मुंबई की अदालत का सख्त फैसला: 44 सोमाली समुद्री डाकुओं को आजीवन कारावास
मुंबई की विशेष अदालत ने समुद्री डकैती और अपहरण के मामले में 44 सोमाली समुद्री डाकुओं को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोषियों ने भारतीय जेल में परेशानियों का हवाला देते हुए दया की अपील की थी, लेकिन अदालत ने इसे ठुकरा दिया।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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मुंबई की विशेष अदालत का बड़ा फैसला: 44 सोमाली समुद्री डाकुओं को उम्रकैद, रहम की गुहार भी क्यों नहीं आई काम?
Mon, 20 Jul 2026 07:35 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Mon, 20 Jul 2026 07:35 PM IST
सार
Mumbai Special Court: मुंबई की विशेष अदालत ने समुद्री डकैती, अपहरण और हत्या की कोशिश जैसे गंभीर मामलों में दोषी 44 सोमाली समुद्री डाकुओं को उम्रकैद की सजा सुना दी। दोषियों ने भारतीय जेल में भाषा, खान-पान और परिवार से दूर रहने की परेशानी बताकर दया की अपील की थी, लेकिन अदालत ने उसे ठुकरा दिया। आखिर अदालत ने उनकी गुहार क्यों नहीं मानी? आइए. विस्तार से पूरे मामले को जानते हैं...
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विस्तार
मुंबई की विशेष अदालत ने समुद्री सुरक्षा से जुड़े एक बड़े मामले में 44 सोमाली समुद्री डाकुओं को उम्रकैद की सजा सुनाई। इससे अदालत ने साफ संदेश दे दिया कि डकैती और अपहरण जैसे गंभीर अपराधों के प्रति कानून किसी तरह की नरमी नहीं बरतेगा। दोषियों ने सजा से पहले अदालत से दया की अपील की थी। उनका कहना था कि भारतीय जेल में भाषा, खान-पान, संस्कृति और परिवार से दूर रहने के कारण उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए उनकी अपील खारिज कर दी।
अदालत ने कहा कि सभी दोषी समुद्री डकैती निरोधक कानून, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाए गए हैं। विशेष जज संजय दिघे ने अपने फैसले में माना कि आरोपियों पर समुद्री डकैती, अपहरण और हत्या की कोशिश जैसे गंभीर अपराध सिद्ध हुए हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में केवल व्यक्तिगत कठिनाइयों के आधार पर सजा में राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि यह अपराध समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।
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अदालत ने कहा कि सभी दोषी समुद्री डकैती निरोधक कानून, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाए गए हैं। विशेष जज संजय दिघे ने अपने फैसले में माना कि आरोपियों पर समुद्री डकैती, अपहरण और हत्या की कोशिश जैसे गंभीर अपराध सिद्ध हुए हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में केवल व्यक्तिगत कठिनाइयों के आधार पर सजा में राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि यह अपराध समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।
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आखिर 44 सोमाली समुद्री डाकू कैसे पकड़े गए?
मामले के अनुसार, मार्च 2024 में भारतीय नौसेना ने समुद्र में चलाए गए दो अलग-अलग अभियानों के दौरान इन सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पहले अभियान में नौ सोमाली समुद्री डाकुओं को पकड़ा गया था। नौसेना ने उनके कब्जे से एक ईरानी मछली पकड़ने वाले जहाज को मुक्त कराया था, जिस पर कुछ पाकिस्तानी नागरिक भी सवार थे। इसके बाद दूसरे अभियान में 35 अन्य सोमाली समुद्री डाकुओं को एक व्यापारी जहाज के अपहरण के आरोप में गिरफ्तार किया गया। सभी 44 आरोपियों को बाद में मुंबई लाया गया, जहां येलो गेट पुलिस स्टेशन ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। मुकदमे के दौरान सभी आरोपियों ने अदालत के सामने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था।
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दोषियों ने अदालत से रहम की गुहार में क्या कहा?
सजा सुनाए जाने से पहले सभी दोषियों ने अदालत में एक अर्जी दाखिल कर नरमी की मांग की। उन्होंने कहा कि वे पिछले दो वर्षों से भारतीय जेल में बंद हैं और उन्हें अपने परिवार या मित्रों से कोई सहायता नहीं मिल रही है। अलग भाषा, अलग संस्कृति और अलग खान-पान के कारण उन्हें मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अदालत से कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से अपराध स्वीकार किया है और उन्हें भारत सरकार तथा भारतीय न्याय व्यवस्था से दया की उम्मीद है। उन्होंने खुद को एक मित्र देश के गरीब नागरिक बताते हुए सजा कम करने की अपील भी की।सरकारी पक्ष ने क्या दलील दी और अदालत ने क्या फैसला सुनाया?
- सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक रंजीत सांगले ने अदालत में कहा कि आरोपियों ने बेहद गंभीर अपराध किए हैं। ऐसे मामलों में कड़ी सजा ही कानून का उद्देश्य पूरा करती है और इससे भविष्य में इस तरह के अपराधों पर रोक लगाने का संदेश भी जाता है। अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलों से सहमति जताई और सभी 44 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
- सुनवाई के दौरान शुरुआत में सोमालिया दूतावास की ओर से एक वकील नियुक्त किया गया था, लेकिन बाद में आरोपियों ने अदालत को बताया कि उनके पास कोई अधिवक्ता नहीं है। इसके बाद अदालत के निर्देश पर सरकारी कानूनी सहायता टीम से अधिवक्ता सुमित कोकाटे ने सभी आरोपियों की ओर से पैरवी की। अदालत के इस फैसले को समुद्री सुरक्षा और कानून के सख्त पालन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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