भारत में प्रदर्शनकारियों को क्या अधिकार? जानें लक्ष्मण रेखा क्या है
भारतीय संविधान में विरोध प्रदर्शन करने का भी अधिकार है, लेकिन इसके लिए अनुमति लेनी होती है। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से एकत्रित होने और बिना हथियारों के बैठक, रैलियां या सार्वजनिक प्रदर्शन करने का अधिकार है।

सौजन्य से:- Aaj Tak News
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देश में कॉकरोच जनता पार्टी के नाम से सोशल मीडिया पर शुरू हुई इस व्यंग्यात्मक पार्टी की चिंगारी अब आग बन गई है. NEET पेपर लीक के मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों से प्रदर्शन देखने को मिल रहा है. इन दिनों यह मुद्दा पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है, देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. ऐसे में, यह जानना अहम है कि आखिर भारतीय कानून प्रदर्शनकारियों को क्या अधिकार देता है और कहां पर यह लकीर पार मानी जाती है.
भारतीय संविधान सीधे तौर पर विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार नहीं देता लेकिन इसे अनुच्छेद 19 के तहत बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत शामिल किया जा सकता है. कई बार अदालत की अनुमति लेकर भी प्रदर्शन किए जाते हैं.
संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत नागरिकों को जो बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी गई है, उन्हें इस तरह समझा जा सकता है-
अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत देश के नागरिकों को अपनी बात को कहने की स्वतंत्रता है, इसके तहत बोलना, लिखना, छापना, प्रेस की आज़ादी और चुप रहने का अधिकार शामिल है.
अनुच्छेद 19(1)(b) भारतीय नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से एकत्रित होने और बिना हथियारों के बैठकें, रैलियां या सार्वजनिक प्रदर्शन करने का अधिकार देता है. इस अधिकार के तहत किसी स्थान पर बिना हथियारों के बैठक, रैली या सार्वजनिक प्रदर्शन आयोजित करने की अनुमति संविधान देता है.
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अनुच्छेद (19)(1)(c) भारतीय नागरिकों को संघ, यूनियन या सहकारी समितियां बनाने का अधिकार देता है.
संविधान ने भारतीय नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से एकत्रित होने, बिना हथियारों के सार्वजनिक प्रदर्शन, धरना, बैठक, रैली आदि का अधिकार दिया है. वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक बहुत महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार है क्योंकि यह नागरिकों को सजग होकर, निडरता से अपनी बात रखने का अधिकार देता है. हालांकि, यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि किन परिस्थितियों में लकीर पार मानी जाती है.
संविधान के तहत भारतीय नागरिकों को अनुच्छेद 19 के तहत वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत जो अधिकार दिए गए हैं वह इन परिस्थितियों में अवैध हो जाएंगे और ऐसे में प्रशासन कार्रवाई कर सकता है अगर -
- भारत की सम्प्रभुता और अखंडता पर खतरा हो
- राज्य की सुरक्षा पर खतरा हो
- विदेशी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों में बाधा बने
- सार्वजनिक व्यवस्था में खलल हो
- शालीनता या नैतिकता पर आंच आए
- न्यायालय की अवमानना हो
- मानहानि की जाए
- अपराध के लिए उकसाया जाए
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