जैसलमेर में 10 अक्टूबर को लोक अदालत, विवाद निपटारे के लिए व्यापक योजना
राष्ट्रीय तथा राजस्थान विधिक सेवा प्राधिकरणों के निर्देश पर जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव द्वारा आयोजित बैठक में स्थायी लोक अदालत और 10 अक्टूबर को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की कार्ययोजना तैयार की गई। नगर परिषद, शिक्षा, विद्युत, डाक आदि विभागों के प्रतिनिधियों ने सहयोग की पुष्टि की और आमजन से प्री‑लिटिगेशन मामलों की 1 अक्टूबर तक दाखिला देने की अपील की गई।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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विवादों के निपटारे को लेकर बैठक 10 अक्टूबर को लगेगी लोक अदालत
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राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशानुसार एडीआर सेंटर जैसलमेर में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई।
जिला एवं सेशन न्यायाधीश तथा अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जैसलमेर ओमी पुरोहित के निर्देशन में यह बैठक प्राधिकरण के सचिव ललित पुरोहित की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में आमजन की सेवार्थ संचालित स्थाई लोक अदालत तथा 10 अक्टूबर को आयोजित होने वाली वर्ष की तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक प्रकरणों के निस्तारण की कार्ययोजना बनाना रहा। इसमें नगर परिषद, शिक्षा विभाग, विद्युत विभाग, रसद विभाग, डाकघर, बीएसएनएल, जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग तथा विभिन्न बैंकों के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में उपस्थित सभी अधिकारियों ने लोक अदालत को सफल बनाने और अधिक से अधिक प्रकरणों के निस्तारण में पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया।
सचिव ललित पुरोहित ने अधिवक्ताओं, पक्षकारों और आमजन से अपील की कि वे इस सुलभ न्याय प्रणाली का लाभ उठाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राधिकरण में प्री-लिटिगेशन स्तर के मामलों को दर्ज कराने की अंतिम तिथि 1 अक्टूबर निर्धारित की गई है। अंत में सभी का आभार जताया गया। सचिव ललित पुरोहित ने बताया कि स्थाई लोक अदालत एक नियमित न्यायिक संस्था है, जिसकी स्थापना विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 22-बी के तहत की गई है।
यह मुख्य रूप से बिजली, पानी, अस्पताल, परिवहन, डाक, टेलीफोन, बीमा, आवास और बैंकिंग जैसी अनिवार्य जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों का अदालत में जाने से पहले (प्री-लिटिगेशन स्तर पर) त्वरित निपटारा करती है। पीठ पहले दोनों पक्षों में सुलह का प्रयास करती है। समझौता न होने पर गुण-दोष के आधार पर अंतिम फैसला सुनाती है, जो सभी पक्षों पर अनिवार्य रूप से बाध्यकारी होता है और इसके खिलाफ कोई अपील नहीं होती। सचिव ने बताया कि 10 अक्टूबर को लगने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत सौहार्दपूर्ण और आपसी सहमति पर आधारित मंच है। इसमें अदालतों में लंबित शमनीय दीवानी व आपराधिक मुकदमों के साथ प्री-लिटिगेशन मामलों का निस्तारण होता है। यह व्यवस्था पूरी तरह निशुल्क है। इसमें कोई अदालती शुल्क नहीं लगता।
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