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27 साल पहले मामले में बुजुर्ग ने स्वीकारा अपना जुर्म, अदालत उठने तक की सजा मिली...और हो गया मुक्त - bagpat elderly man confesses 27yearold crime fined 1000

27 साल पहले मामले में बुजुर्ग ने स्वीकारा अपना जुर्म, अदालत उठने तक की सजा मिली...और हो गया मुक्त बागपत में 27 साल पुराने मामले में एक बुजुर्ग ने अपनी वृद्धावस्था और बीमारी का हवाला देते हुए जुर्म कबूल कर लिया। अदालत ने…

Jagran के अनुसार7 जून 2026 को 02:32 pm बजे
27 साल पहले मामले में बुजुर्ग ने स्वीकारा अपना जुर्म, अदालत उठने तक की सजा मिली...और हो गया मुक्त
 - bagpat elderly man confesses 27yearold crime fined 1000

सौजन्य से:- Jagran

27 साल पहले मामले में बुजुर्ग ने स्वीकारा अपना जुर्म, अदालत उठने तक की सजा मिली...और हो गया मुक्त

बागपत में 27 साल पुराने मामले में एक बुजुर्ग ने अपनी वृद्धावस्था और बीमारी का हवाला देते हुए जुर्म कबूल कर लिया। अदालत ने उसे न्यायालय उठने तक की सजा ...और पढ़ें

HighLights

आरोपित बुजुर्ग ने 27 साल पुराना जुर्म स्वीकार किया।

वृद्धावस्था और बीमारी के कारण कबूला अपराध।

अदालत ने उठने तक की सजा, 1000 रुपये जुर्माना।

जागरण संवाददाता, बागपत। करीब 27 साल पहले मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के मामले में आरोपित बुजुर्ग ने वृद्धावस्था और बीमारी का हवाला देते हुए अपना जुर्म स्वीकार किया तथा कम से कम अर्थदंड देने की गुहार लगाई। लंबे समय तक तारीख पर न आने पर कुर्की वारंट जारी हुआ तो बुजुर्ग ने अदालत में आत्मसमर्पण किया।

वहीं, पत्रावली पर सुनवाई कर अदालत ने उसे न्यायालय उठने तक की सजा तथा एक हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। सजा अवधि पूर्ण और अर्थदंड अदा कर बुजुर्ग अपने घर लौट गया। अभियोजन अधिकारी अभिराम गौतम के मुताबिक गांव सरूरपुर कलां निवासी धारा सिंह ने 26 जून 1999 को अपने गांव के ही राजेंद्र समेत तीन व्यक्तियों पर गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए बागपत कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था।

पुलिस ने आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई कर अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। आरोपित राजेंद्र की पत्रावली मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीन्द्रपाल सिंह की अदालत में विचाराधीन थी। आरोपित राजेंद्र लंबे समय से अदालत में पेश नहीं हो रहा था। उसके खिलाफ गैरजमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी हुआ था। फिर मकान का कुर्की नोटिस व कुर्की वारंट अदालत ने जारी कर दिया था।

शनिवार को अदालत में आत्मसमर्पण करते हुए आरोपित राजेंद्र ने कहा कि वह गरीब परिवार से है। बार-बार अदालत आने में असमर्थ है। वृद्धावस्था और बीमारी से पीड़ित है। चलने-फिरने में भी असमर्थ है। बिना किसी तर्क-वितर्क के स्वेच्छा से अपना जुर्म स्वीकार करता है। बताया कि पूर्व में जेल में निरुद्ध रह चुका है।

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अनुरोध है कि कम से कम अर्थदंड की सजा देकर आज ही मुकदमे का निस्तारण कर दिया जाए। वहीं, अदालत ने पत्रावली पर सुनवाई करते हुए राजेंद्र को न्यायालय उठने तक की सजा सुनाई तथा एक हजार रुपये (गाली-गलौज करने पर 300 रुपये और धमकी देने पर 700 रुपये का अर्थदंड) अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड जमा न करने पर 10 दिन का कारावास भुगतना होगा। सजा की अवधि पूर्ण और अर्थदंड अदा करने के बाद बुजुर्ग अपने घर लौट गया।

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