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'ग्राहकों के लिए अपनी संपत्ति भी बेच दूंगा...' सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चर्चा में आया रामोजी राव का वो ऐतिहासिक पत्र

'ग्राहकों के लिए अपनी संपत्ति भी बेच दूंगा...' सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चर्चा में आया रामोजी राव का वो ऐतिहासिक पत्र - RAMOJI FILM CITY 🎬 Watch Now: Feature Video Published : August 22, 2026 at 8:08 PM IST सुप्रीम क…

22 अगस्त 2026 को 02:54 pm बजे
'ग्राहकों के लिए अपनी संपत्ति भी बेच दूंगा...' सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चर्चा में आया रामोजी राव का वो ऐतिहासिक पत्र

सौजन्य से:- ETV Bharat

'ग्राहकों के लिए अपनी संपत्ति भी बेच दूंगा...' सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चर्चा में आया रामोजी राव का वो ऐतिहासिक पत्र - RAMOJI FILM CITY

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Published : August 22, 2026 at 8:08 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पूर्व सांसद वुंडावल्ली अरुण कुमार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मार्गदर्शी फाइनेंशियर्स के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करने के तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी. इसके साथ ही, करीब दो दशक पहले शुरू हुई एक कानूनी लड़ाई का अंत हो गया. यह फैसला दिवंगत रामोजी राव की ओर से मार्गदर्शी के डिपॉजिटर्स को भरोसा दिलाने के लगभग 20 साल बाद आया है, जब कई राजनेताओं ने मार्गदर्शी पर आरोप लगाए थे. इन आरोपों के बाद, 10 नवंबर 2006 को रामोजी राव ने मार्गदर्शी के डिपोजिटर्स के नाम एक खुला पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने आश्वासन दिया था कि यह संस्था इन बेबुनियाद आरोपों से "साफ धुले हुए मोती की तरह" बेदाग निकलकर बाहर आएगी और इसमें उनका पैसा पूरी तरह सुरक्षित है. पत्र में रामोजी राव ने लिखा, डिपॉजिट के रूप में जुटाया गया सारा पैसा हमारे परिवार के HUF के तहत आने वाले संस्थानों में निवेश किया गया है. चूंकि HUF का प्रबंधन हमारे परिवार द्वारा ही किया जाता है, इसलिए यदि कभी आवश्यकता पड़ी, तो हम उन संस्थानों में अपनी हिस्सेदारी (स्टेक) बेचकर भी मार्गदर्शी फाइनेंशियर्स को मजबूत करेंगे जिनमें यह पैसा निवेश किया गया था.

हमेशा की तरह, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जमाकर्ताओं को उनके डिपॉजिट की मैच्योरिटी पर उनका भुगतान समय पर मिले, जिससे उन्हें पूरी संतुष्टि हो. परिवार के मुखिया के रूप में और परिवार के सभी सदस्यों की ओर से, मैं जमाकर्ताओं के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की हमारी बेदाग और पुरानी परंपरा को बनाए रखने का वादा करता हूं.

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पूर्व सांसद वुंडावल्ली अरुण कुमार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मार्गदर्शी फाइनेंशियर्स के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करने के तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी. इसके साथ ही, करीब दो दशक पहले शुरू हुई एक कानूनी लड़ाई का अंत हो गया. यह फैसला दिवंगत रामोजी राव की ओर से मार्गदर्शी के डिपॉजिटर्स को भरोसा दिलाने के लगभग 20 साल बाद आया है, जब कई राजनेताओं ने मार्गदर्शी पर आरोप लगाए थे. इन आरोपों के बाद, 10 नवंबर 2006 को रामोजी राव ने मार्गदर्शी के डिपोजिटर्स के नाम एक खुला पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने आश्वासन दिया था कि यह संस्था इन बेबुनियाद आरोपों से "साफ धुले हुए मोती की तरह" बेदाग निकलकर बाहर आएगी और इसमें उनका पैसा पूरी तरह सुरक्षित है. पत्र में रामोजी राव ने लिखा, डिपॉजिट के रूप में जुटाया गया सारा पैसा हमारे परिवार के HUF के तहत आने वाले संस्थानों में निवेश किया गया है. चूंकि HUF का प्रबंधन हमारे परिवार द्वारा ही किया जाता है, इसलिए यदि कभी आवश्यकता पड़ी, तो हम उन संस्थानों में अपनी हिस्सेदारी (स्टेक) बेचकर भी मार्गदर्शी फाइनेंशियर्स को मजबूत करेंगे जिनमें यह पैसा निवेश किया गया था.

हमेशा की तरह, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जमाकर्ताओं को उनके डिपॉजिट की मैच्योरिटी पर उनका भुगतान समय पर मिले, जिससे उन्हें पूरी संतुष्टि हो. परिवार के मुखिया के रूप में और परिवार के सभी सदस्यों की ओर से, मैं जमाकर्ताओं के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की हमारी बेदाग और पुरानी परंपरा को बनाए रखने का वादा करता हूं.

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