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जेपीएससी 14वीं सिविल सेवा पीटी गड़बड़ी मामले में सुप्रीम सुनवाई:सीबीआई जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का सरकार और जेपीएससी को नोटिस
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सु्प्रीम कोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने दायर की है यह याचिका
झारखंड लोकसेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं सिविल सेवा पीटी की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मामले में झारखंड सरकार और जेपीएससी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने दायर की है।
याचिकाकर्ता के वकील मनन कुमार मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में छात्र एक महीने से अधिक समय से आंदोलन कर रहे हैं। राज्य सरकार ने परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया था। लेकिन परीक्षा रद्द करने से गड़बड़ी का खुलासा नहीं हो सकता। इसलिए पूरे मामले की जांच सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर कराई जाए। इस पर चीफ जस्टिस ने स्पष्ट किया कि किसी रिटायर्ड जस्टिस को इस तरह जांच करने के लिए नहीं कहा जा सकता। उन्होंने पूछा कि क्या न्यायिक सेवा की भर्ती परीक्षाएं भी राज्य लोकसेवा आयोग के माध्यम से होती है?
इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने हां में जवाब दिया। कोर्ट ने जेपीएससी के माध्यम से होने वाली अन्य महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया की भी जानकारी ली। इसके बाद झारखंड सरकार और जेपीएससी को नोटिस जारी किया। मालूम हो कि अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से याचिका दाखिल की गई है।
कोर्ट ने झारखंड सरकार व जेपीएससी से मांगा जवाब, ओएमआर से सर्वर लॉग तक सुरक्षित रखने की मांग रखी
याचिका में जांच के दौरान परीक्षा से जुड़े सभी भौतिक और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का भी अनुरोध किया गया है। इनमें मूल ओएमआर शीट, अभ्यर्थियों के पास मौजूद ओएमआर की कार्बन कॉपी, परीक्षा केंद्रों का सीसीटीवी फुटेज और सर्वर के ऑडिट लॉग शामिल हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन साक्ष्यों को सुरक्षित रखना जरूरी है, ताकि जांच के दौरान किसी तरह की छेड़छाड़ या सबूतों के नष्ट होने की आशंका न रहे। याचिका में राज्य सरकार के अलावा जेपीएससी और परीक्षा से जुड़ी एजेंसियों के खिलाफ भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
परीक्षा रद्द होने से गड़बड़ी का खुलासा नहीं हो सकता
राज्य सरकार ने परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया था। लेकिन परीक्षा रद्द करने से गड़बड़ी का खुलासा नहीं हो सकता। इसलिए सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर जांच कराई जाए। याचिका में कहा गया है कि परीक्षा रद्द कर देने मात्र से कथित “व्यवस्थित भ्रष्टाचार” की जांच की जरूरत खत्म नहीं हो जाती। परीक्षा में अनियमितता की वास्तविक प्रकृति और इसके पीछे जिम्मेदार अधिकारियों व परीक्षा एजेंसियों की भूमिका का पता लगाने के लिए स्वतंत्र जांच बेहद जरूरी है।
आगे क्या, सीआईडी जांच में मिले तथ्य कोर्ट को सौंपने होंगे
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब झारखंड सरकार और जेपीएससी को शीर्ष अदालत में अपना पक्ष रखना होगा। आगे की सुनवाई में अदालत यह तय कर सकती है कि मौजूदा जांच पर्याप्त है या मामले को सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने की जरूरत है। इस मामले में ओएमआर, सीसीटीवी और डिजिटल सर्वर रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना जांच का सबसे महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
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