धार भोजशाला केस की 29 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई की तैयारी में दोनों पक्ष सक्रिय
दोनों पक्ष 29 अक्टूबर को निर्धारित सुप्रीम कोर्ट सुनवाई से पहले आवश्यक दस्तावेज़ इकट्ठा करने और उत्तर तैयार करने में लगन से जुटे हैं, जबकि फुजैल अहमद अय्यूबी और आदित्य शर्मा को नोडल अधिवक्ता नियुक्त किया गया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मई में भोजशाला को वाग्देवी का मंदिर मानते हुए पूजा का अधिकार दिया था, और सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद पक्ष को शुक्रवार दोपहर नमाज की अनुमति दी थी, पर मंदिर पक्ष 300 मीटर के दायरे में नमाज पर रोक की मांग कर रहा है।

सौजन्य से:- Jagran
धार भोजशाला प्रकरण में 29 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई, दोनों पक्षों ने तेज की तैयारी; दस्तावेज जुटाने में जुटे वकील
धार भोजशाला प्रकरण में 29 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अहम सुनवाई के लिए दोनों पक्ष अपनी तैयारियों ...और पढ़ें
HighLights
- 29 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में भोजशाला प्रकरण की सुनवाई।
- दोनों पक्ष सुनवाई के लिए आवश्यक दस्तावेज जुटाने में लगे।
- नोडल अधिवक्ता फुजैल अहमद अय्यूबी और आदित्य शर्मा नियुक्त।
डिजिटल डेस्क, धार। भोजशाला प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट में 29 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई से पहले दोनों पक्ष अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। अक्टूबर में पर्वों का दौर है। ऐसे में दोनों पक्षों की कोशिश है कि सुनवाई के पहले न्यायालयीन प्रक्रिया से जुड़ी तैयारियां पूरी कर ली जाएं और दस्तावेजों की कमी अथवा अन्य किसी व्यवहारिक कठिनाई के कारण सुनवाई के दौरान कोई असहजकारी स्थिति निर्मित न हो।
इसी को देखते हुए दोनों पक्षों की ओर से नियुक्त नोडल अधिवक्ता आवश्यक जानकारी और दस्तावेज जुटाने के साथ जवाब तैयार कराने की प्रक्रिया में लगे हैं।
नोडल अधिवक्ताओं को सौंपी जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार न्यायालय की सहायता के लिए फुजैल अहमद अय्यूबी और आदित्य शर्मा को अपीलकर्ता और प्रतिवादी की ओर से नोडल अधिवक्ता नियुक्त किया गया है। दोनों नोडल अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी आवश्यक दस्तावेजों का संकलन कर उन्हें एक-दूसरे के साथ साझा करने की भी है।
इसी प्रक्रिया के तहत मामले से संबंधित पूर्व आदेशों, दस्तावेजों और दोनों पक्षों के तर्कों से जुड़ी आवश्यक जानकारी को व्यवस्थित किया जा रहा है। दोनों पक्ष चाहते हैं कि 29 अक्टूबर की सुनवाई में न्यायालय के समक्ष उनका पक्ष पूरी तैयारी और आवश्यक दस्तावेजों के साथ रखा जा सके।
यह है वर्तमान व्यवस्था
बता दें कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने 15 मई को भोजशाला को वाग्देवी का मंदिर मानते हुए परिसर में निर्बाध पूजा का अधिकार दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत मस्जिद पक्ष को भोजशाला के पीछे खसरा नंबर 612 की भूमि पर प्रत्येक शुक्रवार दोपहर एक से तीन बजे तक नमाज की अनुमति दी थी।
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वर्तमान में यही व्यवस्था लागू है। मंदिर पक्ष का कहना है कि भोजशाला परिसर के 300 मीटर के दायरे में नमाज की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। अब दोनों पक्षों की निगाहें 29 अक्टूबर की सुनवाई पर हैं।
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