सुप्रीम कोर्ट के फैसले से दिल्ली के 2800 किमी फुटपाथों का नवीनीकरण, PWD बदलेगा टेंडर सिस्टम
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद दिल्ली का लोक निर्माण विभाग (PWD) अपने टेंडर प्रक्रिया को पुनः डिज़ाइन करने जा रहा है ताकि 2800 किलोमीटर फुटपाथों की मरम्मत, रखरखाव और निर्माण किया जा सके। 2024 के ऑडिट में पाया गया कि 84 % फुटपाथ मानक पर खरे नहीं उतरते थे और केवल 25 % ही उपयोग योग्य थे। नई प्रणाली में तीन-सदस्यीय समिति द्वारा समीक्षा के बाद एक मॉडल टेंडर तैयार किया जाएगा, जिससे कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित हो सके।

सौजन्य से:- Jagran
दिल्ली के 2800 किमी फुटपाथ होंगे दुरुस्त, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद PWD बदलेगा टेंडर सिस्टम
दिल्ली पीडब्ल्यूडी सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद शहर के 2800 किलोमीटर फुटपाथों की मरम्मत और रखरखाव के लिए अपनी ...और पढ़ें
HighLights
- पीडब्ल्यूडी बदलेगा दिल्ली के फुटपाथों की टेंडर प्रक्रिया।
- सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद लिया गया निर्णय।
- 2800 किमी फुटपाथ नेटवर्क को दुरुस्त करने की तैयारी।
वी के शुक्ला, नई दिल्ली। दिल्ली के बदहाल फुटपाथों को लेकर लगातार उठ रहे सवालों और सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) अब अपनी टेंडर प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है।
विभाग फुटपाथों की मरम्मत, रखरखाव और निर्माण के लिए एक माॅडल टेंडर प्रक्रिया तैयार करेगा। इसके लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जो मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा कर नई प्रणाली के संबंध में सुझाव देगी। उसी के आधार पर नई व्यवस्था बनाई जाएगी।
पीडब्ल्यूडी के पास 2800 किलोमीटर लंबा फुटपाथ नेटवर्क
पीडब्ल्यूडी के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजधानी के करीब 2800 किलोमीटर लंबे फुटपाथ नेटवर्क को दुरुस्त करना है। विभाग की सड़कों की कुल लंबाई करीब 1400 किलोमीटर है और दोनों ओर के फुटपाथों को मिलाकर यह नेटवर्क लगभग 2800 किलोमीटर बैठता है।
वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के निर्देश पर हुए आडिट में फुटपाथों की स्थिति बेहद खराब मिली थी। आडिट के अनुसार करीब 84 प्रतिशत फुटपाथ भारतीय सड़क कांग्रेस (आइआरसी) के निर्धारित चौड़ाई मानकों पर खरे नहीं उतरे, जबकि केवल करीब 25 प्रतिशत फुटपाथ ही उपयोग के लायक पाए गए थे।
हर इलाके में फुटपाथ बदहाल
दिल्ली में फुटपाथों की खराब स्थिति की बात करें तो यह किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है। आज भी विभिन्न इलाकों में व्यस्त मुख्य सड़कों, बाजारों, अस्पतालों, मेट्रो स्टेशनों और स्कूलों के आसपास फुटपाथ बदहाल मिल जाएंगे।
दक्षिणी, पूर्वी, पश्चिमी और बाहरी दिल्ली के कई हिस्सों में अतिक्रमण, टूटी टाइलें, बिजली के खंभे, जलभराव और अवैध पार्किंग पैदल यात्रियों की राह रोकती है। सरकार ने पिछले वर्ष प्रमुख सड़कों के करीब 200 किलोमीटर फुटपाथों की मरम्मत और निर्माण की योजना भी घोषित की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या की है टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने हाल के अपने फैसले में सुरक्षित और स्पष्ट रूप से चिह्नित फुटपाथों पर चलने को नागरिकों के अधिकार से जोड़ते हुए कहा है कि सड़क बनाने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी केवल वाहनों के लिए सड़क उपलब्ध कराना नहीं है। पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित और बाधारहित रास्ता उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।
क्या होने जा रही है नई व्यवस्था और क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
नई प्रस्तावित व्यवस्था के तहत फुटपाथों के रखरखाव के लिए प्रत्येक जोन में एक टेंडर जारी करने अथवा पूरे पीडब्ल्यूडी क्षेत्र के लिए एक बड़ा टेंडर जारी करने के विकल्प पर विचार हाे सकता है।
वर्तमान में अलग-अलग अधिशासी अभियंता स्तर पर फुटपाथों के काम के लिए टेंडर जारी होते हैं। हालांकि, विशेषज्ञ पूरे दिल्ली के लिए एक ही टेंडर की व्यवस्था को व्यावहारिक नहीं मानते हैं।
उनका कहना है कि इतने बड़े क्षेत्र में एक एजेंसी की जवाबदेही तय करना कठिन हो सकता है। बेहतर व्यवस्था यह होगी कि टेंडर स्थानीय स्तर पर ही हों, लेकिन निरीक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और समयबद्ध मरम्मत के लिए केंद्रीय निगरानी तंत्र बनाया जाए और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
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