11 साल बाद 43 सहायक शिक्षकों को मिला न्याय, विद्यालयों में पदस्थापना के आदेश
बिलासपुर में 43 सहायक शिक्षकों को 11 साल के कानूनी संघर्ष के बाद न्याय मिला है. उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए नगर पालिक निगम, रायपुर ने सभी शिक्षकों की सेवा बहाल की है और उन्हें विभिन्न सरकारी विद्यालयों में पदस्थापित किया है.

सौजन्य से:- ETV Bharat
11 साल बाद 43 सहायक शिक्षकों को मिला न्याय, हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक फैसला बरकरार
सभी शिक्षकों की सेवा बहाल कर विभिन्न शासकीय विद्यालयों में पदस्थापना के आदेश जारी कर दिए हैं.
By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : August 7, 2026 at 10:59 AM IST
बिलासपुर: करीब 11 वर्षों तक चले कानूनी संघर्ष के बाद 43 सहायक शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है. नगर पालिक निगम रायपुर ने 4 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेशों का पालन करते हुए सभी शिक्षकों की सेवा बहाल कर विभिन्न शासकीय विद्यालयों में पदस्थापना के आदेश जारी कर दिए हैं.
मामला वर्ष 2013 की सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़ा है. चयन प्रक्रिया के बाद 43 अभ्यर्थियों ने 15 अक्टूबर 2014 को कार्यभार ग्रहण किया था, लेकिन मात्र 45 दिन बाद 29 नवंबर 2014 को उनकी नियुक्तियां बिना निर्धारित प्रक्रिया अपनाए निरस्त कर दी गई थीं. इसके खिलाफ शिक्षकों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया.
नियुक्ति निरस्तीकरण आदेश को चुनौती देते हुए गवेंद्र साहू, घनश्याम साहू, पुरुषोत्तम यादव, कृष्ण कुमार सिंगरोल एवं 39 अन्य बनाम छत्तीसगढ़ राज्य एवं अन्य प्रकरण में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रूपेश साहू ने हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट और अवमानना याचिका तक सभी चरणों में प्रतिनिधित्व किया. 16 अप्रैल 2019 को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने नियुक्ति निरस्तीकरण को मनमाना, भेदभावपूर्ण और संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन बताते हुए रद्द कर दिया. अदालत ने सेवा की निरंतरता, वरिष्ठता, नोटेशनल लाभ सहित अन्य सेवा लाभ देने के निर्देश दिए, हालांकि 'नो वर्क, नो पे' के सिद्धांत के तहत बकाया वेतन नहीं दिया गया.
इस निर्णय के खिलाफ उक्त निर्णय के विरुद्ध राज्य शासन द्वारा State of Chhattisgarh & Others Vs. Gavendra Sahu, Ghanshyam Sahu, Purshottam Yadav, Krishna Kumar Singrol & 39 Others प्रकरण में अपील प्रस्तुत की गई, जिसे छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 02 मार्च 2022 को निरस्त करते हुए एकलपीठ के निर्णय की पूर्ण पुष्टि की.
राज्य शासन की अपील को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 2 मार्च 2022 को खारिज कर दिया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल 2025 को विशेष अनुमति याचिका भी निरस्त कर हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया. फलस्वरूप याचिकाकर्ताओं के पक्ष में पारित निर्णय अंतिम एवं बाध्यकारी हो गया.
सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय के बावजूद लंबे समय तक आदेशों का पालन नहीं किए जाने पर याचिकाकर्ताओं द्वारा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के समक्ष अवमानना याचिका प्रस्तुत की गई. अवमानना कार्यवाही के दौरान प्रशासन द्वारा आवश्यक कार्रवाई करते हुए नगर पालिक निगम, रायपुर ने 04 अगस्त 2026 को सभी 43 सहायक शिक्षकों की सेवा बहाल करते हुए विभिन्न शासकीय विद्यालयों में उनकी पदस्थापना के आदेश जारी किए और न्यायालय के निर्देशानुसार सेवा की निरंतरता, वरिष्ठता, Notional Benefits एवं अन्य समस्त परिणामी सेवा लाभ प्रदान करना सुनिश्चित किया.इसके बाद 6 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका का निस्तारण कर दिया.
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