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बिहार में उच्च शिक्षा की तस्विर होगी बदली: डिग्रीज़ कॉलेज राज्यपाल के अधीन नहीं, कॉलेजों का प्रबंधन हो जाएगा एक ही हाथ मे

बिहार सरकार एक नया शिक्षा विधेयक लाने की तैयारी में है। यह विधेयक लागू होने के बाद डिग्री कॉलेज राज्यपाल के अधीन नहीं रहेंगे। इसके साथ ही, कॉलेजों का प्रबंधन एक ही हाथ में आ जाएगा।

16 जुलाई 2026 को 03:14 am बजे
बिहार में उच्च शिक्षा की तस्विर होगी बदली: डिग्रीज़ कॉलेज राज्यपाल के अधीन नहीं, कॉलेजों का प्रबंधन हो जाएगा एक ही हाथ मे

सौजन्य से:- Jansatta

बिहार सरकार आगामी मानसून सत्र में एक नया शिक्षा विधेयक लाने की तैयारी में है। इस प्रस्तावित कानून के तहत राज्य के डिग्री कॉलेजों को राज्य विश्वविद्यालयों से अलग कर दिया जाएगा। यदि यह विधेयक लागू होता है, तो स्नातक (यूजी) की पढ़ाई कराने वाले 500 से अधिक घटक (कॉन्स्टिट्यूएंट) कॉलेज सीधे नए बनाए जाने वाले उच्च शिक्षा विभाग के अधीन आ जाएंगे। इसके बाद विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति (चांसलर) के रूप में राज्यपाल का अधिकार केवल स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों तक ही सीमित रह जाएगा।

हालांकि, बिहार राजभवन ने अब तक राज्य सरकार के इस प्रस्ताव का सार्वजनिक रूप से विरोध नहीं किया है। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने 12 जुलाई को एक कार्यक्रम में कहा था कि आगामी विधानसभा सत्र में नया शिक्षा विधेयक पेश किया जाएगा।

उसी दिन जारी राजभवन के प्रेस बयान में कहा गया कि राज्यपाल ने कहा है कि राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि उच्च शिक्षा से जुड़ा नया विधेयक आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी महत्वपूर्ण कानून का निर्माण व्यापक अध्ययन, गहन विचार-विमर्श और लगातार किए गए कठिन परिश्रम का परिणाम होता है।

राजभवन और उच्च शिक्षा विभाग के सूत्रों ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद नए स्थापित कॉलेजों के साथ-साथ पुराने घटक कॉलेज भी सीधे उच्च शिक्षा विभाग के नियंत्रण में आ जाएंगे।

उच्च शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “अब शिक्षकों से जुड़े सभी मामलों का संचालन सीधे सचिवालय से किया जाएगा। अभी तक बिहार में विश्वविद्यालयों के लिए दो अलग-अलग कानून लागू थे – पहला पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 और दूसरा बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 था। अब इन दोनों को एक साथ मिलाया जा रहा है।”

फिलहाल बिहार में 21 राज्य विश्वविद्यालय हैं, जहां स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों स्तर की पढ़ाई होती है।

प्रस्तावित शिक्षा कानून की प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:

कॉलेजों के शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़े नीति निर्धारण, प्रशासनिक फैसले और पदोन्नति जैसे मामलों का अधिकार, जो अभी संबंधित विश्वविद्यालयों के पास है, अब सीधे उच्च शिक्षा विभाग के पास होगा।

शिक्षकों को किसी भी राजनीतिक गतिविधि में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी। वे किसी राजनीतिक विचारधारा का सार्वजनिक समर्थन, उसके पक्ष में लेखन या प्रचार भी नहीं कर सकेंगे।

प्रत्येक जिले में कॉलेजों की निगरानी के लिए एक उच्च शिक्षा पदाधिकारी नियुक्त किया जाएगा, ठीक उसी तरह जैसे स्कूलों के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) होते हैं।

डिग्री कॉलेज का कोई शिक्षक अब विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनने के लिए स्थानांतरित नहीं हो सकेगा। साथ ही, डिग्री कॉलेज में सहायक प्राध्यापक बनने के लिए अब न्यूनतम योग्यता केवल नेट (NET) के साथ स्नातकोत्तर (मास्टर डिग्री) होगी। पीएचडी की अनिवार्यता समाप्त कर दी जाएगी।

पटना के ए.एन. कॉलेज के एक शिक्षक ने कहा, “अब तक बिहार उन कुछ राज्यों में था, जहां दिल्ली विश्वविद्यालय जैसी व्यवस्था लागू थी। लेकिन बिहार में एक अतिरिक्त सुविधा थी कि डिग्री कॉलेज के शिक्षक आगे चलकर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बन सकते थे। नया शिक्षा कानून इस व्यवस्था को समाप्त कर देगा।”

इस मामले पर जब बिहार के उच्च शिक्षा निदेशक एन.के. अग्रवाल से संपर्क किया गया तो उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “जिस बात पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है, उस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। आधिकारिक रूप से विधेयक आने के बाद ही इसकी पूरी जानकारी मिलेगी। इसलिए हमें मंत्रिमंडल के फैसले का इंतजार करना चाहिए।”

इधर, बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 211 नए डिग्री कॉलेजों का उद्घाटन किया। ये कॉलेज राज्य के अलग-अलग प्रखंडों में स्थापित किए गए हैं। राज्य सरकार ने बिहार के सभी 534 प्रखंडों में एक-एक डिग्री कॉलेज खोलने का वादा किया है। इसके साथ ही राज्य में सरकारी डिग्री कॉलेजों की संख्या 500 से अधिक होने के करीब पहुंच गई है।

यह भी पढ़ें: कितने अमीर हैं प्रशांत किशोर? पहली बार चुनावी हलफनामे में दी जानकारी, पत्नी भी हैं 112 करोड़ की मालकिन

बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियों में तेजी के बीच जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपने चुनावी हलफनामे में अपनी संपत्ति का खुलासा किया है। 49 साल के प्रशांत किशोर 198 करोड़ के मालिक हैं। उनके पास 96 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है। वहीं, उनकी पत्नी जाह्नवी दास के पास करीब 112 करोड़ की संपत्ति है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक

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