सुप्रीम कोर्ट ने टेंडर कमीशन घोटाले में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को राहत नहीं दी
सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने आलमगीर आलम की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी और झारखंड हाई कोर्ट के डिस्चार्ज याचिका को खारिज करने वाले आदेश को बरकरार रखा। एडी के हवाले से आयोग राशि का बड़ा हिस्सा सीधे मंत्री तक पहुँचता था, जबकि अदालत ने कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य न मिलने को कारण बताया। इस कारण न्यायालय ने उनके विरुद्ध लगे गंभीर आरोपों को स्वीकार कर राहत प्रदान नहीं की।

सौजन्य से:- Jagran
Tender Commission Scam: नहीं मिली पूर्व मंत्री आलमगीर को राहत, शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश को सही ठहराया
टेंडर कमीशन घोटाले मामले में जेल में बंद झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है।
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को राहत देने से इनकार किया।
- ईडी ने टेंडर कमीशन घोटाले में आलमगीर आलम पर गंभीर आरोप लगाए।
राज्य ब्यूरो, रांची। टेंडर आवंटन के बाद हुए करोड़ों रुपये के कमीशन घोटाला मामले में जेल में बंद झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एस नागू की खंडपीठ ने आलमगीर आलम की ओर से दाखिल विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया।
शीर्ष अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि वह झारखंड हाई कोर्ट के पूर्व के आदेश में हस्तक्षेप करने की इच्छुक नहीं है।
उल्लेखनीय है कि झारखंड हाई कोर्ट ने बीती छह मई को आलमगीर आलम की डिस्चार्ज याचिका खारिज करने के निचली अदालत के आदेश को सही ठहराया था।
हाई कोर्ट के इसी फैसले को चुनौती देते हुए पूर्व मंत्री की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान पूर्व मंत्री के वकील ने तर्क दिया था।
इस मामले में उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य या आरोप नहीं हैं और न ही उनके पास से कोई नकदी बरामद हुई थी। ऐसे में उन्हें मामले से मुक्त किया जाना चाहिए।
वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए अदालत को बताया कि टेंडर आवंटन के बाद मिलने वाले कमीशन की राशि का एक बड़ा हिस्सा सीधे पूर्व मंत्री तक पहुंचता था।
ईडी के अनुसार, आलमगीर आलम के पीएस संजीव लाल के ठिकाने से बरामद डायरी में इस बात का स्पष्ट लेखा-जोखा दर्ज है कि मंत्री को कमीशन का पैसा दिया जाता था।
इन तथ्यों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं और याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट में UPI लेन‑देन पर MDR नियम को चुनौती, 0.4% शुल्क को रद्द या स्थगित की माँग

सुप्रीम कोर्ट में 2,000 रुपये से अधिक यूपीआई लेन‑देन पर शुल्क को चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आर्टिकल 220 पूर्व हाईकोर्ट जजों को बार काउंसिल की महिला सदस्यता से नहीं रोकता

सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई फिल्म सिटी में पेड़ कटाई के लिये महाराष्ट्र सरकार से उत्तर माँगा

मद्रास हाई कोर्ट ने दो तमिलनाडु विधानसभा बायपोल्स को स्थगित नहीं किया

सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी मेडिकल डिग्री रोकने की PIL खारिज, याचिकाकर्ता पर लगातार याचिका दाखिल करने की चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने बोनी कपूर के 2.7 एकड़ जमीन विवाद के निपटारे के लिए सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज को मध्यस्थ नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा

हाई कोर्ट ने सहायक जिला अभियोजक भर्ती रोकी: अनुभव प्रमाणन पर स्पष्ट नियम चाहते
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका से नई UPI नियमों पर रोक, MDR का असर आम नागरिकों पर
- सवर्ण समाज ने यूजीसी विरोध में पानी की टंकी पर चढ़कर एडीसीपी को ज्ञापन सौंपा
- बड़गांई जमीन केस: हाईकोर्ट ने सोरेन की हस्तक्षेप याचिका की सुनवाई समाप्त, आदेश सुरक्षित रखा
- विदेशी मध्यस्थता पुरस्कार पर ब्याज अब न्यायिक ऋण, कर नहीं लगाया जाएगा: दिल्ली ITAT ने फैसला
- UPI पर ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर शुल्क पर केंद्र के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
- सुप्रीम कोर्ट ने HPEC के पुनर्गठन को खारिज किया, जांच के मानकों को बरकरार रखा
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने कस्टम को 12 सोने के बार पर लगने वाली ड्यूटी का निर्धारण करने का निर्देश दिया
- राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत

