सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई फिल्म सिटी में पेड़ कटाई के लिये महाराष्ट्र सरकार से उत्तर माँगा
सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के फिल्म सिटी में प्रस्तावित रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान के निर्माण हेतु पेड़ों की कटाई व पुनर्स्थापन की अनुमति संबंधी याचिका पर महाराष्ट्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब देने को कहा है। कोर्ट ने इस योजना को अत्यधिक राष्ट्रीय महत्व की बताया, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना है कि सभी कानूनी एवं पर्यावरणीय मंजूरी उपलब्ध है और यह आरे वन क्षेत्र में नहीं पड़ती।

सौजन्य से:- livehindustan.com
पेड़ काटने संबंधी याचिका पर अदालत ने मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई की फिल्म सिटी में प्रस्तावित रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान के लिए पेड़ों की कटाई की अनुमति के लिए महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने इस परियोजना को ‘अत्यंत राष्ट्रीय महत्व’ की बताया है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि सभी वैधानिक अनुमतियाँ प्राप्त की गई हैं और यह आरे वन क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आती।
सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई की फिल्म सिटी में प्रस्तावित रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान के निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई और प्रतिरोपण की अनुमति के अनुरोध वाली याचिका पर बुधवार को महाराष्ट्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब मांगा। अदालत ने इस परियोजना को ‘अत्यंत राष्ट्रीय महत्व’ की परियोजना बताया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (सीजेआई), न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता ने बताया कि प्रस्तावित निर्माण के लिए परियोजना प्रस्तावक ने सभी वैधानिक अनुमतियां और पर्यावरण मंजूरी हासिल कर ली है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने यह भी कहा कि परियोजना आरे वन क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आती और फिल्म सिटी के भीतर स्थित है।
उन्होंने कहा कि हालांकि, 10 जनवरी, 2025 के अदालत के आदेश को देखते हुए अत्यधिक सावधानी बरतते हुए परियोजना प्रस्तावक ने शीर्ष अदालत से अनुमति लेने के लिए उसका रुख किया है। दस जनवरी, 2025 को न्यायमूर्ति ए. एस. ओका (अब सेवानिवृत्त हो चुके) की अध्यक्षता वाली पीठ ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के वृक्ष प्राधिकरण को निर्देश दिया था कि उसकी अनुमति के बिना मुंबई की आरे कॉलोनी में आगे पेड़ों की कटाई की अनुमति न दी जाए।
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