हापुड़ में 3 दिन लगेगी विशेष लोक अदालत, आसानी से निपटेंगे लंबित मामले
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर हापुड़ में 21 से 23 अगस्त तक विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। लोक अदालत में समझौते योग्य मामलों का त्वरित और सौहार्दपूर्ण निस्तारण किया जाएगा।

सौजन्य से:- Jagran
नोट कर लें तारीख, हापुड़ में 3 दिन लगेगी विशेष लोक अदालत; आसानी से करा सकेंगे लंबित मामलों का निपटारा
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर हापुड़ में 21 से 23 अगस्त तक विशेष लोक अदालत का आयोजन होगा। इसका उद्देश्य समझौते योग्य मामलों का त्वरित निस्तारण कर लं ...और पढ़ें
HighLights
- हापुड़ में 21-23 अगस्त को विशेष लोक अदालत का आयोजन।
- सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर मामलों का त्वरित निस्तारण होगा।
- समझौते योग्य लंबित मुकदमों के बोझ को कम करना लक्ष्य।
जागरण संवाददाता, हापुड़। समझौते योग्य मामलों के त्वरित और सौहार्दपूर्ण निस्तारण के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर 21 से 23 अगस्त तक ''समाधान समारोह-2026'' के तहत विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा।
इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्राधिकरण का लक्ष्य अधिक से अधिक मामलों का आपसी सहमति से निस्तारण कर लंबित मुकदमों का बोझ कम करना है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हापुड़ के सचिव एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सौरभ कुमार वर्मा ने बताया कि विशेष लोक अदालत में केवल ऐसे मामलों को शामिल किया जाएगा, जिनमें दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना है।
इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों के पक्षकारों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है। साथ ही प्री-लोक अदालत सुलह बैठकों का आयोजन कर सहमति बनाने का प्रयास भी किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से पक्षकारों को नि:शुल्क विधिक सहायता, कानूनी परामर्श और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि वे बिना अनावश्यक विलंब के आपसी सहमति से अपने विवादों का समाधान कर सकें।
अदालत का लाभ उठाने की अपील
उनका कहना था कि समझौते से होने वाले निस्तारण से न केवल वर्षों तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिलती है, बल्कि समय, धन और ऊर्जा की भी बचत होती है। उन्होंने जनपद के सभी सरकारी विभागों, अधिवक्ताओं और ऐसे पक्षकारों से विशेष लोक अदालत का लाभ उठाने की अपील की, जिनके मामले सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं और जिनमें समझौते की संभावना है।
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उन्होंने कहा कि पारिवारिक, सामाजिक और अन्य समझौतायोग्य मामलों में आपसी सहमति से समाधान निकलने पर रिश्तों में मधुरता बनी रहती है और लोगों को शीघ्र न्याय भी मिलता है।
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