अडानी ने अमेरिकी अदालत में कहा- उनके खिलाफ आरोप खारिज करने के पीछे कोई वादा या समझौता नहीं
अरबपति गौतम अडानी ने अमेरिकी अदालत में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि उनके खिलाफ आपराधिक आरोपपत्र को खारिज करने के अमेरिकी न्याय विभाग के फैसले के पीछे कोई वादा, समझौता या सौदा नहीं था।

सौजन्य से:- Hindustan
ना समझौता, ना सौदा हुआ... आरोप खारिज होने पर अमेरिकी अदालत में बोले गौतम अडानी
मुख्य बातें
- न्यायाधीश ने आठ जुलाई को अडानी से शपथ लेकर यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या आरोपों को वापस लेने के फैसले के संबंध में उन्हें किसी प्रस्ताव, समझौते या लाभ की जानकारी है
- अडानी ने इस बात से इनकार किया है कि अमेरिकी न्याय विभाग के फैसले के पीछे कोई वादा, समझौता या सौदा था
अरबपति गौतम अडानी ने इस बात से इनकार किया है कि उनके खिलाफ आपराधिक आरोपपत्र को खारिज करने के अमेरिकी न्याय विभाग के फैसले के पीछे कोई वादा, समझौता या सौदा था। अडानी ने अमेरिकी अदालत में दाखिल हलफनामे में ये बात कही। दरअसल, यह हलफनामा अमेरिका में न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले की जिला अदालत के न्यायाधीश निकोलस गराउफिस के निर्देश पर दाखिल किया गया है।
बता दें कि जिला न्यायाधीश ने आठ जुलाई को अडानी से शपथ लेकर यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या आरोपों को वापस लेने के फैसले के संबंध में उन्हें किसी प्रस्ताव, समझौते या लाभ की जानकारी है। बहरहाल, अमेरिकी अदालत अब न्याय विभाग के आरोपों को स्थायी रूप से खारिज करने के अनुरोध पर निर्णय लेने से पहले सभी पक्षों की दलीलों पर विचार कर रही है।
क्या है हलफनामे में?
गौतम अडानी ने अपने हलफनामे में कहा है कि उनके समूह की अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश की योजना 13 नवंबर, 2024 को सार्वजनिक की गई थी, जो आरोपपत्र सार्वजनिक होने से पहले की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस निवेश योजना का आरोप हटाने के निर्णय से कोई संबंध नहीं है। शपथ-पत्र के मुताबिक, अडानी की कानूनी सलाहकार फर्म सुलिवन एंड क्रॉमवेल एलएलपी ने न्याय विभाग और प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी) के अधिकारियों के साथ बैठकें कीं और विस्तृत दस्तावेज प्रस्तुत किए। हालांकि, बाद में विभाग ने स्पष्ट किया कि निवेश प्रस्ताव को मामले के सैटलमेंट निर्णय में शामिल नहीं किया जाएगा।
हालांकि, न्यायाधीश गराउफिस ने कहा था कि विभाग के ताजा हलफनामे से पहली बार यह संभावना सामने आई कि किसी तरह का समझौता हो सकता था, जबकि अदालत को कोई जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि आरोप हटाने के अनुरोध को मंजूरी देने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि इस निर्णय के पीछे के कारण वास्तविक हैं और कोई 'अज्ञात' समझौता इसमें शामिल नहीं है।
2024 का है मामला
अमेरिकी न्याय विभाग ने वर्ष 2024 में तत्कालीन जो बाइडेन प्रशासन के दौरान दायर आरोपों को वापस लेने का अदालत से अनुरोध किया था। इन आरोपों में गौतम अडानी और सात अन्य पर भारत में बिजली आपूर्ति अनुबंध हासिल करने के लिए करीब 25 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने और अमेरिकी बाजारों में पूंजी जुटाते समय निवेशकों को गुमराह करने का आरोप लगाया गया था।
अडानी की तरफ से अमेरिकी प्रशासन के लगाए सभी आरोपों को खारिज किया जा चुका है। हालांकि, इस खबर की वजह से अडानी समूह के शेयरों में तेज गिरावट आई थी और चार कारोबारी सत्रों में ही करीब 2.85 लाख करोड़ रुपये का बाजार पूंजीकरण घट गया था।
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