रेजों के दौर में किसानों को साहूकारों से कर्ज लेना होता था. कर्ज की शर्तें दोनों के बीच आपसी समझौते से होती थीं और जब कभी विवाद की स्थिति बनती तो इसके लिए 1933 में ब्रिटिश हुकूमत द्वारा डेट कन्सीलिएशन बोर्ड बनाए जाने की व्यवस्था की थी. हालांकि, आजादी के बाद यह व्यवस्था खत्म हो गई, लेकिन मध्य प्रदेश में पिछले 93 सालों से इससे जुड़ा कानून अस्तित्व में थे. मोहन सरकार ने अब जाकर डेट कन्सीलिएशन एक्ट (सेंट्रल प्रोविन्स एंड बरार रीजन) 1933 को खत्म कर दिया है.
- मोहन सरकार ने इससे जुड़ा एक और कानून भी खत्म कर दिया है. प्रोटेक्शन ऑफ डेटर्स एक्ट (सेंट्रल प्रोविन्स रीजन) 1937 को अब सरकार ने खत्म कर दिया है. इस एक्ट को साहूकारों पर लगाम लगाने के लिए अंग्रेजों द्वारा 1937 में लाया गया था. इसमें साहूकारों द्वारा कर्ज वसूलने के लिए कर्जदारों को डराने, धमकाने और परेशान करने के मामले में जुर्माने और सजा का प्रावधान किया गया था. इसमें परेशान करने वाले का अपराध संज्ञेय और जमानती माना गया था.
- मोहन सरकार ने 1937 के फेमाइन रिलीफ फंड एक्ट (सेंट्रल प्रोविन्स एंड बरार रीजन) 1937 को भी खत्म कर दिया है. मौजूदा दौर में प्रदेश या प्रदेश के किसी हिस्से में बाढ़, अकाल या कोई अन्य प्राकृतिक आपदा की स्थिति में सरकार मदद के लिए हाथ बढ़ाती है और इसके लिए अलग से कोष की स्थापना करती है. अंग्रेजों के दौर में भी ऐसा ही कानून मध्य प्रदेश अकाल राहत कोष अधिनियम 1937 बनाया गया था. हालांकि राज्यों के पुनर्गठन और समय के साथ हुए कानूनी बदलावों से इसकी उपयोगिता खत्म हो गई.
- मध्य प्रदेश सरकार ने 1939 का एक और कानून खत्म करने का कदम उठाया है. 87 सालों से मध्य प्रदेश की कानून की किताबों में रिलीफ ऑफ इनडेटेडनेस एक्ट 1939 चला आ रहा था. यह कानून ब्रिटिशा शासन काल में किसानों को ऋण की राशि से मुक्ति दिलाने और साहूकारों से बचाने के लिए लाया गया था. इसमें ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए अलग से अदालतों के गठन का प्रावधान था.
- मध्य प्रदेश सरकार ने स्कूलों से जुड़ा 88 साल पुराना एक कानून भी खत्म कर दिया है. अंग्रेजों के दौर में विद्या मंदिरों की स्थापना और उनके संचालन के लिए एक कानून बनाया गया था, इसे विद्या मंदिर एक्ट (सेंट्रल प्रोविन्स एंड बरार रीजन ) 1940 नाम दिया गया था. हालांकि, इसकी उपयोगिता पहले ही खत्म हो गई थी.
- अयोग्य डॉक्टरों द्वारा इलाज करने पर अब राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम 2019 और भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाती है. ऐसे मामलों के लिए 2019 में केन्द्र सरकार कानून बना चुकी है. इन कानून के तहत मध्य प्रदेश में भी कार्रवाई हो रही है. हालांकि इसके बाद भी 1944 का एक कानून अब भी अस्तित्व में था, जिसे राज्य सरकार ने खत्म कर दिया है. मोहन सरकार ने 1944 में बनाए गए द मध्य प्रदेश रेग्युलेशन ऑफ काउचिंग एक्ट को खत्म कर दिया है. यह कानून ब्रिटिश शासन द्वारा 1944 में ऐसे अनरजिस्टर्ड डॉक्टर पर रोक लगाने के लिए लगाया गया था, जो योग्य न होने पर भी मोतियाबिंद का इलाज करते थे. ऐसे पारंपरिक या अनरजिस्टर्ड डॉक्टर्स के खिलाफ 6 माह की सजा या 1 हजार रुपए के जुमाने का प्रावधान रखा गया था.
- मध्य प्रदेश सरकार ने 1947 में बनाए गए लैंड सर्वे एक्ट को भी खत्म कर दिया है. इस एक्ट में प्रावधान था कि सरकार द्वारा अधिकृत व्यक्ति भूमि के सर्वे के लिए किसी निजी जमीन पर कानूनी रूप से प्रवेश कर सकता है.
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मंत्री बोले अंग्रेजों के कानूनों से मिली मुक्ति
राज्य मंत्री गौतम टेटवाल ने कहा कि "इन कानूनों को खत्म करने के लिए विधानसभा में मध्य प्रदेश निरसन विधेयक 2026 पेश किया, जो पारित हो गया है. इसके साथ ही मध्य प्रदेश को अंग्रेजों के समय के कई कानूनों से मुक्ति मिल गई है. सरकार द्वारा ऐसे गैर जरूरी कानूनों को खत्म करने का काम किया जा रहा है, जो समय के साथ अपनी उपयोगिता खो चुके हैं."
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