ट्रंप के हस्ताक्षर से 100% टैरिफ पर भारत पर पड़ेगा बड़ा असर
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ 2026’ पर आज हस्ताक्षर कर सकते हैं, जिससे रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लग सकता है, जिसमें भारत भी शामिल है। बिल को सीनेट और प्रतिनिधि सभा में पारित किया गया है और अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिये भेजा गया है। भारत ने इस कानून पर कड़ा ऐतराज जताया है, चेतावनी देते हुए कि इससे भारत‑अमेरिका संबंधों पर असर पड़ सकता है।

सौजन्य से:- livehindustan.com
100 फीसदी टैरिफ वाले कानून पर ट्रंप लगाएंगे मुहर? भारत के ऊपर पड़ेगा बड़ा असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ 2026’ पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इस बात की पुष्टि वाइट हाउस के एक अधिकारी ने की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ 2026’ पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इस बात की पुष्टि वाइट हाउस के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएनआई से की। बता दें कि अगर ऐसा होता है तो रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी 100 परसेंट टैरिफ लगाएगा। इन देशों में भारत का भी नाम शामिल है। कानून का मसौदा हाल ही में अमेरिकी सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद प्रतिनिधि सभा में 262-159 के वोट से पारित हो गया। इसमें रूस की शैडो फ्लीट से जुड़ी नौकाओं के खिलाफ कदम भी शामिल हैं। अमेरिकी सरकार के अनुसार, इन जहाजों ने रूस को पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद ऊर्जा निर्यात जारी रखने में मदद की है। गौरतलब है कि भारत और चीन रूस से कच्चे तेलों के दो बड़े खरीदार हैं।
‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ 2026’ को 16 सितंबर को हाउस में 262-159 वोटों से पास किया गया और अब इसे ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है। सीनेट पहले ही 86-11 वोटों से इस कानून को मंज़ूरी दे चुकी है। यह कानून खुद भारतीय सामानों पर 100 प्रतिशत टैरिफ नहीं लगाता है। इसके बजाय, यह राष्ट्रपति को रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदारों या मॉस्को को प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों पर ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। हाउस में हुए वोट में 203 रिपब्लिकन, 58 डेमोक्रेट और एक निर्दलीय सदस्य ने बिल का समर्थन किया, जबकि सात रिपब्लिकन और 152 डेमोक्रेट ने इसके खिलाफ वोट दिया। इस बिल के तहत, उन देशों को छूट मिल सकती है जो रूस के प्राकृतिक गैस निर्यात का 15 प्रतिशत से कम आयात करते हैं।
क्या है भारत का रुख
भारत ने इस बिल को लेकर कड़ा ऐतराज जताया है। उसने कहा कि अगर इसे अमल में लाया जाता है तो भारत और अमेरिका के संबंधों पर असर पड़ सकता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की बेहतरी के लिए कोई भी कदम उठा सकता है। यह भी कहा गया है कि भारत ने इस कानून को बारीकी से समझा है। इसे सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के संदर्भ में भी समझा गया है।
वहीं, चीन ने भी चीन ने रूसी तेल और गैस की खरीद पर शुल्क लगाने संबंधी अमेरिकी क्षेत्राधिकार को खारिज किया है। उसने कहा कि किसी भी देश के साथ उसके सामान्य व्यापार और आर्थिक सहयोग में तीसरे पक्ष का दखल या दबाव नहीं होना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन ऐसी किसी भी कार्रवाई का विरोध करता है, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी न मिली हो। गुओ ने कहा कि चीन समानता और पारस्परिक लाभ के आधार पर दूसरे देशों के साथ सामान्य आर्थिक और व्यापारिक सहयोग करता है।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
जेएमएम ने एमएमडीआर कानून विरोधी प्रदर्शनी की तैयारी तेज की

मुजफ्फरपुर में लोक अदालत में ट्रांसपोर्ट व ट्रैफिक चालानों से 1.09 करोड़ की वसूली

देहरादून में 29 सितंबर को डाक विभाग की मासिक डाक अदालत आयोजित

भारत ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बांग्लादेश के PM को आमंत्रित किया, पर वे अनुपस्थित रहे

UPI शुल्क नीति में उलटफेर: सरकार की नई दिशा पर सवाल

UPI लेन‑देन पर शुल्क लगने की चर्चा, सरकार के बयानों में उलटफेर

UPI लेन‑देन पर शुल्क का प्रस्ताव, सरकार की नीति में उलटफेर पर सवाल

UPI भुगतान में शुल्क के प्रस्ताव पर सरकार का उलटा रुख: एक साल में MDR को समर्थन
ताज़ा ख़बरें
- UPI पे शुल्क की योजना पर सरकार का दोहरा रवैया: एक साल पहले खंडन, अब समर्थन
- UPI लेन‑देन पर शुल्क विवाद: सरकार की नीति में अचानक बदलाव
- UPI पर चार्ज लगाने पर सरकार की बदलती पॉलिसी: पहले उलट, अब MDR पक्ष में
- UPI पर चार्ज लगाने का विवाद: सरकार की बदलती नीति
- UPI पर चार्ज लगाने पर सरकार का नया रुख: MDR को स्वीकारते हुए
- UPI भुगतान पर शुल्क तय: सरकार की नीति में उलटफेर पर सवाल
- केन्द्रीय सरकार से टेट कानून पर त्वरित अध्यादेश का आवाहन: फौगाट
- ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के 'फुटबॉल खिलाड़ी' प्रतीक को असंवैधानिक कहा, सुप्रीम कोर्ट में अपनी मूल पहचान की वकालत

