झारखंड न्यायिक सेवा परीक्षा रद होने पर सुप्रीम कोर्ट से 35 अभ्यर्थियों को नहीं मिली राहत, याचिका निष्पादित - jharkhand judicial service exam cancelled sc denies relief
झारखंड न्यायिक सेवा परीक्षा रद होने पर सुप्रीम कोर्ट से 35 अभ्यर्थियों को नहीं मिली राहत, याचिका निष्पादित सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड न्यायिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2023 की संशोधित मेरिट लिस्ट से बाहर हुए 35 अभ्यर्थियों को…

सौजन्य से:- Jagran
झारखंड न्यायिक सेवा परीक्षा रद होने पर सुप्रीम कोर्ट से 35 अभ्यर्थियों को नहीं मिली राहत, याचिका निष्पादित
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड न्यायिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2023 की संशोधित मेरिट लिस्ट से बाहर हुए 35 अभ्यर्थियों को राहत देने से इनकार कर दिया। राज्य सरकार द्वारा परीक्षा रद किए जाने के कारण अदालत ने याचिका को निष्प्रभावी मानते हुए निष्पादित कर दिया।
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने 35 अभ्यर्थियों की याचिका खारिज की।
- झारखंड न्यायिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा रद हो चुकी है।
- परीक्षा रद होने से याचिका का आधार समाप्त।
राज्य ब्यूरो, रांची। सुप्रीम कोर्ट से झारखंड न्यायिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2023 की संशोधित मेरिट लिस्ट से बाहर किए गए 35 अभ्यर्थियों को राहत नहीं मिली। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जायमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की अदालत ने यह कहते हुए सुनवाई से इन्कार कर दिया कि जब विज्ञापन रद हो गया है तो अब संशोधित मेरिट लिस्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला देने का कोई आधार नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को अप्रासंगिक मानते हुए निष्पादित कर दिया। दरअसल, राज्य सरकार ने सीआईडी जांच में गड़बड़ी सामने आने तथा टीडीपीएल से संबद्ध होने के आधार पर जिन 22 परीक्षाओं को रद किया है, उनमें यह नियुक्ति परीक्षा भी सम्मिलित है।
पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान बताया गया कि झारखंड न्यायिक सेवा की प्रारंभिक परीक्षा रद की जा चुकी है। इस पर अदालत ने कहा कि जब परीक्षा ही रद हो गई है, तो संशोधित मेरिट लिस्ट को लेकर दायर याचिका पर अब कोई प्रभावी आदेश देने की जरूरत नहीं है।
यह मामला जेपीएससी की विज्ञापन संख्या 22/2023 के तहत सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के 138 पदों पर नियुक्ति से जुड़ा था। प्रारंभिक परीक्षा 10 मार्च 2024 को हुई थी। जेपीएससी ने माडल आंसर-की में कई बार बदलाव किया था। इसके बाद दो जुलाई 2024 को परीक्षा का परिणाम जारी किया गया, जिसमें करीब 1,797 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया था।
तीन सवालों के जवाब पर उठा था विवाद
परीक्षा के तीन प्रश्नों के उत्तर को लेकर विवाद हुआ था। इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने संबंधित प्रश्नों के उत्तरों को गलत मानते हुए अंकों की दोबारा गणना कर संशोधित मेरिट लिस्ट जारी करने का निर्देश दिया था।
जेपीएससी ने हाई कोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। नौ फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि हाई कोर्ट विशेषज्ञ की भूमिका नहीं निभा सकता। अदालत ने विवादित प्रश्नों की दोबारा समीक्षा के लिए हाई कोर्ट की प्रशासनिक समिति को निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जेपीएससी ने एक जून को अंतिम उत्तर कुंजी जारी की।
इसमें दो विवादित प्रश्नों को हटा दिया गया, जबकि एक प्रश्न का उत्तर बदल दिया गया। इसके बाद सभी अभ्यर्थियों के अंकों की दोबारा गणना की गई और पांच जून को संशोधित मेरिट लिस्ट जारी की गई।
पहले सफल 35 अभ्यर्थी संशोधित सूची से हो गए थे बाहर
संशोधित मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद पहले सफल घोषित किए गए कुछ अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया। इनमें 35 अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि जब उन्हें पहले ही प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित किया जा चुका था।
अगले चरण के लिए जरूरी दस्तावेज भी जमा कर दिए गए थे, तो संशोधित उत्तर कुंजी के आधार पर उन्हें बाहर नहीं किया जाना चाहिए। अभ्यर्थियों ने यह भी कहा था कि वे संशोधित मेरिट लिस्ट में सफल हुए उम्मीदवारों को हटाने की मांग नहीं कर रहे हैं।
उनकी मांग केवल इतनी थी कि पहले सफल घोषित किए गए अभ्यर्थियों की स्थिति भी सुरक्षित रखी जाए। इसी बीच झारखंड सरकार ने न्यायिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद कर दिया।
परीक्षा रद होने के बाद संशोधित मेरिट लिस्ट से बाहर किए गए 35 अभ्यर्थियों की याचिका का मूल आधार ही समाप्त हो गया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को निष्प्रभावी मानते हुए निष्पादित कर दिया।
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