वाराणसी में मादक पदार्थ की तस्करी करते 10 साल की सजा
वाराणसी की अदालत ने अल्प्राजोलम की तस्करी मामले में करन सिंह को 10 साल का कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा है कि मादक पदार्थों के तस्करी से समाज में व्याप्त समस्याएं बढ़ती हैं और ऐसे अपराधियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

सौजन्य से:- Jagran
वाराणसी में मादक पदार्थ की तस्करी करने के दोषी को अदालत ने दी सजा, अदालत ने कही यह बात
वाराणसी की अदालत ने नशीले पाउडर (अल्प्राजोलम) की तस्करी के दोषी करन सिंह को दस साल के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायालय ...और पढ़ें
HighLights
- करन सिंह को अल्प्राजोलम तस्करी में दोषी ठहराया गया।
- अदालत ने दस साल कठोर कारावास की सजा सुनाई।
- मादक पदार्थों की तस्करी पर न्यायालय का सख्त संदेश।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। नशीला पाउडर (अल्प्राजोलम) की तस्करी के मामले में अपर जिला जज (पंचम) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने अभियुक्त करन सिंह को दोषी ठहराया है। बुधवार को अदालत ने उसे दस साल के कठोर कारावास एवं एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। यदि अभियुक्त जुर्माना नहीं भरता है, तो उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अरविंद कुमार श्रीवास्तव और सुनील कुमार सिंह ने अपना पक्ष रखा।अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि 15 मई 2023 को रेलवे स्टेशन कैंट के प्लेटफार्म नंबर एक से जीआरपी ने जौनपुर जिले के बरसठी थाना क्षेत्र के बसहरा गांव निवासी अभियुक्त करन सिंह को गिरफ्तार किया था।
जांच के दौरान पुलिस ने उसके पास से 120 ग्राम अवैध नशीला पाउडर (अल्प्राजोलम पाउडर) बरामद किया था। इसके बाद पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था। अदालत ने सुनवाई के दौरान सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को ध्यान में रखते हुए करन सिंह को दोषी पाया।
इस मामले में अभियोजन पक्ष ने यह साबित करने में सफलता प्राप्त की कि अभियुक्त ने अवैध रूप से नशीले पदार्थ का कारोबार किया था, जो समाज के लिए अत्यंत हानिकारक है। अदालत ने इस मामले में सजा सुनाते समय यह भी कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी से समाज में व्याप्त समस्याओं को देखते हुए सख्त सजा आवश्यक है।
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अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी से युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ता है और ऐसे अपराधियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि अन्य लोग इस तरह के अपराध करने से बचें। इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि न्यायालय मादक पदार्थों के खिलाफ सख्त है और ऐसे मामलों में कोई भी ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
इस मामले में सुनवाई के दौरान अभियुक्त के वकील ने उसकी ओर से कुछ तर्क प्रस्तुत किए, लेकिन अदालत ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। अंततः अदालत ने अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई, जो कि समाज में मादक पदार्थों के खिलाफ एक सख्त संदेश है।
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