सुप्रीम कोर्ट में 2,000 रुपये से अधिक यूपीआई लेन‑देन पर शुल्क को चुनौती
वकील अंजन दत्ता ने केंद्र सरकार, RBI, NPCI और यूपीआई स्टियरींग कमेटी के खिलाफ नई मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने की नोटिफ़िकेशन को रद्द करने की याचिका दायर की। यह याचिका इस बात पर जड़ देती है कि 2,000 रुपये से ऊपर के वाणिज्यिक यूपीआई लेन‑देन पर 0.4% शुल्क अंततः ग्राहकों पर बोझ बन सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक इस याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया है।

सौजन्य से:- etvbharat.com
UPI भुगतान पर शुल्क के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
केंद्र सरकार के नए यूपीआई फ्रेमवर्क लागू किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई.
By Sumit Saxena
Published : September 16, 2026 at 7:44 PM IST
नई दिल्ली : केंद्र सरकार के 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (MDR) लागू करने के लगाने की घोषणा को सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को चुनौती दी गई है. साथ ही केंद्र सरकार द्वारा 14 और 15 सितंबर को जारी उन गैज़ेट नोटिफ़िकेशन को रद्द करने की मांग की गई है जिनमें यह घोषणा की गई थी.
यह याचिका वकील अंजन दत्ता ने दायर की थी. याचिकाकर्ता ने इन नोटिफिकेशन्स को इस आधार पर चुनौती दी कि नए लागू किए गए शुल्क का असर आखिरकार आम नागरिकों पर ही पड़ेगा. याचिका में प्रतिवादी केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और यूपीआई और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी हैं.
याचिका में चेतावनी दी गई है कि कमर्शियल यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने से ग्राहकों पर बोझ पड़ सकता है, क्योंकि व्यापारी इस लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं.
इस बीच, केंद्र सरकार ने ज़्यादा कीमत वाले कमर्शियल यूपीआई पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ़ीस लगाने की इजाजत देने वाली एक रूपरेखा पेश की है, जबकि व्यक्तिगत और छोटे व्यापारियों के ट्रांजैक्शन को फ़्री रखा है.
यह कदम 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' में किए गए संशोधनों और सितंबर 2026 में वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के बाद उठाया गया है.सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, याचिका को अभी किसी पीठ के सामने सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाना बाकी है.
लगभग छह साल तक पूरी तरह से मुफ़्त यूपीआई पेमेंट की सुविधा के बाद, सरकार ने मंगलवार को घोषणा की कि 15 अक्टूबर से मर्चेंट को इस प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए 2,000 रुपये से ज़्यादा के ट्रांसफ़र पर 0.4 प्रतिशत फीस लगेगी. साथ ही, आम लोगों के बीच होने वाले रोजमर्रा के लेन-देन और छोटे पेमेंट को किसी भी तरह के चार्ज से पूरी तरह अलग रखा गया.
ये भी पढ़ें- 'यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लगने वाले चार्ज का विरोध', सरकार बोली- वापस लेने का कोई सवाल नहीं
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