होमअपराधनिर्मोही अखाड़ा का बड़ा आरोप: सुप्रीम कोर्ट ने 2019 के फैसले का पालन नहीं किया, ट्रस्ट में हो रहा भ्रष्टाचार
अपराध

निर्मोही अखाड़ा का बड़ा आरोप: सुप्रीम कोर्ट ने 2019 के फैसले का पालन नहीं किया, ट्रस्ट में हो रहा भ्रष्टाचार

निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन और कामकाज के मामले में 2019 के फैसले का पालन नहीं किया गया है. अखाड़े का कहना है कि ट्रस्ट को सार्वजनिक ट्रस्ट बनाया जाए और उसके कामकाज की जांच हो.

18 जुलाई 2026 को 04:14 pm बजे
निर्मोही अखाड़ा का बड़ा आरोप: सुप्रीम कोर्ट ने 2019 के फैसले का पालन नहीं किया, ट्रस्ट में हो रहा भ्रष्टाचार

सौजन्य से:- AajTak

Sign In

Advertisement

X

राम मंदिर ट्रस्ट के गठन, उसके कामकाज और वित्तीय लेन-देन को लेकर एक बार फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है. निर्मोही अखाड़े ने याचिका दाखिल कर कहा है कि 2019 के ऐतिहासिक फैसले को करीब सात साल बाद भी उसकी मूल भावना के मुताबिक लागू नहीं किया गया. अखाड़े का आरोप है कि केंद्र सरकार ने अदालत के फैसले का पूरी तरह पालन नहीं किया, जिसकी वजह से आज यह स्थिति बनी है.

याचिका में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यशैली और गठन पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. निर्मोही अखाड़े का कहना है कि सार्वजनिक ट्रस्ट की जगह इसे एक निजी ट्रस्ट की तरह बना दिया गया है. इसके साथ आशंका जताई गई है कि ट्रस्ट के कुछ सदस्य भ्रष्टाचार में शामिल हो सकते हैं. इन तमाम तरह के विवादों से इस पवित्र स्थल की गरिमा और छवि को काफी नुकसान पहुंचा है.

ट्रस्ट को लेकर क्या मांगें उठीं?

निर्मोही अखाड़े ने दलील दी है कि किसी भी मंदिर की व्यवस्था शेबैत यानी पारंपरिक सेवादार के बिना पूरी नहीं मानी जा सकती. याचिका के मुताबिक मौजूदा ट्रस्ट में ऐसे लोगों को शामिल कर लिया गया है, जिनका श्रीराम जन्मभूमि से कोई ऐतिहासिक, धार्मिक या कानूनी संबंध नहीं है. इसी वजह से अखाड़े ने मांग की है कि पूरे ट्रस्ट का पुनर्गठन कर उसे सार्वजनिक ट्रस्ट बनाया जाए, जिसमें उन्हें उचित भूमिका मिले.

Advertisement

बात सिर्फ मैनेजमेंट तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पैसों के हिसाब-किताब को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया है. याचिका में ट्रस्ट के सभी वित्तीय लेन-देन का एक निष्पक्ष फॉरेंसिक ऑडिट कराने की अपील की गई है. इसके साथ ही 2019 के फैसले के पालन की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाने की बात कही गई है, ताकि ट्रस्टियों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय हो सकें.

धार्मिक रीति-रिवाजों को लेकर भी अखाड़े ने अपनी बात मजबूती से रखी है. उनका कहना है कि रामलला की पूजा, सेवा और भोग पूरी तरह से रामानंदी संप्रदाय की परंपरा के अनुसार ही कराए जाएं. इसके अलावा परिसर में श्रीराम लला विराजमान की मूल प्रतिमाओं को फिर से स्थापित करने की मांग भी की गई है. अब इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम पर सबकी नजर टिकी है.

---- समाप्त ----

TOPICS:

Latest News in Hindi »

Advertisement

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, गाली-गलौज अश्लीलता नहीं!
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, गाली-गलौज अश्लीलता नहीं!

निर्मोही अखाड़े ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका
अपराध

निर्मोही अखाड़े ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका

राम मंदिर विवाद: निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट से की ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग
अपराध

राम मंदिर विवाद: निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट से की ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग

सुप्रीम कोर्ट ने तय किया कि केवल गाली-गलौज ही नहीं अश्लीलता है!
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने तय किया कि केवल गाली-गलौज ही नहीं अश्लीलता है!

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: गुस्से में दी गई गाली से नहीं बनता अश्लीलता का मामला
अपराध

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: गुस्से में दी गई गाली से नहीं बनता अश्लीलता का मामला

9 साल तक जेल में किशोर हत्या के आरोपी को जमानत
अपराध

9 साल तक जेल में किशोर हत्या के आरोपी को जमानत

9 साल से जेल में बंद हत्या के आरोपी को जमानत
अपराध

9 साल से जेल में बंद हत्या के आरोपी को जमानत

कानून उल्लंघन के बढ़ते दायरे का सामना कर रहे हैं हाई स्कूल और विश्वविद्यालय के छात्र
अपराध

कानून उल्लंघन के बढ़ते दायरे का सामना कर रहे हैं हाई स्कूल और विश्वविद्यालय के छात्र

ताज़ा ख़बरें