सुप्रीम कोर्ट ने बच्चा तुरंत गोद लेने वाले अभिभावकों को सौंपने का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के कस्टडी निर्णय को निरस्त कर हैदराबाद की चाइल्ड वेलफ़ेयर कमेटी को आदेश दिया कि नाबालिग को उसके गोद लेने वाले पति‑पत्नी को तुरंत सुपुर्द किया जाए। अदालत ने प्रशासनिक देरी और तकनीकी अड़चनें खारिज कर बच्चे के अधिकारों को सर्वोपरि माना, यह देखते हुए कि जैविक माँ ने आर्थिक कारणों से बच्चा छोड़ा था, न कि उसे बेचा गया।

सौजन्य से:- Jagran
'बच्चे के अधिकार सर्वोपरि', सुप्रीम कोर्ट ने गोद लेने वाले माता-पिता को बच्चा तुरंत सौंपने दिया आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक नाबालिग की कस्टडी पर तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश रद कर दिया और हैदराबाद ...और पढ़ें
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासनिक देरी और तकनीकी अड़चनों को किया खारिज
- सुप्रीम कोर्ट ने दिया गोद लेने वाले माता-पिता को बच्चा सौंपने का आदेश
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक नाबालिग की कस्टडी पर तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश रद कर दिया और हैदराबाद की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को बच्चा उसे गोद लेने वाले माता-पिता होने का दावा करने वाले पति-पत्नी को सौंपने का निर्देश दिया।
जस्टिस एमएम सुंद्रेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने यह आदेश तेलंगाना हाई कोर्ट के 12 जून, 2025 के आदेश के विरुद्ध मोहम्मद अकबर और अन्य की अपील को स्वीकार करते हुए दिया।
यह मामला तब सामने आया जब बच्चे को इस शक के आधार पर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने कस्टडी में ले लिया था कि उसकी जैविक मां ने उसे पहले दो अपीलकर्ता को बेच दिया था।
शीर्ष अदालत ने कहा कि बच्चे को उसकी जैविक मां ने इसलिए गोद दिया था क्योंकि वह पैसे की तंगी की वजह से उसकी देखभाल नहीं कर पा रही थी।
इससे यह अपने आप नहीं माना जा सकता कि बच्चे को बेचा गया था। साथ ही यह ऐसा मामला नहीं है जहां पहले दो अपीलकर्ताओं ने बच्चे की ठीक से देखभाल नहीं की।
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