नंदीशाला में बदसलूकी पर कोर्ट ने नगर परिषद को नोटिस, दोषियों को मांगा जवाब
प्रतापगढ़ में नंदीशाला में गोवंशों की देखभाल के लिए स्थानीय शहरी परिषद के प्रशासक को नोटिस दिया गया है। यह कार्रवाई एक शपथ पत्र पर आधारित है जिसमें कहा गया है कि दानदाताओं की ओर से मिलने वाले खाद्य पदार्थों का उचित उपयोग नहीं हो रहा है और संक्रामक बीमारियों के कारण हर दिन 2-3 गोवंश मारे जा रहे हैं।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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नंदीशाला की बदहाली : लोक अदालत ने नगर परिषद प्रशासक को दिया नोटिस, रोज 2-3 मौत होने का दावा
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शहर की नंदीशाला में चारे की कमी और व्यवस्थाओं में लापरवाही के मामले में स्थायी लोक अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने नगर परिषद के प्रशासक एवं अपर कलेक्टर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई 2026 को होगी। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष बुद्धि प्रकाश छंगाणी, सदस्य रमेशचंद्र शर्मा और राम कंवर मीणा ने मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए।
राष्ट्रीय गौ रक्षा हिंदू दल के प्रदेश सचिव गोपाल मोदी, जिला अध्यक्ष विष्णु कुमावत और पशु क्रूरता निवारण समिति के पूर्व सदस्य सचिन पटवा ने अधिवक्ता लोकेश लोहार के माध्यम से स्थायी लोक अदालत में शपथ-पत्र प्रस्तुत किया था। अदालत ने अधिवक्ता लोकेश लोहार को पक्षकार बनाए जाने के आवेदन को स्वीकार करते हुए नगर परिषद प्रशासक को प्रतिपक्ष बनाने के आदेश दिए। चारा भंडारण और सड़क पर घूमते गोवंश का मुद्दा : याचिका में नंदीशाला में छह महीने के चारे के भंडारण के लिए गोदाम नहीं होने, दानदाताओं से मिलने वाली सामग्री के उचित उपयोग नहीं होने और फर्जी बिलों के जरिए राशि हड़पने के आरोप भी लगाए गए हैं। शहर में करीब 150 बेसहारा गोवंश के सड़कों पर भटकने से दुर्घटनाओं की स्थिति और आमजन के घायल होने की बात भी अदालत के सामने रखी।
मामले में स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति के बजाय निजी व्यक्तियों को ठेका देने से व्यवस्था बिगड़ने का आरोप लगाया गया है। 30 जुलाई को नगर परिषद प्रशासन को अपना पक्ष रखना होगा। याचिका में आरोप लगाया गया कि नंदीशाला में करीब 300 गोवंश हैं, लेकिन उनकी संख्या, देखरेख और मृत्यु से संबंधित रिकॉर्ड का सही तरीके से संधारण नहीं किया जा रहा है। शपथ-पत्र में बताया गया कि कच्चे फर्श और कीचड़ के कारण बारिश के मौसम में गोवंश संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। पर्याप्त शेड और पौष्टिक आहार की व्यवस्था नहीं होने से प्रतिदिन 2 से 3 गोवंश की मौत होने का आरोप लगाया गया है।
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