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स्थायी लोक अदालत ने सुभाष जायसवाल पर सीसी सड़क विवाद के सभी आरोप खारिज किए

स्थायी लोक अदालत ने पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल के खिलाफ गुणवत्ता‑हीन सीसी सड़क निर्माण और सरकारी निधि के दुरुपयोग के आरोपों को खारिज कर दिया। अधिवक्ता भगवत प्रसाद पाठक की दायर याचिका में प्रस्तुत प्रमाण अपर्याप्त पाए गए, और अदालत ने कहा कि केवल पदधारी होने से व्यक्तिगत जिम्मेदारी सिद्ध नहीं होती।

3 अक्टूबर 2026 को 09:04 pm बजे
स्थायी लोक अदालत ने सुभाष जायसवाल पर सीसी सड़क विवाद के सभी आरोप खारिज किए

सौजन्य से:- Amar Ujala

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Lalitpur News: तत्कालीन नगर पालिकाध्यक्ष पर लगे आरोप को स्थायी लोक अदालत ने किया खारिज

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ललितपुर। स्थायी लोक अदालत ने तत्कालीन नगर पालिकाध्यक्ष सुभाष जायसवाल पर लगे आरोपों को खारिज कर दिया है। ये आरोप सीसी सड़क निर्माण में गुणवत्ता की कमी और सरकारी धन के दुरुपयोग से संबंधित थे। न्यायालय ने कहा कि अधिवक्ता इन आरोपों को सिद्ध करने में विफल रहे।

अधिवक्ता भगवत प्रसाद पाठक ने विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 22ए (बी)(4) के तहत प्रार्थना पत्र दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जायसवाल के कार्यकाल में जॉइंट मजिस्ट्रेट कार्यालय के सामने नाली व पुलिया मिटाकर सीसी सड़क बनाई गई। अधिवक्ता ने दावा किया कि इस कार्य में गुणवत्ता और पारदर्शिता नहीं अपनाई गई, साथ ही सरकारी धन का दुरुपयोग कर गबन किया गया। पाठक ने तत्कालीन नगर पालिकाध्यक्ष को नोटिस भी दिया था। अदालत की पीठ ने मामले की सुनवाई की। प्रस्तुत याचिका प्रमाणित न होने के कारण निरस्त कर दी गई। अदालत ने कहा कि केवल अध्यक्ष रहते सड़क का निर्माण व्यक्तिगत देयता स्थापित नहीं करता। नाली निर्माण मूल स्वीकृत योजना में था या नहीं, यह तथ्य भी प्रार्थी द्वारा प्रमाणित नहीं किया गया।

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अधिवक्ता भगवत प्रसाद पाठक ने विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 22ए (बी)(4) के तहत प्रार्थना पत्र दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जायसवाल के कार्यकाल में जॉइंट मजिस्ट्रेट कार्यालय के सामने नाली व पुलिया मिटाकर सीसी सड़क बनाई गई। अधिवक्ता ने दावा किया कि इस कार्य में गुणवत्ता और पारदर्शिता नहीं अपनाई गई, साथ ही सरकारी धन का दुरुपयोग कर गबन किया गया। पाठक ने तत्कालीन नगर पालिकाध्यक्ष को नोटिस भी दिया था। अदालत की पीठ ने मामले की सुनवाई की। प्रस्तुत याचिका प्रमाणित न होने के कारण निरस्त कर दी गई। अदालत ने कहा कि केवल अध्यक्ष रहते सड़क का निर्माण व्यक्तिगत देयता स्थापित नहीं करता। नाली निर्माण मूल स्वीकृत योजना में था या नहीं, यह तथ्य भी प्रार्थी द्वारा प्रमाणित नहीं किया गया।

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