नोएडा के 600 किसानों को मिले 35‑साल के बाद बढ़ा मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट ने 90 दिनों में भुगतान का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 1991 में अधिग्रहित जमीन के लिए 340 रुपये प्रति वर्ग गज के बजाय 403 रुपये प्रति वर्ग गज का मुआवजा तय किया और नोएडा प्राधिकरण को तीन महीने के भीतर राशि भुगतान करने का निर्देश दिया। यह फैसला 35 साल की लम्बी लड़ाई के बाद 600 से अधिक जमीन मालिकों को अतिरिक्त मुआवजा सुनिश्चित करता है।

सौजन्य से:- Prabhat Khabar
नोएडा के 600 किसानों की जीत, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 90 दिनों में खातों में आएगा बढ़ा हुआ मुआवजा, खत्म हुआ 35 साल का इंतज़ार...
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नोएडा के किसानों को बढ़े मुआवजे की उम्मीद.
करीब 35 साल की मुआवजे की लड़ाई के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने छलेरा बांगर के जमीन मालिकों के हक में बड़ा फैसला सुनाया है. अब उन्हें 1991 में अधिग्रहित जमीन के लिए 403 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से मुआवजा मिलेगा. नोएडा प्राधिकरण को तीन महीने में भुगतान का आदेश दिया गया है.
Supreme Court Order: करीब तीन दशक से मुआवजे की लड़ाई लड़ रहे छलेरा बांगर के जमीन मालिकों के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला बड़ी राहत लेकर आया है. 1991 में अधिग्रहित जमीन के लिए अब उन्हें 340 रुपये की जगह 403 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से मुआवजा मिलेगा. कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण को तीन महीने के भीतर बढ़ी हुई राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है. इस फैसले से 600 से अधिक जमीन मालिकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है.
एक जैसे मामलों में समान मुआवजे की मांग
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मामले की सुनवाई भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने की. जमीन मालिकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. राजीव शर्मा ने अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि जब उसी अधिसूचना और समान परिस्थितियों वाले दूसरे जमीन मालिकों को 403 रुपये प्रति वर्ग गज मिल चुका है, तो इन लोगों को कम मुआवजा नहीं दिया जा सकता.
340 से बढ़कर 403 रुपये हुई दर
छलेरा बांगर में जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना 5 जनवरी 1991 को जारी हुई थी. शुरुआत में विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने 110 रुपये प्रति वर्ग गज मुआवजा तय किया था. इसके बाद रिफरेंस कोर्ट ने इसे 233 रुपये किया. 19 मई 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुआवजा बढ़ाकर 340 रुपये प्रति वर्ग गज कर दिया. नोएडा प्राधिकरण की SLP भी 5 फरवरी 2014 को सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो गई थी.
पुराने फैसलों से मिली जमीन मालिकों को ताकत
इसी अधिसूचना से जुड़े बीर सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बाद में मुआवजा 449 रुपये प्रति वर्ग गज किया था. इसके बाद हरनंद सिंह मामले समेत दूसरे विवाद भी अदालत पहुंचे. 10 जुलाई 2024 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने पूरे अधिग्रहित क्षेत्र के लिए 403 रुपये प्रति वर्ग गज की दर तय की थी. इसी फैसले को आधार बनाकर जमीन मालिकों ने करीब 49 अर्जियां दाखिल की थीं.
तीन महीने में करना होगा भुगतान
नोएडा प्राधिकरण ने दलील दी कि जमीन मालिक पहले ही 340 रुपये प्रति वर्ग गज का मुआवजा स्वीकार कर चुके हैं. प्राधिकरण ने यह भी कहा कि इतने पुराने मामले में अब अतिरिक्त मुआवजे की मांग स्वीकार नहीं की जानी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया. कोर्ट ने मामलों की दोबारा गणना कर बढ़ी हुई राशि का भुगतान तीन महीने में करने का निर्देश दिया है. इससे प्रभावित 600 से अधिक जमीन मालिकों को लंबे इंतजार के बाद अतिरिक्त मुआवजे की उम्मीद जगी है.
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