10 साल पुरानी डीजल गाड़ी के लिए नहीं मिला PUC सर्टिफिकेट, मालिक ने सुप्रीम कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई।
दिल्ली-एनसीआर में 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों को पॉल्यूशन सर्टिफिकेट नहीं मिल रहा, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने उम्र के आधार पर कार्रवाई न करने का आदेश दिया था। एक लग्जरी वॉल्वो कार के मालिक ने सुप्रीम कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई कि अधिकारी उनकी 10 साल पुरानी डीजल गाड़ी के लिए PUC सर्टिफिकेट नहीं मिल रहा है।

सौजन्य से:- Jagran
10 साल पुरानी डीजल कार को नहीं मिला PUC सर्टिफिकेट, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा वाहन मालिक
दिल्ली-एनसीआर में 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों को PUC सर्टिफिकेट नहीं मिल रहा, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने उम्र के आधार पर कार्रवाई न करने का आदेश दिया था। ...और पढ़ें
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों पर बैन लगाने के बादजूद दिल्ली-एनसीआर में अधिकारियों द्वारा पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (PUC) जारी करने से मना करने का मामला सामने आया है।
दरअसल, एक लग्जरी वॉल्वो कार के मालिक ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई कि अधिकारी उनकी 10 साल पुरानी डीजल गाड़ी के लिए PUC सर्टिफिकेट जारी करने से मना कर रहे हैं।
कार मालिक ने क्या कहा?
कार मालिक ने शिकायत में कहा कि उनकी 10 साल पुरानी डीजल गाड़ी एमिशन टेस्ट में पास होने के बावजूद सॉफ्टवेयर में बैन की वजह से पीयूसी नहीं हासिल कर पा रही है, जिससे उसे ईंधन (फ्यूल) भी नहीं मिल पा रहा है।
जबकि कोर्ट ने 17 दिसंबर को आदेश दिया था कि सिर्फ उम्र के आधार पर 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के खिलाफ़ कोई सख्त कार्रवाई न की जाए।
सीनियर वकील राकेश खन्ना ने CJI सूर्यकांत की बेंच को बताया कि याचिकाकर्ता की वोल्वो XC-60 जैसी महंगी गाड़ियों की उम्र लंबी होती है और इन गाड़ियों को स्क्रैप करने पर मालिकों को बहुत ज्यादा खर्च उठाना पड़ेगा।
कार मालिक को क्या बताया गया?
खन्ना ने कहा कि उनके क्लाइंट को बताया गया कि PUCC सेंटर्स के सॉफ्टवेयर सिस्टम और उनके काम करने के निर्देश ऐसी गाड़ी को PUC सर्टिफिकेट जारी करने की इजाजत नहीं देते जो तय उम्र सीमा पार कर चुकी हो, भले ही गाड़ी एमिशन टेस्ट पास कर ले।
PUC सर्टिफिकेट न मिलने की वजह से वह अपनी कार के लिए ईंधन नहीं खरीद पा रहे हैं, जिससे गाड़ी चल नहीं पा रही है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
गौरतलब है कि पिछले साल 25 जुलाई को दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार या एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन को निर्देश देने का अनुरोध किया था कि वे "NCR में सभी कैटेगरी की 15 साल या उससे अधिक पुरानी पेट्रोल और 10 साल या उससे अधिक पुरानी डीजल गाड़ियों के चलने पर पूरी तरह से लगी रोक को जारी रखने की जरूरत पर एक उपयुक्त, व्यापक और वैज्ञानिक स्टडी करें। यह रोक सुप्रीम कोर्ट ने 10 अक्टूबर 2018 के अपने आदेश से लगाई थी।"
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17 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपने संशोधित आदेशों में स्पष्ट किया था कि बीएस-IV और उससे नए उत्सर्जन मानकों वाले 10 साल पुराने डीजल, 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के खिलाफ कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी। यानी ऐसे वाहनों को सड़क पर चलने से नहीं रोका जाएगा।
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