सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य जजों की सेवानिवृत्ति आयु 62 साल करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को जजों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष रखने पर विचार करने को कहा, यह कहा कि जज देर से सेवा में आते हैं और इससे राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड जैसी कुछ रियायतें वित्तीय कारणों से विरोध में थीं, जबकि मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। अगली सुनवाई 17 सितंबर को निर्धारित की गई।

सौजन्य से:- Jagran
'सभी राज्य जजों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करें', सुप्रीम कोर्ट ने दिया अहम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने पर विचार करने को कहा।
HighLights
- एडवोकेट जनरल मुख्यमंत्रियों को मनाने का करें प्रयास, 17 सितंबर को फिर सुनवाई
- जज देर से शुरू करते हैं न्यायिक पारी, इसलिए वित्तीय बोझ की दलील उचित नहीं : कोर्ट
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने पर विचार करने को कहा। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारी आम सरकारी कर्मचारियों की तुलना में अपेक्षाकृत देर से न्यायिक सेवा में आते हैं। ऐसे में उनकी सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने से राज्यों पर ऐसा अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा, जिसे आधार बनाकर प्रस्ताव का विरोध किया जाए।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने को लेकर हिचकिचा रहे राज्यों के एडवोकेट जनरल से कहा कि वे अपने मुख्यमंत्रियों को मनाने का प्रयास करें।
कुछ राज्यों ने न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु अन्य सरकारी कर्मचारियों के समान 58 या 60 वर्ष रखने का सुझाव दिया था। पीठ ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक सेवा में आने तक जज काफी उम्र पार कर चुके होते हैं। ऐसे में उन्हें 62 वर्ष तक सेवा का अवसर देने से राज्यों पर कोई असामान्य वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।
कुछ राज्यों ने जताई सहमति
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के प्रस्ताव को लागू करने में वित्तीय कठिनाइयों का हवाला दिया।
नगालैंड ने कहा कि उसके यहां सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष है। ऐसे में न्यायिक अधिकारियों के लिए यह सीमा बढ़ाने से प्रशासनिक और वित्तीय दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।
हालांकि, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना ने जिला अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के प्रस्ताव पर सहमति जताई।
पीठ ने राज्यों की अलग-अलग राय पर गौर करते हुए सभी से इस मुद्दे पर सकारात्मक रुख अपनाने को कहा। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 सितंबर की तारीख तय की है।
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